वेस्ट एशिया में बढ़ते युद्ध और सप्लाई संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के 32 देशों ने इमरजेंसी भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारने का फैसला किया है. हालांकि वैश्विक खपत के मुकाबले यह तेल सिर्फ चार दिन की जरूरत ही पूरी कर पाएगा.
भारत ने इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के इस फैसले का स्वागत किया है.
हालांकि आंकड़े बताते हैं कि यह बड़ा दिखने वाला कदम भी वैश्विक मांग के मुकाबले बेहद छोटा साबित हो सकता है. दुनिया भर में रोज जितना तेल इस्तेमाल होता है, उसके हिसाब से यह पूरा भंडार सिर्फ 4 दिन की जरूरत ही पूरी कर पाएगा.
होर्मुज के कारण बढ़ा संकट
मौजूदा संकट की सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz में पैदा हुई स्थिति है. यह समुद्री रास्ता दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है. वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. अगर इस रास्ते पर रुकावट आती है तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई तुरंत प्रभावित होती है. बाजार के अनुमानों के मुताबिक रोजाना 11 से 16 मिलियन बैरल तक तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
उत्पादन और रिफाइनिंग पर भी असर
वेस्ट एशिया में बढ़ते खतरे के कारण कई तेल उत्पादक देशों ने भी अपनी सप्लाई कम कर दी है. रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ बड़े उत्पादकों ने करीब 6 प्रतिशत तक उत्पादन घटा दिया है. ड्रोन हमलों और सुरक्षा जोखिमों के कारण संयुक्त अरब अमीरात की बड़ी रिफाइनरियों में से एक रुवैस रिफाइनरी को भी अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है, जिससे बाजार में चिंता और बढ़ गई है.
भारत ने IEA के फैसले का किया स्वागत
इस बीच भारत सरकार ने भी इस कदम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय ने कहा कि भारत जो इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का एसोसिएट सदस्य है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग में सक्रिय भूमिका निभाता है, वह इमरजेंसी तेल भंडार जारी करने के फैसले का स्वागत करता है. मंत्रालय के अनुसार सरकार वैश्विक ऊर्जा बाजार में बन रही स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, खासकर वेस्ट एशिया में विकसित हो रहे हालात पर. सरकार ने यह भी कहा कि वैश्विक बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ने पर भारत भी अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के साथ कदम मिलाकर जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार है.
कीमतों पर कितना पड़ेगा असर
फतीह बरोल ने इस कदम को इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक कार्रवाई बताया है. इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी जरूर आई है. इसके बावजूद बाजार के जानकार मानते हैं कि जब तक होर्मुज का रास्ता पूरी तरह सामान्य नहीं होता, तब तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है. ऐसे में दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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