लोकसभा में उठा मुद्दा
इस मुद्दे की गूंज संसद तक भी पहुंची। 10 अगस्त 2026, सोमवार को लोकसभा में सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने सरकार से सीधा सवाल पूछा कि क्या ईपीएस-95 की न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये करने की कोई योजना है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि ईपीएस-1995 योजना के तहत कितने कर्मचारी आते हैं और उन्हें कुल कितनी पेंशन राशि दी जा रही है।
सरकार ने क्या जवाब दिया?
सरकार की ओर से श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया कि पेंशन बढ़ेगी या नहीं। हालांकि, उन्होंने अपने जवाब में यह जरूर बताया कि सरकार पहले से ही 1.16% वेतन के बजट सपोर्ट के अलावा भी पेंशनर्स को राहत दे रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि ईपीएस फंड दो स्रोतों से बनता है।
पहला, इम्प्लॉयर द्वारा कर्मचारी के वेतन का 8.33% अंशदान, और दूसरा, केंद्र सरकार द्वारा 15,000 रुपये प्रति माह तक की वेतन सीमा पर 1.16% का बजटीय अंशदान। उन्होंने यह भी बताया कि योजना के तहत सभी लाभ इसी फंड से दिए जाते हैं और ईपीएस, 1995 के पैरा 32 के तहत इस कोष का सालाना मूल्यांकन किया जाता है।
इसके अलावा, मंत्री ने कहा कि सरकार बजट के सहायता के जरिए ही पेंशनर्स को 1,000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन मुहैया करा रही है, जो कि ऊपर बताई गई 1.16% की वार्षिक सहायता से अलग और अतिरिक्त है।
करीब 85.85 लाख हैं पेशनर्स
मंत्री ने संसद को बताया कि 31 मार्च 2026 तक ईपीएस योजना के तहत कुल पेंशनर्स की संख्या 85,84,604 (करीब 85.85 लाख) है। इसी अवधि तक योजना के अंतर्गत कुल 15,819.28 करोड़ रुपये की पेंशन राशि वितरित की जा चुकी है। ये आंकड़े बताते हैं कि ईपीएस योजना कितनी बड़ी आबादी को कवर करती है और इसके तहत कितनी भारी राशि का लेन-देन होता है।
क्या भविष्य में पेंशन बढ़ाने की संभावना है?
मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि सरकार फिलहाल न्यूनतम पेंशन को तुरंत बढ़ाने पर विचार नहीं कर रही है, क्योंकि मंत्री का जवाब काफी सतर्क और गणितीय था। हालांकि, भविष्य में इस बढ़ोतरी से इंकार भी नहीं किया जा सकता है।
करंदलाजे ने अपने बयान में यह भी कहा कि सरकार ईपीएफओ योजनाओं के सदस्यों को मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवच देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इस दौरान फंड की स्थिरता और भविष्य की देनदारियों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। यानी जितनी भी पेंशन दी जाएगी, वह लंबे समय तक टिकाऊ और मजबूत आधार पर ही तय की जाएगी।
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