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औषधीय गुणों की खान है यह खूबसूरत फूल, चिंता-अनिद्रा जैसी कई परेशानी में कारगर

 

मोहम्मद रफी का 54 साल पुराना गाना, परमसुंदरी ने जितेंद्र संग दिए थे ऐसे सीन, थिएटर में लोगों ने देख छिपाई थी आंखें

Jasmine Health Benefits: चमेली का पौधा मनमोहक खुशबू के लिए जाना जाता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह एक प्रभावशाली जड़ी-बूटी भी है. आयुर्वेद में चमेली को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है. सीधी के आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि चमेली की खुशबू न केवल मन को प्रसन्न करती है बल्कि दिमाग को भी शक्तिशाली बनाती है और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करती है. यही कारण है कि चमेली के फूलों का उपयोग कई आयुर्वेदिक दवाइयों के निर्माण में किया जाता है. चमेली के फूलों और तेल का उपयोग मानसिक तनाव को दूर करने के लिए बेहद कारगर है. इसकी खुशबू तंत्रिका तंत्र को शांत करती है और मन को गहरी शांति प्रदान करती है. चमेली में मौजूद प्राकृतिक रसायन तनावग्रस्त नसों को आराम देते हैं, जिससे चिंता और बेचैनी कम होती है. नियमित रूप से इसके तेल या खुशबू का उपयोग करने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है.

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कपिल शर्मा का शो द कपिल शर्मा शो बीते कुछ समय से म्यूजिक राइट कंट्रोवर्सी से विवादों में था। लंबे समय बाद अब कपिल शर्मा ने इस पर रिएक्शन दिया है। उनका कहना है कि लाखों के बिल से बचने के लिए अब से वो अपने गाने खुद बनाएंगे। कपिल शर्मा की टीम हाल ही में नेटफ्लिक्स के इवेंट व्हॉट नेक्स्ट में पहुंची थीं। नेटफ्लिक्स ने इवेंट में अपकमिंग सीरीज और फिल्मों की अनाउंसमेंट की, जिसमें द ग्रेट इंडियन कपिल शो का पांचवा सीजन भी शामिल था। इस दौरान कपिल ने बताया है कि अब से सुनील ग्रोवर शो में खुद गाने गाएंगे। कपिल ने कहा कि अरिजीत के प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने के बाद उन्होंने मौका देखकर सुनील ग्रोवर को बतौर सिंगर लॉन्च किया है। आगे उन्होंने कहा- ‘म्यूजिक राइट्स का पंगा बहुत था। किसी का गाना यूज कर लो लाखों का बिल आ जाता था। अब हम अपना ही बनाएंगे। हमारा जहां दिल करेगा हम गाएंगे।’ इस पर सुनील ग्रोवर ने कहा- ‘मुझे लगता है कि इसी वजह से अरिजीत सिंह ने रिटायरमेंट ले लिया। ये सुनने के बाद।’ इवेंट में कपिल शर्मा ने कनाडा के कैफे में हुई फायरिंग पर भी बात की, जिसकी जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली थी। उन्होंने कहा, ‘आज कल मेरे पीछे एक-दो मुल्कों के गैंगस्टर पीछे लगे हुए हैं’। हालांकि बाद में उन्होंने तुरंत टीम से कहा कि उनका ये बयान काट दिया जाए। इसके कुछ देर बाद ही उन्हें एहसास हो गया कि इवेंट लाइव है। क्या है कपिल शर्मा की म्यूजिक राइट कंट्रोवर्सी PPL द्वारा 12 दिसंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट में कपिल शर्मा के शो के खिलाफ कमर्शियल याचिका दायर की गई थी। कॉपीराइट नियमों का उल्लंघन का आरोप लगाते हुए याचिका में कहा गया था कि कपिल के शो के तीसरे सीजन में जून से सितंबर के बीच 3 लाइसेंसी गानों का इस्तेमाल बिना इजाजत किया गया। आरोप- इन गानों का हुआ बिना इजाजत इस्तेमाल इन गानों का कॉपीराइट PPL इंडिया के पास है। बिना इजाजत इन गानों का इस्तेमाल कमर्शियल तौर पर करना कॉपीराइट कानून का उल्लंघन है। इन गानों का इस्तेमाल सिर्फ लाइसेंस होल्डर ही कर सकते हैं।

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Success Story: सीकर के दिनेश भाकर ने इंजीनियरिंग के बाद नौकरी के बजाय घोड़ों के पालन और प्रशिक्षण को अपना करियर बनाया. उनके स्टड फार्म में ‘सूचेतक’ जैसे घोड़े हैं जिनकी कीमत 1.78 करोड़ रुपये तक लग चुकी है. राजस्थान और झारखंड में फैले उनके ‘दुर्गा स्टड फार्म’ ने उन्हें देशभर में एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान दिलाई है.

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सीकर. अगर इंसान अपने पैशन को पहचान ले और उसे कड़ी मेहनत से आगे बढ़ाए, तो वही पैशन एक दिन उसकी बड़ी पहचान बन जाता है. इस कहावत को सीकर के नेछवा क्षेत्र स्थित भाकरो की ढाणी निवासी दिनेश भाकर ने सच साबित कर दिखाया है. दिनेश अपने फार्म हाउस पर लग्जरी गाड़ियों से भी महंगे लाखों-करोड़ों रुपये के घोड़े तैयार कर रहे हैं. पॉलिटेक्निक इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिनेश ने तकनीकी फील्ड में नौकरी करने के बजाय अपने बचपन के शौक को ही भविष्य चुना. उन्हें घोड़ों से लगाव विरासत में मिला था, क्योंकि उनके पिता सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद घर पर एक घोड़ी लाए थे.

दिनेश ने साल 2014 में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 6 महीने की एक सफेद घोड़ी खरीदी और उसका नाम ‘दुर्गा’ रखा. दिनेश ने दुर्गा को डांस और प्रतियोगिताओं के लिए विशेष ट्रेनिंग दी. देखते ही देखते दुर्गा ने नागौर, बालोतरा, मुंबई और शेखावाटी महोत्सव 2023 सहित देश की कई बड़ी प्रतियोगिताओं में खिताब जीते. इस सफलता से उत्साहित होकर दिनेश ने साल 2019 में 1.80 लाख रुपये की लागत से अपने खेत में एक छोटा स्टड फार्म शुरू किया. यहाँ उन्होंने मारवाड़ी और नुकरा जैसी श्रेष्ठ नस्लों के घोड़े-घोड़ियां पालना और उन्हें प्रशिक्षित करना शुरू किया.

करोड़ों की बोली और ‘सूचेतक’ का जलवा
आज दिनेश भाकर के स्टड फार्म में देशभर के सबसे सुंदर और ऊंचे घोड़ों में गिना जाने वाला ‘सूचेतक’ मौजूद है. मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीत चुके 68 इंच ऊंचे सूचेतक को खरीदने के लिए खरीदारों ने 1.78 करोड़ रुपये तक की बोली लगाई है. एक समय 1.80 लाख रुपये से शुरू हुआ यह सफर आज करोड़ों के टर्नओवर तक पहुँच चुका है. हाल ही में पुष्कर मेले में भी दिनेश की घोड़ी ‘दुर्गा भारत’ ने अपनी सुंदर बनावट के चलते पूरे मेले में तीसरा स्थान प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन किया है.

राजस्थान से झारखंड तक फैला कारोबार
दिनेश भाकर का यह काम अब सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने झारखंड में भी अपना फार्म हाउस संचालित किया है. अपनी पहली घोड़ी दुर्गा के सम्मान में उन्होंने फार्म का नाम ‘दुर्गा स्टड फार्म’ रखा है. वे अब तक सैकड़ों घोड़ों का सफल कारोबार कर चुके हैं और घोड़ों की ब्रीडिंग सुविधा भी उपलब्ध करवा रहे हैं. दिनेश बताते हैं कि हर महीने घोड़ों के खान-पान और रखरखाव पर लगभग 50 हजार रुपये का खर्च आता है. उन्होंने साबित कर दिया कि यदि जुनून सच्चा हो, तो पारंपरिक नौकरियों के पीछे भागने के बजाय अपने हुनर से भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है.

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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

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पैशन की जीत! सीकर के दिनेश ने घोड़ों के शौक से खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस

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डिजिटल दौर में सेलेब्रिटीज की पहचान के गलत इस्तेमाल के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं. अब बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने अपनी इमेज, नाम और आवाज के मिसयूज को लेकर बड़ा कदम उठाया है. पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

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एक्टर ने उठाया बड़ा कदम

नई दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने अपनी पहचान और इमेज के गलत इस्तेमाल को लेकर बड़ा कानूनी कदम उठाया है. उन्होंने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. अभिनेता का कहना है कि उनके नाम, फोटो, आवाज और पहचान से जुड़ी चीजों का कई डिजिटल प्लेटफॉर्म और वेबसाइट्स पर बिना इजाजत इस्तेमाल किया जा रहा है.

विवेक ओबेरॉय की ओर से वकील सना रईस खान ने कोर्ट में यह याचिका दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि यह अनधिकृत इस्तेमाल सिर्फ व्यावसायिक फायदे के लिए किया जा रहा है, जिससे अभिनेता की सार्वजनिक छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है.

विवेक ओबेरॉय ने दर्ज किया केस

विवेक ने कोर्ट को बताया कि वह एक पब्लिक फिगर जरूर हैं, लेकिन उनकी पहचान पर पहला और कानूनी अधिकार उन्हीं का है. कोई भी व्यक्ति या संस्था उनकी अनुमति के बिना उनकी छवि या पहचान का इस्तेमाल नहीं कर सकती. अभिनेता ने यह भी कहा कि आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक तकनीक और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए किसी सेलेब्रिटी की तस्वीर और आवाज का गलत इस्तेमाल करना आसान हो गया है. अगर इस पर समय रहते रोक नहीं लगी, तो इससे न सिर्फ आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि सामाजिक और मानसिक स्तर पर भी गंभीर असर पड़ सकता है.

कार्ट के सामने रखी मांग

विवेक ओबेरॉय ने अदालत से मांग की है कि उनके पर्सनैलिटी राइट्स की पूरी तरह से रक्षा की जाए और भविष्य में किसी भी तरह के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए. उन्होंने साफ किया है कि उनकी यह याचिका रचनात्मक अभिव्यक्ति या पत्रकारिता की आजादी के खिलाफ नहीं है. उनका मकसद सिर्फ इतना है कि विज्ञापन, प्रमोशन, डिजिटल कंटेंट या किसी भी व्यावसायिक काम में उनकी पहचान का इस्तेमाल उनकी साफ-साफ सहमति के बिना न किया जाए.

बता दें कि विवेक ओबेरॉय की वकील सना रईस खान ने कोर्ट में दलील दी कि पर्सनैलिटी राइट्स व्यक्ति की गरिमा और निजता से जुड़े होते हैं. किसी सेलेब्रिटी की लोकप्रियता का गलत फायदा उठाकर मुनाफा कमाना कानून के खिलाफ है और इस पर सख्ती जरूरी है. अगर ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए, तो भविष्य में यह समस्या और गंभीर हो सकती है.

गौर करने वाली बात है कि हाल के सालों में कई भारतीय कलाकार और सार्वजनिक हस्तियां अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए अदालत का रुख कर चुकी हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते असर के चलते यह मुद्दा लगातार अहम होता जा रहा है.

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Munish Kumar

न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ…और पढ़ें

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‘नाम-फोटो का हो रहा मिसयूज’, विवेक ओबेरॉय पहुंचे दिल्ली हाई कोर्ट

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Mamata Banerjee SIR Argue Live: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस मामले में उनके खुद अदालत में जिरह करने की संभावना ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है. इस खबर में पढ़ें इस सुनवाई पर पल पल के अपडेट.

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बंगाल में SIR को लेकर ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ SC में याचिका दायर की है. (फाइल फोटो PTI)

Mamata Banerjee SIR Argue Live: पश्चिम बंगाल की राजनीति अब सियासी मंच से निकलकर सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गई है. राज्य में चल रहे वोटर लिस्ट रिवीजन यानी एसआईआर को लेकर बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मामला सिर्फ वोटर लिस्ट तक सीमित नहीं है. यह लोकतंत्र, अधिकार और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की बहस में बदलता दिख रहा है. सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि खबरों के मुताबिक ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रख सकती हैं. अगर ऐसा होता है तो यह भारतीय राजनीति और न्यायिक इतिहास का बेहद खास पल बन सकता है.

न्यूज एजेंसी IANS के अनुसार इस मामले ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि SIR प्रक्रिया के जरिए लाखों मतदाताओं के वोट देने का अधिकार छीनने की कोशिश हो रही है. उन्होंने आयोग पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप भी लगाया है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई करने जा रही है. इस सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं. यह फैसला सिर्फ बंगाल ही नहीं बल्कि देश की चुनावी प्रक्रियाओं पर भी बड़ा असर डाल सकता है.

SIR विवाद आखिर है क्या?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन वोटर लिस्ट की जांच और संशोधन की प्रक्रिया है. चुनाव आयोग का कहना है कि इसका मकसद वोटर लिस्ट को साफ और सटीक बनाना है. लेकिन ममता बनर्जी और टीएमसी नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए असली मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं. खासकर समाज के कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है. इसी वजह से यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है.

क्या ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में जिरह कर सकती हैं?

भारतीय कानून के तहत कोई भी व्यक्ति अपने केस में खुद पक्ष रख सकता है. अगर ममता बनर्जी ऐसा करती हैं तो यह बेहद असाधारण और ऐतिहासिक घटना होगी. हालांकि आमतौर पर संवैधानिक मामलों में वरिष्ठ वकील पक्ष रखते हैं. लेकिन राजनीतिक संदेश और जनसंपर्क के नजरिए से ममता बनर्जी का खुद अदालत में खड़ा होना बड़ा कदम माना जा सकता है. इससे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है.

इस मामले का चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?

यह विवाद बंगाल विधानसभा चुनाव की दिशा तय कर सकता है. अगर सुप्रीम कोर्ट SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाता है तो चुनाव आयोग को प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ सकता है. वहीं अगर आयोग का पक्ष मजबूत रहता है तो TMC इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जा सकती है. दोनों ही स्थिति में यह मामला चुनावी माहौल को और ज्यादा गर्म कर सकता है.

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सियासी टकराव

सुप्रीम कोर्ट की बेंच की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं. यही बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. इससे पहले टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन भी इसी मुद्दे पर कोर्ट का रुख कर चुके हैं. ममता बनर्जी ने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष ऑब्जर्वर और माइक्रो ऑब्जर्वर सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए नियुक्त किए गए हैं, जो राजनीतिक मंशा को दर्शाता है.

आगे क्या हो सकता है?

  1. सुप्रीम कोर्ट SIR प्रक्रिया पर रोक या संशोधन के निर्देश दे सकता है.
  2. चुनाव आयोग को अपनी प्रक्रिया का विस्तृत जवाब देना पड़ सकता है.
  3. यह विवाद बंगाल चुनाव का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है.
  4. ममता बनर्जी का कानूनी और राजनीतिक दांव राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है.

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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें

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Live: वोटर लिस्ट पर सुप्रीम संग्राम! EC बनाम ममता, क्या खुद बहस करेंगी दीदी?

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लोगों की सेहत का राज उनका रोज का खाना है. दरअसल, लोग जब खाना खाते हैं तो वो सेहत के लिए जरूरी कई चीजों का सेवन करते हैं. यही वजह है कि किचन को लोगों को सिर्फ खाना बनाने तक नहीं बल्कि उसे सेहत से भी जोड़ना चाहिए. किचन में इस्तेमाल होने वाली लगभग हर चीज कहीं न कहीं आपकी सेहत के लिए उपयोगी और जरूरी है.

शशांक शेखर/जहानाबाद: कुछ लोगों को सिंपल खाना अच्छा लगता है तो कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें चटपटा और तीखा खाना पसंद होता है. कई लोग तो ऐसे हैं जो काफी तीखा भोजन करते हैं. अपने भोजन को अधिक तीखा बनाने के लिए लोग लाल मिर्च का भी इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, लाल मिर्च पाउडर या साबुत लाल मिर्च की तुलना में हरी मिर्च अधिक गुणकारी और लाभकारी होती है? एक्सपर्ट भी हरी मिर्च खाने की सलाह देते हैं. इसके फायदे जानने के लिए हमने जहानाबाद में लंबे समय से होम्योपैथी की प्रैक्टिस कर रहे और समय-समय पर लोगों को घरेलू सलाह देने वाले डॉ. आमिर अनवर से बात की. उन्होंने अपनी जानकारी के आधार पर हरी मिर्च खाने के फायदे बताए हैं.

हरी मिर्च खाने के फायदे
डॉ. आमिर अनवर का कहना है कि हरी मिर्च का सेवन सदियों से होता आ रहा है. कभी खाने के साथ तो कभी सलाद के साथ लोग हरी मिर्च का सेवन करते हैं. उन्होंने बताया कि हरी मिर्च में बहुत सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिसमें मैग्नीशियम, आयरन, पोटैशियम आदि शामिल हैं. यह हार्ट के हेल्थ के लिए भी काफी लाभकारी है. हरी मिर्च का सेवन वजन संतुलन में भी कारगर है. इसके साथ ही किडनी के लिए भी गुणकारी है.

खाने का क्या है सही तरीका
डॉक्टर अनवर ने कहा, “डायबिटीज मरीज हर दिन एक हरी मिर्च खा सकते हैं. ये उनके लिए हेल्दी है क्योंकि हरी मिर्च ब्लड शुगर लेवल स्थिर रखने में सहायता करती है. एक हरी मिर्च खाने से इम्यूनिटी बूस्ट होती है. ऐसा करने से बदलते मौसम में रोगों से लड़ने में काम आयेगा. डॉक्टर का मानना है कि इंसान अगर 3 से 4 हरी मिर्च रोजाना सेवन करते हैं तो उनके लिए फायदेमंद होगा.”

अक्सर यह देखा जाता है कि लोग किसी चीज का अधिक सेवन करने लगते हैं, जो फायदे की जगह नुकसान करता है. डॉक्टर भी इसे सीमित मात्रा में खाने की सलाह देते हैं. ज्यादा मिर्च का सेवन आपके पेट में जलन पैदा कर सकता है और इससे बवासीर यानी पाइल्स की भी बीमारी हो सकती है.

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Rajneesh Singh

जी न्यूज, इंडिया डॉट कॉम, लोकमत, इंडिया अहेड, न्यूज बाइट्स के बाद अब न्यूज 18 के हाइपर लोकल सेगमेंट लोकल 18 के लिए काम कर रहा हूं. विभिन्न संस्थानों में सामान्य खबरों के अलावा टेक, ऑटो, हेल्थ और लाइफ स्टाइल बीट…और पढ़ें

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डायबिटीज के मरीज रोज करें हरी मिर्च का सेवन, इम्युनिटी भी होती है बूस्ट

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अब सिर्फ उसकी ये तस्वीर ही अमानत जैसी है। समय मिलता है, उठा लेती हूं। जब तस्वीर मेरे हाथ में रहती है, तो ऐसा लगता है, जैसे उसे बचपन में गोदी उठाते समय लगता था। ये कहना है 2024 के पुणे हिट एंड रन में अपनी जान गंवाने वाले उमरिया के सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनीश अवधिया की मां का। आंसू पोछते हुए सविता कहती हैं, इस इलाके में परंपरा है कि जब कोई व्यक्ति नहीं रहे, तो उसकी एक भी चीज घर में नहीं रखी जाती। सब कुछ अस्थियों के साथ विसर्जित कर दिया जाता है। अनीश के लिए भी ऐसा ही करना पड़ा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पुणे हिट एंड रन केस में ब्लड सैंपल बदलने के तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। इसके बाद से जबलपुर और उमरिया में दोनों मृतकों के परिजन परेशान से हैं। मामला 18 मई 2024 की रात पुणे के कल्याणी नगर में हुए हादसे का है। बिजनेसमैन के नशे में धुत नाबालिग बेटे ने पोर्श कार से बाइक सवार को टक्कर मार दी थी। इसमें 24 साल के दो सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनीश अवधिया और उसकी दोस्त अश्विनी कोष्टा की मौके पर ही मौत हो गई थी। आरोप है कि नाबालिग के पिता और कुछ लोगों ने अस्पताल के स्टाफ के साथ मिलकर ब्लड टेस्ट रिपोर्ट बदलवाई, ताकि शराब का सबूत न मिले। इसके लिए अस्पताल स्टाफ को पैसे दिए गए। बाद में ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में दो बिजनेसमैन गिरफ्तार हुए। हाई कोर्ट ने उनकी जमानत खारिज कर दी थी। कहा था कि पैसे वाले आरोपियों के बाहर आने से गवाहों से छेड़छाड़ हो सकती है। न्याय में रुकावट आ सकती है। आंखों में आंसू, हाथों में प्लायवुड का टुकड़ा
बल्ड सैंपल बदलने के आरोपी आदित्य सूद, आशीष मित्तल और अमर गायकवाड़ को जमानत मिलने के बाद दैनिक भास्कर की टीम उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली पहुंची। पाली में सॉफ्टवेयर इंजीनियर मृतक अनीश अवधिया का दो मंजिला पैतृक घर है। इसी में उनके दादा, माता-पिता और भाई रहते हैं। पिता की प्रिंटिंग प्रेस है, तो दादा वकील हैं। भाई इंजीनियरिंग कर रहा है। आज भी यहां का माहौल गमगीन सा है। मैंने दरवाजे पर दो-तीन बार कॉल-बेल बजाई। कुछ देर में अनीश की मां सविता अवधिया बाहर आईं। आंखों में आंसू थे। हाथों में प्लायवुड का बड़ा सा टुकड़ा लिए छाती से चिपकाए थीं। वे कुछ पूछतीं, इससे पहले ही मैंने कहा- ओमजी से मिलना है। ओमजी और उनके परिवार को पहले से जानता था। डेढ़ साल पहले अनीश के अंतिम संस्कार के समय यहां आया था। तब उनसे काफी देर तक अनीश के बारे में बातें हुई थीं। इतने में ओमजी भी बाहर आ गए। उनके साथ घर के अंदर आ गया। मां बोली- दूसरे लड़कों की तरह वह नहीं था
घर में ओमजी के पिता रमाकांत भी मौजूद हैं। सविताजी जो प्लायवुड के टुकड़े को छाती से चिपकाए थीं, वो अनीश की फोटो का फ्रेम है। अनीश की तस्वीर पर तिलक लगा है। वे बार-बार तस्वीर पर चेहरे वाली जगह हाथ, तो कभी बालों पर हाथ फेर रही हैं। वे कहती हैं- बचपन में जब भी उसे गोद में लेती, तब उसके गालों पर हाथ फेरना और बालों को सहलाती थी। अब भी ऐसा ही लगता है। हादसे के पहले अनीश दुबई जाने की तैयारियां कर रहा था। दूसरे लड़कों की तरह तो वो था ही नहीं। सुबह से लेकर रात तक तीन-चार बार फोन करता था। उस रोज भी फोन किया था। लेकिन, फिर उसके न रहने की खबर आई। मेरे लिए तो सबकुछ खत्म सा हो गया है। घर में कहीं भी रहूं, फोन की घंटी बजती है, तो पल भर के लिए लगता है कि अनीश का फोन है, पर ये सब तो अब कल्पना भर है। वो तो हमेशा के लिए चला गया। वो बहुत लकी था, शादी के लिए रिश्ते आ रहे थे
सविता कहती हैं कि हम लोग उसे प्यार से लकी कहते थे। उसे लकी कहने की भी वजह है। उसके जन्म के बाद से हमारे परिवार में सबकुछ अच्छा होने लगा, तो हम उसे लकी कहने लगे। पुणे में पढ़ाई के बाद जब उसकी नौकरी लगी थी, तो वो बहुत खुश था। उसने सबसे पहले मुझे बताया। लोग उसके रिश्ते की बात करने लगे थे। हम भी सोच रहे थे कि एक बार दुबई में सैटल हो जाए, तो उसकी शादी कर देंगे। लेकिन, अपना सोचा, पूरा कहां होता है। अगर उसकी शादी हो गई होती, तो अब तक तो दादी बन गई होती। सोचती थी कि जब उसकी शादी हो जाएगी, तो उसके बच्चे अपने पास ही रखूंगी। उसी की तरह खूब खिलाऊंगी, लेकिन, मेरी किस्मत में तो कुछ और ही लिखा था, सबकुछ खत्म सा हो गया है। अब उसके बच्चों की जगह उसकी तस्वीर लिए घूमती रहती हूं। उम्मीद थी कि हमें न्याय मिलेगा। लेकिन, आरोपियों को तो जमानत मिल गई।
20 महीने से न्याय की आस लगाए बैठे
बगल में ही बैठे अनीश के पिता ओम अवधिया कहते हैं कि वो लोग तो केस दबाने या झूठा केस बनाने की हर कोशिश में आज तक लगे हैं। बड़ी पहुंच और पैसे वाले लोग हैं। वहां के नेता और विधायक तक उनके साथ हैं। वो तो पुलिस और कोर्ट की वजह से आरोपियों पर केस हुआ। अगर ऐसा नहीं होता, तो आज तक तो साधारण एक्सीडेंट मान कर केस ही खत्म हो जाता। हाईकोर्ट ने जमानत खारिज की, तो वो लोग सुप्रीम कोर्ट चले गए। वहां से सोमवार को जमानत मिल गई। हम लोग तो 20 महीने से बेटे को न्याय दिलाने की आस लगाए हैं। हमारे तो बेटे की मौत हुई है। दिन-रात कैसे गुजरते हैं, हम ही जानते हैं। जब कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, तो ऐसा लग रहा था कि सैंपल बदलने वाले आरोपियों को जमानत नहीं मिलेगी। क्योंकि, केस का टर्निंग पाइंट ही यही है। जो आरोपी के पिता के पैसे के रसूख और उसकी ऊंची पहुंच को दिखाता है। जैसे ही, आरोपियों की जमानत की खबर आई, मन उदास सा हो गया। ऐसा लगा कि क्या लकी को न्याय मिल पाएगा। लेकिन, हमें अदालत पर भरोसा है। पोर्शे कार की रफ्तार 200 किमी/घंटा थी
नाबालिग आरोपी 18 मई की रात अपने दोस्तों के साथ 12वीं पास करने की खुशी में पब से पार्टी करके वापस घर जा रहा था। रात करीब 2.15 बजे कार ने बाइक सवारों को टक्कर मारी थी। उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया था कि कार की टक्कर से अश्विनी हवा में कई फीट उछलकर जमीन पर आ गिरी थी। उनके कलीग्स अनीश पास खड़ी दूसरी कार में जा टकराए थे। लोगों ने ये भी बताया कि घटना की जानकारी मिलने के 15 मिनट के अंदर पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। हमने कार सवार लड़कों को पकड़ा। वे नशे में थे। एक लड़का भाग गया था। घटना के वक्त उनकी कार की स्पीड 200 किमी प्रति घंटे थी। एयरबैग खुल गए, इसलिए भाग नहीं पाए
पुलिस ने बताया था कि पोर्शे कार पर नंबर प्लेट नहीं थी। कार सवार नशे में थे। टक्कर के कारण कार के एयरबैग खुल गए थे। आगे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, इसलिए आरोपी वहां से भाग नहीं पाए और मजबूरन उन्हें कार रोकनी पड़ी। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने लड़कों को पकड़ा। जब लोग एक को पीट रहे थे, इस दौरान दूसरा वहां से भाग गया। कोर्ट ने 300 शब्दों का निबंध लिखने के लिए कहा था
हादसे के 42 दिन बाद नाबालिग आरोपी ने रोड एक्सीडेंट पर 300 शब्दों का निबंध लिखकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को सबमिट किया था। जुवेनाइल बोर्ड ने आरोपी को 300 शब्दों का निबंध लिखने सहित कुल 7 शर्तों पर जमानत दी थी। हालांकि, पुलिस की मांग और लोगों के आक्रोश के बाद जुवेनाइल बोर्ड ने अपने फैसले में संशोधन किया था। 22 मई 2024 को बोर्ड ने आरोपी को बाल सुधार गृह में भेजने का आदेश दिया था। हालांकि, 25 जून को बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी।

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शेयर बाजार में आज यानी 4 फरवरी को गिरावट है। सेंसेक्स 200 अंक गिरकर 83,500 के लेवल पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में 30 अंक की गिरावट है, ये 25,700 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। रियल्टी, मेटल और IT शेयर में बिकवाली है। वहीं ऑटो शेयर में बढ़त है। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 में बढ़त है। निफ्टी 50 शेयरों में से 43 शेयरों चढ़कर कारोबार कर रहे हैं। वहीं कल सेंसेक्स में 2500 अंकों की तेजी रही। निफ्टी भी 639 अंक चढ़कर बंद हुआ। ट्रम्प ने भारत पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है, जिस वजह से बाजार चढ़ा। ग्लोबल मार्केट में मिला जुला कारोबार विदेशी निवेशकों ने 3 फरवरी को 5,426 करोड़ के शेयर खरीदे कल बाजार में तेजी रही सेंसेक्स में 2073 अंक (2.54%) बढ़कर 83,739 पर बंद हुआ। निफ्टी में 639 अंक (2.55%) की तेजी रही, ये 25,728 पर बंद हुआ। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 4.79% चढ़कर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 में बढ़त रही। वहीं निफ्टी 50 शेयरों में से 46 शेयरों चढ़कर बंद हुए।

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homevideosमोहम्मद रफी का 54 साल पुराना गाना, परमसुंदरी ने जितेंद्र संग टूटकर किया रोमांस

 

जितेंद्र ने अपने करियर में कई हिट फिल्में दी हैं. साल 1972 में भी उन्होंने एक फिल्म में काम किया था. उस फिल्म का नाम है रूप तेरा मस्ताना. इस फिल्म में जितेंद्र के साथ मुमताज नजर आई थीं. फिल्म में दोनों की केमिस्ट्री को काफी पसंद किया गया था. लेकिन फिल्म के एक गाने में जितेंद्र और राजेश खन्ना संग कई हिट देने वाली एक्ट्रेस मुमताज ने ऐसे सीन दिए थे कि लोगों ने अपनी आंखें छिपा ली थी. वो गाना है ‘हसीन दिलरूबा करीब आ’ इस गाने में मुमताज ने जितेंद्र संग टूटकर रोमांस किया था. जितेंद्र इस तरह के रोल कम ही किया करते थे. फिल्म में दोनों का् ये गाना उस दौर में काफी चर्चा में रहा था. मुमताज अपने दौर की स्टारइलिश एक्ट्रेस रही है. वह हर तरह के रोल करती थीं. इस फिल्म में भी उनका ये अवतार देख लोग हैरान हो गए थे.

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Rules for loco pilots in fog- क्‍या आपको पता है कि लोको पायलट अपनी मर्जी से भी ट्रेन चला सकता है. उस पर रेलवे के कोई नियम लागू नहीं होता है. रेलवे जानते हुए भी उस पर कोई एक्‍शन नहीं ले सकता है. सुनकर हैरानी जरूरी हो रही होगी, लेकिन यह सच है, रेलवे लोको पायलट को छूट दे देता है.

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कोहरे में लोको पायलट को अपनी मर्जी से ट्रेन चलाने की होती है छूट.

loco pilots no follow rules. ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह खबर खास है.उन्‍हें पता होना चाहिए कि कब लोको पायलट अपनी मर्जी से भी ट्रेन चला सकता है. उस पर रेलवे के कोई नियम लागू नहीं होते हैं. इतना ही नहीं भारतीय रेलवे जानते हुए भी उस पर कोई एक्‍शन नहीं ले सकता है. सुनकर हैरानी जरूरी हो रही होगी, लेकिन यह सच है, रेलवे लोको पायलट को छूट दे देता है कि वे ट्रेन अपनी मर्जी से चला सकते हैं. आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा कब होता है?

लोकोपायलट को इस तरह की छूट कोहरे के दौरान दी जाती है. यानी आजकल उसे अपने हिसाब से ट्रेन चलाने की छूट दी जाती है. हालांकि ड्यूटी शुरू करने के साथ यानी ट्रेन में चढ़ने से पूर्व उसे एक रूट प्‍लान दिया जाता है, जिसमें ट्रेन चलाने के नियम लिखे होते हैं, जिसे मानना अनिवार्य होता है.

क्‍या हैं नियम

कोहरे के दौरान उसे स्‍पीड को लेकर नियमों का पालन करना अनिवार्य नहीं होता है. ट्रेनों की स्‍पीड उसके विवेक पर छोड़ दिया जाता है. वो तय करता है कि कहां पर तेज स्‍पीड से और कहां पर धीमी ट्रेन चलाई जा सकती है.यानी इस दौरान पूरी तरह से उसकी मर्जी चलती है.

क्‍यों चलाता है अपनी मर्जी

किसी सेक्‍शन में ट्रेन की स्‍पीड अधिकतम 60 किमी.प्रति घंटे निर्धारित है, लेकिन कोहरे की वजह से वहां पर तय स्‍पीड से ट्रेन चलाना खतरे से खाली नहीं है. क्‍योंकि किसी किसी स्‍थान पर अचानक घना कोहरा आ जाता है, जहां पर विजिबिलिटी बहुत कम हो जाती है. ऐसे में अगर तय स्‍पीड से ट्रेन चलाएगा तो हादसा होने की आशंका रहती है, इस वजह से लोकोपायलट को उसके विवेक पर स्‍पीड तय करने की छूट होती है. कहां पर धीमी चलानी है और कहां पर स्‍पीड से. क्‍योंकि यात्रियों की सुरक्षा रेलवे की प्राथमिकता है.

क्‍या है रेल मैन्‍युअल

रेल मैन्‍युअल में ट्रेनों के चलाने के नियम दर्ज हैं, मसलन लोकोपायलट कहां पर हार्न बजाएगा, कितनी दूरी पर पहले हार्न बजाएगा, कहां पर कितनी स्‍पीड में ट्रेन चलेगी और कहां पर धीमी होगी. उसे नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है. अगर नियमों का पालन नहीं कर पाता तो उसे ड्यूटी ऑफ करने से पहले जवाब देना होता है. इसी वजह से ट्रेनों की पंक्‍चुअलिटी मेंटेन की जाती है.

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ट्रेन में सफर करने वालों- जान लो,लोको पायलट अपनी मर्जी से कब चला सकता है रेल

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