कोलकाता10 मिनट पहलेलेखक: बबीता माली

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प. बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित सीएसआईआर (सेंट्रल ग्लास एंड सिरेमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट) के वैज्ञानिक देश का पहला बुलेट प्रूफ ग्लास सिरेमिक पैनल बना रहे हैं। इसे एके-47 राइफल की गोली भी नहीं भेद पाएगी। देश में इस तकनीक को विकसित करने वाले स्पेशियलिटी ग्लास डिवीजन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अतियार रहमान बताते हैं- हम 2-3 साल से इस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।

वे बताते हैं- ग्लास सिरेमिक पैनल ने चंडीगढ़ डीआरडीओ के टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी में 10 मीटर की दूरी से एके-47 के सिंगल शॉट गोली का टेस्ट पास कर लिया है। अभी हमें मल्टीपल गोलियों से टेस्ट करना है। हमने इसके पेटेंट के लिए भी आवेदन कर दिया है।

इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर विक्रमजीत बसु बताते हैं- इसका इस्तेमाल डिफेन्स से लेकर अंतरिक्ष अभियानों में किया जा सकेगा। खास बात यह है कि ग्लास सिरेमिक दुनिया में सिर्फ हम ही बनाते हैं। इसलिए दूसरे देशों को इसे निर्यात किया जा सकता है।

फायदे… कम ईंधन में गाड़ियों की गति बढ़ेगी

डॉ अतियार बताते हैं, विंडो ग्लास से हम ऐसा मैटेरियल बना रहे हैं, जिससे ग्लास में नैनो क्रिस्टल (10-15 एमएम) जनरेट हो रहा है। साधारण ग्लास की हार्डनेस 5 जीपीए होती है। इसकी 10 जीपीए होगी। इससे गाड़ियों का वजन नहीं बढ़ेगा, जिससे गति बढ़ेगी। ईंधन की खपत घटेगी। कीमत भी बराबर ही होगी।

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Last Updated:December 01, 2025, 01:48 IST

Eggs for Dandruff: अंडे स्कैल्प को गहरा मॉइश्चराइजेशन देते हैं. इसके नियमित इस्तेमाल से स्कैल्प की ड्राईनेस कम होती है और पोषण मिलता है, जिससे रूसी की समस्या धीरे-धीरे खत्म होती है.

रूसी की समस्या बहुत से लोगों को होती है और इससे छुटकारा पाने के लिए लोग कई तरह के शैम्पू और केमिकल वाले प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके रसोई घर में मौजूद अंडा भी इस समस्या को दूर कर सकता है?

अंडे में भरपूर प्रोटीन और पोषक तत्व होते हैं, जो बालों को मजबूत बनाने के साथ-साथ स्कैल्प यानी सिर की त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. यह न केवल बालों की जड़ों को पोषण देते हैं, बल्कि रूसी पैदा करने वाले कारणों को भी कम करते हैं.

डैंड्रफ की नेचुरल रेमिडी

अंडे की सफेदी बालों को हल्के से साफ करती है और अंडे की जर्दी में मौजूद नरम वसा और लेसिथिन स्कैल्प को गहरा मॉइश्चराइजेशन देते हैं. इसके नियमित इस्तेमाल से स्कैल्प की ड्राईनेस कम होती है और पोषण मिलता है, जिससे रूसी की समस्या धीरे-धीरे खत्म होती है.एक अध्ययन भी यह साबित करता है कि अंडे में मौजूद प्राकृतिक तेल स्कैल्प की सुरक्षा बढ़ाते हैं और उसमें छिपे सूक्ष्मजीवों से होने वाली जलन को कम करते हैं.

रूसी दूर करने के लिए अंडे का उपयोग कैसे करें –

अंडे और नींबू का हेयर मास्क बनाएं
रूसी की मुख्य वजह है मालसेजिया नामक यीस्ट का बढ़ना, जो ज्यादा तेल पर पनपता है. अंडे स्कैल्प के तेल का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं. सप्ताह में एक बार अंडे और नींबू का मास्क बनाकर स्कैल्प और बालों पर लगाना फायदेमंद होता है. यह बालों की सफाई के साथ खुजली कम करता है. यदि स्कैल्प बहुत सूखा हो तो अंडे की जर्दी में एक चम्मच ऑलिव ऑयल मिलाकर इस्तेमाल करें, इससे गहराई से नमी मिलेगी और रूसी कम होगी.

दूध और अंडे का मास्क

दूध और अंडे के मिश्रण से बना मास्क भी बहुत काम करता है. इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड मृत त्वचा को हटाता है और अंडे के प्रोटीन नए बालों को पोषित करते हैं. इसे बालों पर 20 मिनट तक लगा छोड़ें और ठंडे पानी से धो लें, ताकि अंडा बालों पर ना जमे.

इसे भी पढ़ें- मेथी के दानों से तैयार करें होममेड हेयर मास्क, बाल होंगे मजबूत, डेंड्रफ को खत्म करने में भी फायदेमंद
इस बात का ध्यान रखें

ध्यान रखें कि अंडे के मास्क को अधिक बार लगाने से बाल कठोर हो सकते हैं, इसलिए इसे सप्ताह में 1-2 बार ही इस्तेमाल करें. साथ में सॉल्पेट-फ्री शैम्पू से अच्छी तरह बाल धोना जरूरी है. अंडे की गंध से छुटकारा पाने के लिए बाल धोने के बाद थोड़ा सा सेब का सिरका या फिर चाय के पेड़ के तेल की कुछ बूंदें पानी में मिलाकर बालों पर डालें. यह प्राकृतिक तरीके से बालों की सफाई करता है और अवांछित गंध को भी दूर करता है.

केमिकल दवाओं से बेहतर क्यों हैं अंडे?

अधिकांश एंटी-डैंड्रफ शैम्पू में ऐसे रसायन होते हैं जो लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर स्कैल्प को सूखा और कड़क कर सकते हैं. इसके विपरीत अंडे स्कैल्प के नेचुरल संतुलन को बनाए रखते हैं और इसे अंदर से पोषण देते हैं. अंडे के नेचुरल तेल स्कैल्प की नमी और लचीलापन कायम रखते हैं. हालांकि अगर रूसी बहुत ज्यादा है तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, मगर घरेलू स्तर पर अंडा इस्तेमाल करना एक सुरक्षित और असरदार विकल्प है.

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शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

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क्या अंडों से निकल जाते हैं बाल से सारे डैंड्रफ? क्या है लगाने का सही तरीका

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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विमान नियामक डीजीसीए ने बताया कि भारत में A320 विमानों के सॉफ्टवेयर के अपडेट का काम पूरा हो गया है। भारत में इंडिगो, एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के पास ऐसे कुल 338 विमान चिह्नित किए गए थे। 323 इस्तेमाल किए जा रहे हैं, 6 का रखरखाव चल रहा है। एअर इंडिया के 9 विमानों में सॉफ्टवेयर अपडेट की जरूरत नहीं पड़ी।

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पूर्वोत्तर के रेलवे ब्रिज की सेफ्टी के लिए पानी में रोबोटिक गार्ड तैनात

पूर्वोत्तर भारत के रेल पुलों की सुरक्षा के लिए एनएफ रेलवे ने पहली बार अंडरवाटर रोबोटिक व्हीकल (आरओवी) तैनात किए हैं, जो नदी के तल तक जाकर पुलों की नींव, पायों और संरचना की गहराई से जांच कर रहे हैं। इसकी शुरुआत सराईघाट रेल-सह-सड़क पुल से हुई, जहां रोबोटों ने ब्रह्मपुत्र के नीचे हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग, 3डी मैपिंग और संरचनात्मक मजबूती का विश्लेषण किया।

ये आरओवी लाइडर से 3डी मॉडल, थर्मल इमेजिंग, जीपीआर से मिट्टी-चट्टान जांच और यूपीवी से कंक्रीट की मजबूती मापते हैं। अब तक 13 पुल सुरक्षित पाए गए और 2025-26 में 34 पुलों की जांच का लक्ष्य है।

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Last Updated:December 01, 2025, 00:16 IST

Beauty Tips: सर्द हवा त्वचा की नमी छीन लेती है. इससे चेहरा बेजान और खुरदुरा हो जाता है. ऐसे में एलोवेरा स्किन को गहराई तक हाइड्रेट कर उसमें प्राकृतिक चमक लौटाता है.

बिलासपुर. सर्दियों का मौसम शुरू होते ही त्वचा और बालों की कई समस्याएं उभरने लगती हैं. कभी रूखी और फटी त्वचा, तो कभी झड़ते और बेजान बाल. ऐसे में आज भी गांव से लेकर शहर तक एक देसी नुस्खा सबसे ज्यादा अपनाया जाता है और वह है एलोवेरा, जिसे यहां घृतकुमारी के नाम से जाना जाता है. छत्तीसगढ़ की मिट्टी में पनपने वाला यह पौधा सिर्फ औषधीय गुणों से भरपूर नहीं है बल्कि सर्दी के मौसम में ब्यूटी और स्किन केयर का पारंपरिक और असरदार विकल्प माना जाता है. रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, जगदलपुर और छोटे कस्बों में लोग फैंसी क्रीम और केमिकल वाले उत्पादों की बजाय अब भी एलोवेरा जेल का उपयोग त्वचा को नमी देने, झुर्रियां कम करने और बालों को मजबूत बनाने के लिए करते हैं. यह पौधा सौंदर्य का वह खजाना है, जो सदियों से छत्तीसगढ़ की घरेलू परंपरा और प्राकृतिक उपचार का हिस्सा रहा है.

सर्द हवाएं त्वचा की नमी छीन लेती हैं, जिससे चेहरा बेजान और खुरदुरा हो जाता है. ऐसे में एलोवेरा गहराई तक त्वचा को हाइड्रेट करके उसमें प्राकृतिक चमक लौटाता है.

दाग-धब्बे और पिंपल्स का देसी इलाज
ठंड में ऑयल बैलेंस बिगड़ने से पिंपल्स बढ़ जाते हैं. गांवों में लोग रात में एलोवेरा जेल लगाकर चेहरे के दाग हल्के करते हैं और स्किन को साफ रखते हैं.

सर्दियों की धूप से टैनिंग में राहत
हालांकि इन दिनों मौसम ठंडा होता है लेकिन धूप तेज होती है. खेतों में काम करने वाले लोग सनबर्न और जलन से राहत के लिए एलोवेरा सबसे सुरक्षित उपाय मानते हैं.

उम्र का असर कम करने में मददगार
सर्दियों में त्वचा का कसाव कम हो जाता है. एलोवेरा त्वचा को पोषण देकर झुर्रियां कम करता है और चेहरे की लचक बनाए रखता है.

बालों को मजबूत और घना बनाने का पारंपरिक नुस्खा
नारियल या सरसों के तेल में एलोवेरा मिलाकर लगाने से बाल मजबूत, मुलायम और ब्रेकेज फ्री होते हैं. यह छत्तीसगढ़ की पुरानी ब्यूटी टिप्स है.

डैंड्रफ और खुजली से छुटकारे का प्राकृतिक उपाय
सर्दियों में स्कैल्प ड्राई होने से डैंड्रफ बढ़ता है. एलोवेरा स्कैल्प में नमी और शीतलता पहुंचाकर खुजली और रूसी को नियंत्रित करता है.

बालों में नमी और प्राकृतिक चमक बनाए रखने का राज
एलोवेरा से धुले बाल सॉफ्ट, स्मूथ और चमकदार बनते हैं, इसलिए इसे सर्दियों की हेयर केयर रूटीन का जरूरी हिस्सा माना जाता है.

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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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ठंड में रूखी त्वचा और झड़ते बाल? एलोवेरा सबसे असरदार, ऐसे करें इस्तेमाल

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Last Updated:December 01, 2025, 00:06 IST

ओरी उर्फ ओरहान अवत्रामणि को 252 करोड़ ड्रग्स केस में एंटी-नारकोटिक्स सेल ने पूछताछ के लिए बुलाया, जहां उनका पहनावा चर्चा में रहा. पुलिस सुहैल शेख और ताहिर डोला के नेटवर्क की जांच कर रही है.

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ओरी ने पहनावे की चर्चा हो रही है. (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ओरी उर्फ ओरहान अवत्रामणि इन दिनों सुर्खियों में हैं. 252 करोड़ ड्रग्स केस में एंटी-नारकोटिक्स सेल (एएनएसी) ने उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया था, इस मौके पर उनका पहनावा चर्चा का विषय बना. अब इस पर ओरी ने बताया कि उनके कपड़े फैशन या ध्यान आकर्षित करने के लिए नहीं थे, बल्कि यह उनकी ईमानदारी और स्पष्टता को दिखाने का एक तरीका था.

ओरी ने आईएएनएस संग बातचीत में कहा, ‘मैंने अपने कपड़े का चुनाव बहुत सोच-समझकर किया था. मैंने मेरे गुरु द्वारा भेजा गया काला धागा भी पहन रखा था. पूछताछ के दौरान मेरा पहनावा मेरी ईमानदारी और सच्चाई को दर्शाता है.’ ओरी ने आगे कहा, ‘जब मैं ‘बिग बॉस’ में था, तब सलमान खान ने मुझे सलाह दी थी कि इतना फेम शायद दोबारा नहीं मिलेगा, इसलिए जब फेम कम हो जाए तो कभी भी अटेंशन पाने के लिए पागलपन मत करना. हमेशा गरिमापूर्ण बने रहो. मैंने इस बात की गांठ बांध ली और अब जब यह ड्रग्स से जुड़ी खबरें सामने आईं, तो फिर से थोड़ी प्रसिद्धि का अहसास हुआ. हालांकि, यह प्रसिद्धि गलत कारणों से आई थी, लेकिन मैंने इसका भी अनुभव लिया.’

नेटवर्क खंगालने में जुटी है पुलिस
26 नवंबर को ओरी ने एंटी-नारकोटिक्स सेल के घाटकोपर दफ्तर में अपना बयान दर्ज करवाया था. 252 करोड़ रुपए की ड्रग्स का मामला पिछले साल मार्च से शुरू हुआ. महाराष्ट्र के सांगली जिले में पुलिस ने मेफेड्रोन ड्रग्स बनाने की एक अवैध फैक्ट्री पकड़ी थी. इस कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में ड्रग्स बरामद हुई, जिसकी कीमत विदेशी बाजार में करीब 252 करोड़ रुपए थी. जांच में पता चला कि फैक्ट्री मालिक मुख्य आरोपी सुहैल शेख और ताहिर डोला हैं. दोनों भारत और विदेशों में रेव पार्टियां आयोजित करते थे. इन पार्टियों में यही मेफेड्रोन और दूसरे नशीले पदार्थ सप्लाई किए जाते थे. पुलिस अब इनके पूरे नेटवर्क को ढूंढने में जुटी है.

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Abhishek Nagar

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें

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252 करोड़ के ड्रग्स केस पर ओरी से पूछताछ, पहनावे पर हो रही चर्चा

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मनोरंजन जगत के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनका चेहरा दुनिया कम पहचानती है, लेकिन उनका काम दुनिया की सबसे गहरी यादों में दर्ज रहता है. डेविड प्राउज ऐसा ही नाम है. एक ऐसे ब्रिटिश अभिनेता जिन्होंने कई फिल्मों में काम किया लेकिन एक किरदार ने उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया. कहानी में ट्विस्ट ये था कि उनका हिट किरदार कभी पर्दे पर नजर ही नहीं आया.

न पर्दे पर दिखा और न ही उसकी आवाज सुनी गई, लेकिन उसकी मौजूदगी ने सिनेमा के सबसे आइकॉनिक खलनायक डार्थ वेडर को जीवंत बना दिया. 1 दिसंबर 2020 को उनका निधन हुआ, और उनके साथ फिल्म इतिहास का एक अनोखा अध्याय भी शांत हो गया.

डेविड प्राउज की कहानी है बेहद दिलचस्प

डेविड प्राउज की कहानी उतनी ही दिलचस्प है जितनी रहस्यमयी. उनका जन्म 1935 में इंग्लैंड में हुआ था, और बचपन से ही उनकी ऊंचाई, कद-काठी और शारीरिक शक्ति उन्हें भीड़ से अलग करती थी. उन्होंने बॉडीबिल्डिंग में नाम कमाया और “मिस्टर यूनिवर्स” जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया. यही कद-काठी उन्हें आगे फिल्मों तक पहुंचा पाई.

1977 में जब जॉर्ज लुकास स्टार वार्स बना रहे थे, उन्हें एक ऐसे कलाकार की जरूरत थी जो पर्दे पर लंबा, प्रभावशाली और डर पैदा करने वाला लगे और यही वह क्षण था जिसने डेविड प्राउज की किस्मत बदल दी.

उन्हें डार्थ वेडर का शरीर निभाने के लिए चुना गया. दिलचस्प बात यह है कि आवाज उनके पास नहीं थी; वह काम जेम्स अर्ल जोन्स को दिया गया. चेहरा भी नहीं दिखाया गया; नकाब के पीछे छिपा हुआ हर भाव सिर्फ शरीर की हलचल, चाल, मुद्रा और हथियार पकड़ने के अंदाज से ही प्रकट होना था.

डेविड प्राउज ने निभाया इतिहास के सबसे यादगार खलनायाक का रोल

लेकिन दिक्कतों के बावजूद, डेविड प्राउज ने एक ऐसा व्यक्तित्व बनाया जो स्क्रीन पर आते ही दर्शकों को आतंकित कर देता था. उनके चलने के अंदाज में सैनिकों जैसी कठोरता, उनके कंधों की चौड़ाई में ताकत और उनकी तलवार पकड़ने के तरीके में गजब का नियंत्रण झलकता था. वे स्क्रीन पर चेहरा न दिखाते हुए भी इतिहास के सबसे यादगार खलनायक बन गए.

डेविड प्राउज की कहानी को अनोखा बनाने वाला दूसरा पहलू है उनकी भावनात्मक दूरी. कई साल तक वे स्टार वार्स के निर्माण से अलग-थलग महसूस करते रहे. अक्सर कहा जाता है कि कुछ गलतफहमियां हुईं जिनसे वे मुख्य टीम से कट गए.

फिर भी फैंस के बीच वे हमेशा एक सम्मानित हस्ती रहे. लाखों लोग उनसे सिर्फ एक हस्ताक्षर या उनकी भारी-भरकम मौजूदगी के लिए मिलते थे. हॉलीवुड के अलावा उन्होंने कई ब्रिटिश और अमेरिकी टीवी सीरीज में अभिनय किया, लेकिन वेडर ने जो दिया वो उनकी मौत के बाद भी जुड़ा रहा.

उनकी मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर “आरआईपी, रियल वेडर” जैसे संदेशों ने यह दिखा दिया कि असली यादें उन किरदारों की भी होती हैं जो न दिखते हुए भी इतिहास बदल देते हैं. डेविड प्राउज ने बिना चेहरे दिखाए, बिना एक शब्द बोले, सिर्फ शरीर और चाल से एक ऐसा किरदार गढ़ा, एक ऐसी पहचान बना दी, जिसे दुनिया कभी नहीं भूल सकती.

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Last Updated:December 01, 2025, 00:01 IST

Bhawana Kanth Fighter Pilot: भावना कंठ ने असली इतिहास तो 16 मार्च 2018 को रचा, जब भावना ने मिग-21 ‘बाइसन’ की अपनी पहली सोलो फ्लाइट उड़ाई. उनकी मेहनत और हिम्मत को सलाम करते हुए 9 मार्च 2020 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया.

फाइटर पायलट भावना कंठ बिहार के दरभंगा की रहने वाली हैं.
नई दिल्ली. कहते हैं कि सपनों की उड़ान सिर्फ हिम्मत मांगती है, आसमान की कोई सीमा नहीं होती. बिहार के दरभंगा की बेटी भावना कंठ की कहानी इसी हिम्मत और सपनों की उड़ान की मिसाल है. भारतीय वायुसेना की पहली तीन महिला फाइटर पायलटों में शामिल भावना आज देश के आकाश की रक्षा करती हैं और दुनिया को बताती हैं कि बेटियां कहीं भी, किसी भी मुकाम तक पहुंच सकती हैं.

बचपन से ही आसमान में उड़ते एयरक्राफ्ट को देखकर उनके मन में उड़ान का शौक पैदा हुआ. परिवार का माहौल पढ़ाई और मेहनत को महत्व देने वाला था. पिता डॉक्टर और मां शिक्षिका – घर में हमेशा यही सीख मिली कि बेटियां किसी से कम नहीं. पढ़ाई में भी भावना बेहद होनहार थीं. दसवीं कक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाकर उन्होंने ‘मेधा पुरस्कार’ हासिल किया, जिसने उनके आत्मविश्वास को नई दिशा दी.

इंजीनियरिंग की राह में वे कोटा गईं और यहीं पहली बार NDA में जाने की इच्छा जताई. लेकिन उस समय लड़कियों के लिए NDA का रास्ता बंद था. इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के बीएमएस इंजीनियरिंग कॉलेज से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में बीटेक किया और फिर वायुसेना की परीक्षा में सफलता पाई.

2016 में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा महिलाओं के लिए फाइटर स्ट्रीम खोलने का ऐतिहासिक निर्णय आया. यही अवसर भावना के जीवन को नई दिशा देने वाला साबित हुआ. भावना कंठ, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह – तीन नाम दुनिया भर में भारत की नारी शक्ति का प्रतीक बन गए.

लेकिन सच्चा इतिहास 16 मार्च 2018 को लिखा गया, जब भावना ने अकेले मिग-21 ‘बाइसन’ उड़ाया. यह वही तेज रफ्तार लड़ाकू विमान है, जिसे उड़ाना भारतीय वायुसेना के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण माना जाता है. हजारों फीट ऊपर, तेज रफ्तार जेट में अकेली भारतीय महिला पायलट – यह दृश्य देश के लिए गौरव का क्षण था. यह सिर्फ भावना की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि उन लाखों बेटियों का आत्मविश्वास था, जो बड़े सपने देखने की हिम्मत रखती हैं.

भावना की उपलब्धियों को सम्मान देते हुए 2020 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें ‘नारी शक्ति पुरस्‍कार’ से सम्मानित किया. यह सम्मान साबित करता है कि मेहनत, संकल्प और साहस से कोई भी नया इतिहास लिख सकता है. भावना कंठ आज सिर्फ एक फाइटर पायलट नहीं, बल्कि प्रेरणा का दूसरा नाम हैं. उनकी उड़ान से हर बेटी सीखती है – ऊंची उड़ान वही भरते हैं जो डर से ऊपर उठते हैं.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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मिग-21 में बैठी भारतीय शेरनी; भावना ने बता दिया, बेटियां भी आसमान चीर सकती हैं

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Last Updated:December 01, 2025, 00:00 IST

Sansad Satra: संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू होने वाला है और इसके हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं. विपक्ष ने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष संशोधन पर चर्चा की मांग को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है. विपक्ष का साफ कहना है कि यदि SIR और चुनावी सुधारों पर बहस नहीं हुई तो वे सदन नहीं चलने देंगे. सरकार ने सहयोग की अपील की है.

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संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू होने वाला है.
नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र आज यानी सोमवार से शुरू हो रहा है. इस बार सत्र के बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं. विपक्ष ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) यानी मतदाता सूची के विशेष संशोधन को लेकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है. रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने साफ कर दिया कि अगर SIR पर चर्चा नहीं हुई तो वे संसद की कार्यवाही नहीं चलने देंगे. विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहा है. हालांकि सरकार ने सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए विपक्ष से सहयोग मांगा है. सरकार ने विपक्ष को भरोसा दिलाया है कि वे उनकी मांगों पर विचार करेंगे. लेकिन विपक्ष का तेवर बता रहा है कि वह आर-पार के मूड में है.

सरकार की तरफ से राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर चर्चा का प्रस्ताव रखा गया. विपक्ष ने इस पर सहमति तो दी, लेकिन साथ ही अपनी शर्त भी रख दी. विपक्ष का कहना है कि सरकार को एसआईआर पर भी चर्चा करनी होगी. विपक्ष चाहता है कि इसे चुनावी सुधारों (Electoral Reforms) पर एक व्यापक बहस के हिस्से के रूप में शामिल किया जाए. और यह चर्चा सोमवार दोपहर को ही होनी चाहिए. सूत्रों के मुताबिक सरकार ने विपक्ष से कहा है कि वे इस पर विचार करके जवाब देंगे.

23rd Law Commission Detailed Submission
सरकार 13 बिल लाने की तैयारी में है.

आखिर क्या चाहता है विपक्ष?

लोकसभा की बीएसी बैठक में भी विपक्ष ने एसआईआर का मुद्दा उठाया. विपक्ष चाहता है कि चुनावी सुधारों पर बहस के लिए समय तय किया जाए. वहीं सरकार का कहना है कि निचले सदन (लोकसभा) में सबसे पहले मणिपुर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (सेकंड अमेंडमेंट) बिल, 2025 पर चर्चा होगी. सरकार ने इसे संवैधानिक बाध्यता बताया है. इससे साफ है कि सरकार और विपक्ष के बीच एजेंडे को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है.

किन-किन मुद्दों पर चर्चा की मांग?

रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में 36 राजनीतिक दलों के 50 नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की. इसमें संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद थे. विपक्ष ने SIR के अलावा दिल्ली में हुए हालिया धमाकों, राष्ट्रीय सुरक्षा, वायु प्रदूषण और विदेश नीति पर भी चर्चा की मांग की.

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Last Updated:November 30, 2025, 23:42 IST

Virat Kohli first reactions: प्लेयर ऑफ द मैच चुने जाने के बाद विराट कोहली ने कहा कि उन्होंने मैच से एक दिन पहले छु्ट्टी ली थी. कोहली ने बताया कि वो कभी भी तैयारी में विश्वास नहीं रखते. उनकी तैयारी मानसिक रूप से होती है. उन्होंने कहा कि उनकी उम्र 37 साल है इसलिए उन्हें रिकवरी के लिए समय चाहिए.

विराट कोहली ने प्लेयर ऑफ द मैच बनने के बाद दी प्रतिक्रिया.
नई दिल्ली. विराट कोहली के 52वें शतक के दम पर भारत ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले मैच में 17 रन से जीत दर्ज की. रांची में 135 रन की पारी खेलने के बाद विराट ने राहत की सांस ली. उन्होंने स्वीकार किया कि जिस तरह की मैच में बल्लेबाजी हुई उसे देखना वास्तव में सुखद अहसास था.विराट को उनकी शानदार पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. विराट कोहली ने इस मुकाबले में 120 गेंदों पर 135 रन की पारी खेली जिसमें 11 चौके और सात छक्के शामिल थे. विराट ने कहा कि वह तैयारी में विश्वास नहीं रखते बल्कि उनका भरोसा मानसिक रूप से तैयार होने में है.

विराट कोहली (Virat Kohli) ने प्रेजेंटेशन में कहा, ‘ऐसा मैच देखना शानदार रहा. 20-25 ओवर तक तेज खेला. मैं खेल का लुत्फ उठाना चाहता था. जब आपको अच्छी शुरूआत मिल जाती है तो आपका अनुभव काम आता है जिससे आप पारी आगे बढ़ाते हो. मैं ज्यादा तैयारी करने पर भरोसा नहीं रखता. मेरा सारा क्रिकेट मानसिक स्थिति का रहा है. मैं शारीरिक रूप से कड़ी मेहनत करता हूं.’

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विराट कोहली ने प्लेयर ऑफ द मैच बनने के बाद दी प्रतिक्रिया.

भारत ने 8 विकेट पर 349 का स्कोर बनाया
विराट कोहली (135 रन) के बाद तेज गेंदबाज हर्षित राणा (तीन विकेट) और कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव (चार विकेट) के झटकों की बदौलत भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 17 रन से हराकर तीन मैच की सीरीज में 1-0 से बढ़त बना ली. कोहली ने 120 गेंद की तेज पारी के दौरान 11 चौके और सात छक्के जमाए जिससे भारत ने आठ विकेट पर 349 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया. क्रिकेट के एकमात्र इस प्रारूप में खेलने वाले कोहली ने फिर अपनी अहमियत और दबदबे को साबित किया. उन्होंने दूसरे विकेट के लिए रोहित शर्मा (51 गेंद में 57 रन) के साथ 136 रन की साझेदारी करके जेएससीए स्टेडियम की सपाट पिच पर भारत के बड़े स्कोर की नींव रखी. कार्यवाहक कप्तान केएल राहुल ने 56 गेंद में 60 रन की अर्धशतकीय पारी खेली और रविंद्र जडेजा ने 20 गेंद में 32 रन का योगदान दिया.

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‘मैं सिर्फ एक ही फॉर्मेट खेल रहा हूं’
बकौल विराट कोहली,’मैंने मैच से पहले एक दिन की छुट्टी ली थी. मैं 37 साल का हूं और मुझे रिकवरी के लिए समय चाहिए.मैं सिर्फ एक ही फॉर्मेट खेल रहा हूं. जब तक मेरी फिटनेस और मानसिक शार्पनेस है, तब तक आप जानते हैं कि सब ठीक है. जब तक बॉल अच्छी तरह से हिट हो रही है, आप अच्छी क्रिकेट खेल रहे हैं, कोई परेशानी नहीं है. अगर आपने 300 के आस-पास गेम और इतना क्रिकेट खेला है, तो आप जानते हैं कि जब आप प्रैक्टिस में बॉल मार रहे होते हैं, तो आपको पता होता है कि रिफ्लेक्स हैं और लंबे समय तक बैटिंग करने की फिजिकल एबिलिटी है.’ तीन मैचों की सीरीज का दूसरा वनडे तीन दिसंबर को रायपुर में खेला जाएगा.

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें

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विराट मानसिक तैयारी में रखते हैं विश्वास, मैच के बाद दी प्रतिक्रिया

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Last Updated:November 30, 2025, 23:36 IST

आईपीएस प्रवीण कुमार को राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. आईपीएस अधिकारी प्रवीण कुमार ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के डायरेक्टर जनरल का चार्ज संभाल लिया है. उन्होंने रविवार को बीएसएफ के डीजी की जिम्मेदारी संभाली है. आईटीबीपी के डीजी प्रवीण कुमार ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के डायरेक्टर जनरल का अतिरिक्त चार्ज संभाला. बीएसएफ दुनिया की सबसे बड़ी बॉर्डर गार्डिंग फोर्स है. दलजीत सिंह चौधरी अब तक बीएसएफ के डीजी थे, लेकिन वह आज रिटायर हो गए. ऐसे में इसकी जिम्मेदारी प्रवीण कुमार को दी गई है.

प्रवीण कुमार इंडियन पुलिस सर्विस वेस्ट बंगाल कैडर के 1993 बैच के ऑफिसर हैं. 32 वर्षों के अपने करियर में उन्होंने अपने कैडर पश्चिम बंगाल और इंटेलिजेंस ब्यूरो, दोनों में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यभार संभाले हैं. इससे पहले 30 सितंबर को ही आईपीएस अधिकारी प्रवीण कुमार ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के महानिदेशक का पदभार ग्रहण किया था.

प्रवीण कुमार को भारतीय पुलिस पदक (आईपीएम), राष्ट्रपति पुलिस पदक (पीपीएम), पुलिस (विशेष कर्तव्य) पदक, पुलिस आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक, और असाधारण सूचना कुशलता पदक से सम्मानित किया जा चुका है. दलजीत सिंह चौधरी चार वीरता पदक प्राप्त कर चुके हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बीएसएफ का नेतृत्व दलजीत सिंह चौधरी ने ही किया था. पहलगाम आतंकी हमले के बाद सीमा पार ऑपरेशन में उनकी भूमिका के लिए बीएसएफ कर्मियों को दो वीर चक्र और 16 वीरता पदक से सम्मानित किया गया.

बता दें कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) लगभग 2,70,000 कर्मियों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल है. वहीं आईटीबीपी, एक केंद्रीय पुलिस संगठन है. आईटीबीपी जवानों की तैनाती भारत-चीन सीमा पर होती है. आईटीबीपी और बीएसएफ दोनों के प्रमुख के रूप में प्रवीण कुमार अब दो प्रमुख सीमा सुरक्षा बलों की देखरेख करेंगे और हिमालयी (भारत-चीन) तथा पश्चिमी व उत्तरी (भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश) दोनों सीमाओं के प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके ऊपर है. दोनों विभागों की जिम्मेदारी उनके ऊपर तब तक रहेगी, जब तक स्थायी उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती या आगे के आदेश जारी नहीं हो जाते.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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