कमोडिटी बाजार में इस समय तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिसका असर सोना और चांदी से जुड़े निवेश विकल्पों पर भी साफ दिखाई दिया। गुरुवार को सोना और चांदी आधारित ईटीएफ में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
बता दें कि यह गिरावट अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया फैसले के बाद आई है, जिसमें ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए सख्त रुख अपनाया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार इस संकेत से बाजार में यह धारणा बनी कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना कम है, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा है।
गौरतलब है कि चांदी आधारित ईटीएफ में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। कोटक सिल्वर ईटीएफ और एडलवाइस सिल्वर ईटीएफ में करीब आठ प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं अन्य चांदी ईटीएफ में भी लगभग सात प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिली।
मौजूद जानकारी के अनुसार सोना आधारित ईटीएफ भी इससे अछूते नहीं रहे और इनमें चार से पांच प्रतिशत तक की गिरावट आई। कुल मिलाकर बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे निवेशकों का भरोसा कुछ कमजोर पड़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें अहम स्तर के नीचे आ गई हैं, जिससे इसकी मजबूती पर सवाल खड़े हुए हैं। वहीं चांदी में और ज्यादा तेज गिरावट देखने को मिली है, क्योंकि यह औद्योगिक मांग से भी जुड़ी होती है और ब्याज दरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील मानी जाती है।
गौरतलब है कि इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक तनाव ने बाजार को और अस्थिर बनाया है। इससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है और निवेशकों के लिए स्थिति और जटिल हो गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार घरेलू वायदा बाजार में भी चांदी और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कुछ समय बाद कीमतों में हल्की रिकवरी भी देखी गई है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है। उनका कहना है कि लंबे समय के नजरिए से सोना और चांदी अभी भी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं और महंगाई के खिलाफ बचाव का मजबूत विकल्प बने हुए हैं।
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