अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी को अमेरिका में चल रहे करीब दो साल पुराने आपराधिक मामले में बड़ी राहत मिली है। अमेरिका की एक अदालत ने उनके खिलाफ लगे क्रिमिनल चार्ज को ‘with prejudice’ खारिज कर दिया है। इसका मतलब है कि इन आरोपों पर दोबारा आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने आरोपों की सच्चाई या झूठ पर कोई फैसला नहीं सुनाया है।
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) की अपील को मंजूरी देते हुए गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अदाणी ग्रीन के पूर्व CEO विनीत जैन के खिलाफ मामले को खत्म कर दिया। इन पर सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड से जुड़े आरोप लगाए गए थे। अमेरिकी अभियोजकों ने नवंबर 2024 में आरोप लगाया था कि अदाणी और अन्य लोगों ने भारत में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए करीब 250 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने की साजिश की थी। हालांकि, अदाणी ग्रुप ने इन आरोपों को लगातार बेबुनियाद बताया था।
दो साल बाद खत्म हुआ आपराधिक मामला
मामला खत्म करने से पहले जज निकोलस गारॉफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग से आरोप वापस लेने की वजहों पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगा था। सरकार ने कहा कि केस को आगे बढ़ाना न्याय के हित में नहीं होगा। इसके पीछे कानूनी और सबूतों से जुड़ी चुनौतियों समेत कई कारण बताए गए। कोर्ट ने अंततः मामले को स्थायी रूप से खारिज कर दिया। इसका मतलब है कि इन तीन आपराधिक आरोपों को दोबारा उसी आधार पर नहीं लाया जा सकता।
कोर्ट ने नहीं दी क्लीन चिट
यह बात समझना जरूरी है कि ‘with prejudice’ का मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने गौतम अदाणी को आरोपों से पूरी तरह निर्दोष घोषित कर दिया है। यह मामला ट्रायल तक पहुंचा ही नहीं। इसलिए कोर्ट में न तो किसी गवाह की गवाही हुई और न ही आरोपों से जुड़े सबूतों की जांच हो सकी। अदाणी ग्रुप ने शुरुआत से ही आरोपों को खारिज किया और कानून के मुताबिक काम करने की बात कही।
गौतम अदाणी ने जताया कोर्ट पर भरोसा
फैसले के बाद गौतम अदाणी ने इसे विनम्रता के साथ स्वीकार करते हुए न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान जताया। उन्होंने कहा कि मुश्किल दौर में भी उनका भरोसा सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में बना रहा। हालांकि, अमेरिकी SEC से जुड़ा अलग सिविल मामला भी सामने आया था, जिसमें अदाणी ने आरोपों को स्वीकार किए बिना आदेश पर सहमति जताई थी और 60 लाख डॉलर का सिविल पेनल्टी भुगतान करना है। इस तरह आपराधिक मामला खत्म होने के बावजूद इससे जुड़े अलग कानूनी पहलू पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं।
इनपुट- PTI
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