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सवाल- मेरी उम्र 32 साल है। एक साल पहले मेरी बेस्ट फ्रेंड की शादी हुई। वो अपनी शादी में बहुत खुश है, लेकिन उसका हसबैंड कई बार मेरे साथ फ्लर्ट करता है। हालांकि मैं भी उसे हंसी-मजाक में ही लेने की कोशिश करती हूं, लेकिन मुझे बड़ा अजीब लगता है। क्या ये बिहेवियर नॉर्मल है? क्या एक शादीशुदा आदमी का अपनी वाइफ की फ्रेंड के साथ इस तरह फ्लर्ट करना सही है?
एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा
जवाब- मैं आपके सवाल से जुड़ी उलझन समझ सकती हूं। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं कि सामने वाला सिर्फ फ्रेंडली है या उसकी नीयत कुछ और है। खासकर तब, जब वह व्यक्ति आपकी करीबी दोस्त का पति हो।
तो चलिए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और उसके सॉल्यूशन पर बात करते हैं।
क्या ये फ्लर्ट अनहेल्दी है?
साइकोलॉजी के मुताबिक, हर फ्लर्टिंग का मकसद हमेशा गलत या बुरा नहीं होता। कुछ लोग स्वभाव से बहुत ज्यादा जिंदादिल, सोशल और ‘चार्मिंग’ होते हैं। वे माहौल को हल्का-फुल्का और खुशनुमा बनाए रखने के लिए हंसी-मजाक या हेल्दी फ्लर्टिंग करते हैं। इसे ‘सोशल फ्लर्टिंग’ भी कहते हैं।
यह सब इस पर निर्भर करता है कि कोई किस समय, किस माहौल में, किस तरीके और किन शब्दों के साथ से फ्लर्ट कर रहा है। हालांकि, कुछ मामलों में यह बिहेवियर इरादतन, बाउंड्रीज से बाहर और खराब भी हो सकता है।
आपको सबसे पहले उनका बिहेवियर पैटर्न नोटिस करना चाहिए। साथ ही सिचुएशन को बेहतर ढंग से समझने के लिए खुद से ये सवाल पूछने चाहिए-

खुद को देने हैं जवाब
ये सवाल आपको खुद से पूछने हैं और इनका जवाब खुद को ही देना है। अगर वह-
- वाइफ के सामने और पीठ पीछे एक जैसा व्यवहार करते हैं।
- बाकियों के साथ भी वैसे ही पेश आते हैं, जैसे आपके साथ।
- अकेले में उनका व्यवहार बदलता नहीं है।
- उनकी वाइफ को पता है और उन्हें प्रॉब्लम नहीं है।
तो ये अपने आप में कोई बड़ी समस्या नहीं है। यहां कोई दुराव-छिपाव नहीं है। फ्लर्ट हर बार समस्या नहीं होती। लेकिन यहां समझने वाली बात ये है कि अगर उनका फ्लर्ट करना आपको पसंद नहीं तो उन्हें आपकी बाउंड्री की रिस्पेक्ट करनी चाहिए। इसके लिए आप ये काम करें-
- साफ शब्दों में बताएं कि उनकी बातचीत का ये तरीका आपको पसंद नहीं है।
- बिना कनफ्यूजन के अपनी इच्छा को स्पष्ट शब्दों में कम्युनिकेट करें।
- ये बात अपनी सहेली को भी साफ-साफ बताएं।
लेकिन यहां कुछ जरूरी सवाल और भी हैं। जैसेकि–
- क्या फ्लर्टिंग हमेशा, हर स्थिति बुरी ही होती है?
- हम फ्लर्टिंग को जैसे देखते और रिसीव करते हैं, उसमें हमारी परवरिश का कितना योगदान होता है?
- एक समझदार वयस्क के रूप में हमें इसे कैसे समझने की कोशिश करनी चाहिए?
क्या फ्लर्टिंग हमेशा गलत?
फ्लर्टिंग को लेकर व्यक्ति और समाज के रूप में हमारा नजरिया अक्सर पूर्वाग्रह और असहजता से भरा होता है। इसके लिए परवरिश जिम्मेदार है। प्रकृति और जीव-जगत की बात करें तो वहां ऐसा कोई जीव नहीं, जो फ्लर्ट नहीं करता। हर जीव किसी-न-किसी रूप में आकर्षण व्यक्त करता है और कम्युनिकेट करता है। यानी सांस लेने और भोजन करने की तरह यह भी एक स्वाभाविक व्यवहार है।
आखिर फ्लर्टिंग क्या है?
यह दो लोगों के बीच आपसी सहमति से होने वाला एक हल्का-फुल्का और दोस्ताना संवाद है। यह किसी के प्रति अपना इंटरेस्ट या आकर्षण जताने का एक तरीका भी हो सकता है। अपने आप में फ्लर्टिंग गलत या बुरी नहीं है।
सबसे पहले जरूरी सहमति
सवाल यह नहीं है कि फ्लर्टिंग सही है या गलत। असली सवाल यह है कि उसमें सहमति है या नहीं। जो कुछ भी हो रहा है, क्या वह दोनों लोगों की इच्छा से हो रहा है? अगर सहमति नहीं है तो वही व्यवहार गलत और असहज लग सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए, फ्लर्टिंग क्या है-

फ्लर्टिंग क्या नहीं है?
साथ ही ये भी समझना उतना ही जरूरी है कि फ्लर्टिंग क्या नहीं है। इससे दोनों के बीच फर्क करना और अपनी बाउंड्रीज बनाना आसान होगा। ग्राफिक में देखिए, फ्लर्टिंग क्या नहीं है-

हमारे समाज में स्त्री-पुरुषों के बीच सहजता का अभाव है। सोशल कंडीशनिंग ऐसी है कि अरेंज मैरिज के अलावा किसी भी प्रकार के स्त्री-पुरुष संवाद को अक्सर संदेह की नजर से देखा जाता है। इसलिए किसी पुरुष और महिला का सामान्य बातचीत करना, तारीफ करना या हल्का-फुल्का मजाक करना भी लोगों को असामान्य लग सकता है।
कुल-मिलाकर फ्लर्टिंग एक स्वाभाविक मानवीय व्यवहार है, लेकिन उसकी स्वीकार्यता और नैतिकता का आधार केवल एक है- आपसी सहमति और सम्मान।
कैसे पहचानें कि फ्लर्टिंग का इरादा गलत?
अपने पूर्वाग्रह को चेक करने के बाद भी, अगर आपकी ‘गट फीलिंग’ बार-बार कह रही है कि कुछ गलत है, तो उसे नजरअंदाज न करें। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर और गलत इरादे से फ्लर्ट कर रहा है, तो उसके बिहेवियर में ये ‘रेड फ्लैग्स’ दिखाई देंगे-

रिश्तों में ‘बाउंड्री’ तय करना क्यों जरूरी?
रिश्ता चाहे कितना भी करीबी क्यों न हो, बाउंड्री हर रिश्ते में जरूरी है। फ्लर्टिंग में कुछ सही या गलत नहीं होता। सवाल सिर्फ इतना ही है कि इसके लिए सहमति यानी कंसेंट है या नहीं।
अगर आपका कंसेंट नहीं है तो बाउंड्री बनाएं। सामने वाले को नाराज करने के डर से या कूल दिखने के लिए फ्लर्ट को ‘स्पोर्टिंगली’ लेने की जरूरत नहीं है। अपनी असहजता को दबाने की बजाय अपनी सीमाओं को री-डिफाइन करें। ग्राफिक में देखिए, बाउंड्री कैसे बनाएं-

असहज होने पर क्या करें?
इस स्थिति में 3 प्रैक्टिकल स्टेप्स ले सकती हैं-
स्पष्ट और विनम्र रहें- अगली बार असहजता होने पर मुस्कुराकर टालने की बजाय फॉर्मल रहें। आप कह सकती हैं, “मुझे इस तरह का मजाक पसंद नहीं है, उम्मीद है आप इसका सम्मान करेंगे।”
सहेली से बातचीत- अगर बाउंड्री तय करने के बाद भी बिहेवियर न बदले, तो अपनी दोस्त से बात करें। बताएं कि, “मुझे कभी-कभी तुम्हारे हसबैंड के बात करने का तरीका असहज करता है।”
गिल्ट से बचें- ऐसी स्थितियों में महिलाएं अक्सर खुद को दोषी मानने लगती हैं। याद रखें, अपनी मानसिक शांति के लिए सीमाएं तय करना आपका हक है। इसके लिए गिल्ट महसूस न करें।

अंतिम बात
किसी भी स्वस्थ रिश्ते की बुनियाद आपसी सम्मान और पर्सनल बाउंड्रीज पर निर्भर होती है। असहजता होने पर अपनी भावनाओं को न दबाएं। ‘कूल’ दिखने के दबाव में न आएं। अपनी बाउंड्री बनाना मैच्योरिटी की निशानी है। यही हेल्दी तरीका है। खुद पर भरोसा रखें और अपनी सीमाओं का सम्मान खुद से शुरू करें।
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