Right Way to Bleach Your Face: चेहरे पर इंस्टेंट ग्लो पाने के लिए ब्लीच एक लोकप्रिय तरीका है. बाजार में कई तरह की ब्लीच उपलब्ध हैं, जिन्हें लोग अक्सर इस्तेमाल करते हैं. स्किन एक्सपर्ट डॉ. युगल राजपूत के अनुसार ब्लीच का इस्तेमाल ज्यादा नहीं करना चाहिए, वरना इससे एलर्जी, रेडनेस और ड्राइनेस जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कई महीनों तक लगातार यूज करने से एग्जॉजीनस ओक्रोनोसिस नामक परेशानी भी पैदा हो सकती है, जिसका इलाज करना भी मुश्किल होता है.
चेहरे पर ग्लो लाने के लिए कभी कभार ब्लीच का इस्तेमाल करना ठीक है.
यूपी के कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. युगल राजपूत ने News18 को बताया कि अधिकतर ब्लीच में हाइड्रोक्विनोन (HQ) केमिकल्स होते हैं, जो स्किन में मेलानिन ट्रांसफर को रोकते हैं. ब्लीच लगाने से स्किन पर इंस्टेंट ग्लो आ जाता है और पिगमेंटेशन कम हो जाता है. अक्सर लोगों को 2% या 4% हाइड्रोक्विनोन कंसंट्रेशन वाली ब्लीच इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. इससे स्किन को नुकसान नहीं होता है और चेहरे पर निखार आ जाता है. ब्लीच का उपयोग सही तरीके से किया जाए, तो इससे नुकसान नहीं है. हालांकि गलत तरीके से इसका यूज करने से स्किन की कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. ब्लीच का ओवर यूज स्किन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
कैसे करना चाहिए ब्लीच का इस्तेमाल?
डॉक्टर युगल ने बताया कि अगर आप ब्लीच लगाना चाहते हैं, तो शुरुआत में एक्सपर्ट की सलाह लेकर 2 महीने तक लगातार इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके बाद सप्ताह में 1 या 2 बार उपयोग करने की सलाह दी जाती है. आमतौर पर मेलाज्मा वाले पेशेंट्स को ब्लीच प्रिस्क्राइब की जाती है. कई लोग ग्लो पाने और स्किन टोन को हल्का करने के लिए भी ब्लीच का यूज करना चाहते हैं. ब्लीच यूज करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन लगातार 2 महीने से ज्यादा ब्लीच यूज नहीं करनी चाहिए. ब्लीच का ज्यादा इस्तेमाल करने से हाइड्रोक्विनोन केमिकल स्किन की अंदरूनी परतों में जमा होने लगता है. समय के साथ यह डार्क हो जाता है और स्किन काली नजर आने लगती है. इस कंडीशन को एग्जोजीनस ओक्रोनोसिस (Exogenous Ochronosis) कहा जाता है. इस परेशानी का इलाज करना मुश्किल होता है और महीनों के ट्रीटमेंट के बाद इससे कुछ राहत मिलती है.
स्किन टोन के अनुसार चुनें सही ब्लीच
डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार ब्लीच करने से कुछ लोगों को एलर्जी, स्किन ड्राइनेस और रेडनेस जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अक्सर फेयर स्किन वाले लोग ब्लीच को अच्छे से टॉलरेट कर लेते हैं. उन्हें एलर्जी और ड्राइनेस का खतरा कम होता है. जबकि डार्क स्किन वाले लोगों को ब्लीच से एलर्जी, ड्राइनेस समेत कई समस्याओं का रिस्क ज्यादा होता है. ऐसे में अगर आप ब्लीच का यूज करना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर से मिलकर कंसल्ट करें. गलत तरीके से ब्लीच करना स्किन के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है. कई लोगों को लगता है कि ब्लीच सस्ती है और जल्दी रिजल्ट मिल जाता है. इस चक्कर में वे इसे लगातार कई महीनों तक इस्तेमाल करते रहते हैं. ऐसा करना खतरनाक होता है और कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. लोगों को ब्लीच का यूज सही तरीके से करना चाहिए. अक्सर सैलून में हाई कंसंट्रेशन वाली ब्लीच का यूज किया जाता है. इससे चेहरे पर इंस्टेंट निखार तो आ जाता है, लेकिन स्किन प्रॉब्लम्स भी पैदा हो सकती हैं. लोगों को सही कंसंट्रेशन की ब्लीच यूज करनी चाहिए.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
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