सरसों के तेल में मिलावट से होने वाली बीमारी से एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत हो गई। ऐसे में जरूरी है कि आप जान लें सरसों के तेल की जांच कैसे करें, FSSAI ने जांच करने के कुछ तरीके बताए हैं।
सरसों के तेल कैसे बनता है?
मन में सवाल उठता है कि रोजाना खाने वाले तेल में आखिर कैसी मिलावट हो रही है, जो दिखाई नहीं देती। इसका जवाब है तेल बनाते समय खतरनाक बीज का साथ में मिल जाना। सरसों का तेल बनाने के लिए बीज को साफ किया जाता है, फिर तैयार करके उसे गर्म करते हैं और मशीन से अधिक दबाव डालकर बड़े पैमाने पर तेल निकाला जाता है। इसके बाद इसे छानते हैं, जिससे बीज के महीन कण भी निकल जाए।
आर्जेमोन ऑयल की मिली मिलावट
जिस सरसों के तेल को खाने से परिवार की मौत हुई, उसमें आर्जेमोन ऑयल की मिलावट पाई गई थी। जो कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के तहत जिंदगी के लिए बेहद खतरनाक है। सरसों के तेल में इस आर्जेमोन मिलने के कारण एपिडेमिक ड्रॉप्सी नाम की बीमारी हुई और उसी से लोगों की जान गई।
क्या है आर्जेमोन मेक्सिकाना
आर्जेमोन मेक्सिकाना एक गहरा हरा कांटेदार पत्तों वाला जंगली पौधा है, जिसे सत्यानाशी भी कहा जाता है। इसके फूल पीले रंग के होते हैं और बीज भी सरसों के बीज जैसे होते हैं लेकिन साइज में थोड़े बड़े होते हैं। जब इसका तेल सरसों तेल में मिलता है तो इसमें सैंग्विनारिन नाम का जहरीला तत्व होता है, जो खाने से खून की नसों से पहुंचकर शरीर के अलग अंगों पर असर डालता है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ निवेदिता शर्मा बताती हैं कि अगर 200 लीटर सरसों तेल में दो बूंद आर्जेमोन तेल भी मौजूद हो तो एपिडेमिक ड्रॉप्सी के लक्षण सेवन करने वाले के शरीर में नजर आने लगेंगे। ऐसे में दिल तक खून नहीं पहुंचता है, पैरों में सूजन, किडनी फेल हो जाती है और फिर मौत हो सकती है।
FSSAI ने बताया कैसे करें जांच
टेस्ट ट्यूब में 5 मिली लीटर सरसों के तेल लें और फिर 5 मिली लीटर नाइट्रिक एसिड लें। दोनों की मात्रा बराबर होनी चाहिए और फिर टेस्ट ट्यूब को हल्के हाथों से हिलाएं। अगर तेल का रंग नहीं बदलता है, तो आप सही और शुद्ध तेल खा रहे हैं। लेकिन अगर तेल का कलर लाल, हरा दिखने लगता है, तो यह मिलावटी है। ध्यान रखें कि नाइट्रिक एसिड का बिना किसी सुरक्षा के इस्तेमाल करना घातक हो सकता है। ऐसे में आप ये टेस्ट किसी लैब में करवा सकते हैं।
रंग और गंध से भी कर सकते हैं पहचान
असली सरसों के तेल का रंग हल्के पीले से गहरे पीले तक होता है, वहीं नकली तेल का रंग भूरा या लाल सा दिख सकता है। इसके अलावा आप तेल की गंध से भी पहचान कर सकते हैं। अगर तेल की महक तेज, तीखी आ रही है, तो वह सही है। अगर तेल में कोई गंध नहीं है या बेहद हल्की है, तो उसकी जांच करें।
घर पर बनाते हैं तेल तो ध्यान रखें
अगर आप घर पर पिरवाकर तेल बनवाते हैं, तो ध्यान रखें कि आर्जेमोन मेक्सिकाना के बीज न मिल जाए। सरसों के बीजों की अच्छे से सफाई करवाएं और किसी साफ-सुथरी चक्की पर ही उससे तेल पिरवाएं। बाजार से खरीदते हैं तो पैकेट पर लिखी जरूर डिटेल्स को पढ़ें और किसी अच्छे ब्रांड का तेल ही चुनें।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.