हर साल महाराष्ट्र में गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवधि में पूरा राज्य गणपति बप्पा की भक्ति में डूब जाता है। यदि आप भी इस साल गणेशोत्सव के दौरान महाराष्ट्र जाने की सोच रहे हैं, तो यहां के बड़े-बड़े पंडालों को देखने के अलावा अष्टविनायक के दर्शन जरुर करें।
दरअसल, अष्टविनायक का मतलब है कि भगवान श्री गणेश के आठ स्वयंभू रुप। आपको बता दें कि, ये सभी दिव्य मंदिर महाराष्ट्र के पुणे,रायगढ़ और अहमदनगर जिलो में स्थित हैं।
अष्टविनायक के 8 स्वयंभू गणेश मंदिर
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश के इन आठों पीठों की यात्रा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और बप्पा मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। अगर आप महाराष्ट्र जा रहे हैं, तो इन 8 मंदिरों के दर्शन जरुर करें।
मयूरेश्वर मंदिर (मोरगांव)
अगर आप अष्टविनायक दर्शन करना चाहते हैं, तो सबसे पहले पुणे जिले के मोरगांव में स्थित मयूरेश्वर मंदिर में जा सकते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस स्थान पर गणेश ने मयूर यानी मोर पर सवार होकर अवतार लिया था, तभी से मयूरेश्वर के नाम से यह मंदिर प्रसिद्ध है।
सिद्धविनायक मंदिर (सिद्धटेक)
इसके बाद आप अहमदनगर जिले में भीमा नदी के तट पर स्थित सिद्धटेक के सिद्धिविनायक मंदिर के दर्शन के लिए भी आप जा सकते हैं। यह अष्टविनायक मंदिरों में से एक ऐसा होता है, जहां बप्पा की सूंड दाईं तरफ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां पर भगवान विष्णु ने सिद्धि प्राप्त की थी।
बल्लेलेश्वर मंदिर (पाली)
यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है और यह रायगढ़ जिले के पाली में स्थित है। इसको ‘बल्लालेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह एकमात्र ऐसा धाम है, जहां नाम गणेश जी के परम भक्त ‘बल्लाल’ के नाम पर रखा है।
वरदविनायक मंदिर (महड)
वरदविनायक मंदिर रायगढ़ के महड में स्थित है। हर साल गणेशोत्सव के समय यहां पर लोग दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं।
चिंतामणि मंदिर (थेऊर)
अष्टवियानक मंदिरों में से एक है यह मंदिर, इसे लोग चिंतामणि मंदिर के नाम से जानते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां पर भगवान गणेश ने ऋषि कपिला की खोई हुई चिंतामणि वापस लौटाई थी। जो भक्तजन इस मंदिर का दर्शन करते हैं, उसे मानसिक तनाव और चिंताओं से मुक्ति मिल जाती है।
गिरिजात्मज मंदिर (लेन्याद्री)
यह मंदिर पुणे के लेन्याद्री में स्थित है, जो कि भगवान गणेश को समर्पित है। असल में यह मंदिर में एक बौद्ध गुफा के अंदर बना हुआ है। यहां पर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं का करीब 300 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।
विघ्नेश्वर मंदिर (ओझर)
ओझर में स्थित ‘विघ्नेश्वर मंदिर’ भी अष्टविनायक धामों में शामिल है। इस समय यहां पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। यह मंदिर विघ्रासुर नामक दैत्य का संहार करने वाले स्वरुप के लिए जाना जाता है।
महागणपति मंदिर (रांजणगांव)
अष्टविनायक मंदिरों में से एक है रांजणगाव का ‘महागणपति मंदिर’, यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध करने से पहले गणेश जी की पूजा-अर्चना की थी।
अष्टविनायको मंदिरों तक कैसे पहुंचें?
- यदि आप फ्लाइट से आना चाहती हैं, तो सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट के बाहर आपको किराए की कार या टैक्सी मिल जाएगी, यहां से आप अपनी अष्टविनायक यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं।
- ट्रेन से आने पर पुणे जंक्शन और शिवाजीनगर रेलवे स्टेशन सबसे पास है। यहां से भी आप मोरगांव, थेऊर, ओझर और लेन्याद्री के लिए सीधी बसें या टैक्सियां ले सकती हैं।
– वैसे गणेशोत्सव के समय कई प्राइवेट और सरकारी ट्रेवल्स एजेंसियां विशेष अष्टविनायक दर्शन बसें चलाती हैं। वहीं आप मुबंई या पुणे से 2 से 3 दिनों को रोड टूर पैकेज बुक करके इन आठों मंदिर का दर्शन कर सकती हैं।
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