एडीएचडी के कारण नींद की समस्या
दरअसल, एडीएचडी से पीड़ित लोगों में अनिद्रा और अन्य नींद संबंधी समस्याओं की संभावना ज्यादा रहती है। एक अध्ययन के मुताबिक सामान्य आबादी की तुलना में ADHA से पीड़ित लोगों में अनिद्रा का खतरा दोगुना से ज्यादा होता है।
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ADHD और नींद के बीच का संबंध जटिल है। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि इसके लक्षण आपकी नींद को प्रभावित कर सकते हैं। नींद की कमी आपके लक्षणों को प्रभावित कर सकती है। लेकिन कुछ मामले में ADHS नींद संबंधी समस्याओं की वजह बन सकता है।
ADHA आपके शरीर की जैविक घड़ी या सर्कैडियन रिदम को प्रभावित कर सकता है। जोकि नींद के पैटर्न को कंट्रोल करती है। इससे आपको जरूरत के समय सोने में परेशानी हो सकती है। वहीं ADHD से पीड़ित लोगों में अवसाद या चिंता जैसे मनोदशा संबंधी विकार होने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी अनिद्रा की वजह बन सकती है।
एडीएचडी से सबसे अधिक होने वाली नींद संबंधी समस्याएं
सुबह उठने में परेशानी
रात भर नींद टूटना
सुबह उठने पर तरोताजा न लगना
रात में सोने में 1 घंटे से ज्यादा समय लगना
प्रबंधन और सहायता के उपाय
सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए थेरेपी।
खेलने, पढ़ने और सोने का समय निश्चित करना चाहिए।
काम को छोटे-छोटे चरणों में बांटें।
स्कूल में बच्चे की एक्टिविटी पर नजर रखने के लिए टीचर्स के संपर्क में रहें।
वहीं लक्षण गंभीर होने पर पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट या बाल मनोवैज्ञानिक से संपर्क करना चाहिए।
ADHA और नींद का संबंध
हाइपरएक्टिविटी
ADHD वाले बच्चों का दिमाग सोने के समय भी काफी ज्यादा सक्रिय रहता है। वहीं सोने पर दिमाग को शांति मिलती है।
मेलाटोनिन की कमी
अक्सर एडीएचडी वाले बच्चों में नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन का उत्पाद देर से होता है। जिस कारण उनको देर रात तक नींद नहीं आती है।
दवाओं का असर
ADHD के लिए जो दवाएं जी जाती हैं, वह भी कभी-कभी नींद में बाधा डाल सकती हैं।
यहां जानिए बेहतर नींद के उपाय
ADHD से पीड़ित बच्चे का सोने का समय तय होना चाहिए।
वहीं सोने से करीब 1 घंटा पहले टीवी, फोन या टैबलेट बंद कर देना चाहिए।
कमरे का वातावरण शांत होना चाहिए और कमरे में पर्याप्त अंधेरा होना चाहिए।
पढ़ने या शांत संगीत सुनने से सोने के लिए तैयार करने में सहायता मिलती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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