कार सेफ्टी को लेकर देश में बड़ा बदलाव होने वाला है। यह बदलाव Bharat NCAP 2.0 के जरिए होगा। भारत NCAP 2.0 में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग हासिल करना भी पहले के मुकाबले कठिन होगा।
ग्लोबल NCAP से काफी सस्ता है भारत NCAP
भारत NCAP का एक बड़ा फायदा इसकी कम टेस्टिंग कॉस्ट भी है। नितिन गडकरी के मुताबिक, किसी कार को ग्लोबल NCAP के जरिए टेस्ट कराने में करीब 2.5 करोड़ रुपये प्रति मॉडल खर्च होते हैं। वहीं, भारत NCAP में यही टेस्टिंग करीब 16 लाख रुपये प्रति मॉडल में हो जाती है। इससे कंपनियों के लिए अपनी कारों की सेफ्टी को टेस्ट कराना काफी आसान और किफायती हो गया है।
5 लाख सड़क हादसे और 1.8 लाख मौतें
भारत में रोड सेफ्टी की गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार भारत NCAP 2.0 के जरिए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को और सख्त करना चाहती है। गडकरी ने बताया कि देश में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लगभग 1.8 लाख लोगों की मौत हो जाती है। ऐसे में नए नियमों का फोकस सिर्फ दुर्घटना के दौरान कार में बैठे लोगों की सेफ्टी तक सीमित नहीं रहेगा। भारत NCAP 2.0 में क्रैश अवॉइडेंस, ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन, पेडेस्ट्रियन्स की सेफ्टी और पोस्ट-क्रैश केयर जैसे अहम पहलुओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
100 अंकों के आधार पर मिलेगी सेफ्टी रेटिंग
भारत NCAP 2.0 में कारों की सेफ्टी 100 अंकों के आधार पर तय की जाएगी। इसमें Crash Protection को 55%, Vulnerable Road User Protection को 20%, Safe Driving को 10%, Accident Avoidance को 10% और Post-Crash Safety को 5% वेटेज दिया जाएगा। क्रैश प्रोटेक्शन सबसे ज्यादा अहम रहेगा और इसमें पांच अनिवार्य टेस्ट शामिल होंगे। वहीं, पेडेस्ट्रियन्स और टू-व्हीलर चलाने वालों की सुरक्षा पर भी पहले के मुकाबले ज्यादा जोर दिया जाएगा।
ESC और Curtain Airbags होंगे जरूरी
नए नियमों में ऐक्टिव सेफ्टी टेक्नोलॉजी को भी ज्यादा महत्व मिलेगा। Electronic Stability Control (ESC) और Curtain Airbags किसी कार के भारत NCAP रेटिंग के लिए जरूरी होंगे। इसके अलावा Autonomous Emergency Braking (AEB), Lane Departure Warning और दूसरे Driver Assistance Systems बेहतर स्कोर हासिल करने में मदद करेंगे। वहीं, जिन कारों में साइड-फेसिंग सीट्स होंगी, उन्हें भारत NCAP रेटिंग के लिए एलिजिबल नहीं माना जाएगा।
5-स्टार रेटिंग के लिए बढ़ेगी चुनौती
भारत NCAP 2.0 में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग हासिल करना भी पहले के मुकाबले कठिन होगा। 2027 से 2029 के बीच 5-स्टार रेटिंग के लिए कम से कम 70/100 अंक हासिल करने होंगे। इसके बाद 2029 से 2031 के बीच यह बढ़कर 80/100 पॉइंट हो जाएगी। इतना ही नहीं, अगर कोई कार पांचों सेफ्टी पिलर में से किसी एक में भी जीरो पॉइंट हासिल करती है, तो उसे 5-स्टार रेटिंग नहीं दी जाएगी। यानी नई व्यवस्था में सिर्फ क्रैश टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन करना काफी नहीं होगा, बल्कि कार को सुरक्षा के अलग-अलग पहलुओं में पर्फेक्ट परफॉर्म करना होगा। सरकार को उम्मीद है कि भारत NCAP 2.0 के सख्त नियमों और ऑटो इंडस्ट्री के सहयोग से भारत में बनने वाली कारों की सेफ्टी बेहतर होगी और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने में मदद मिलेगी।
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