जर्मन ऑटो दिग्गज फॉक्सवैगन में इस वक्त एक बड़ा अंदरूनी संकट गहराता नजर आ रहा है। खबर है कि कंपनी अपने घाटे को कम करने के लिए करीब 1 लाख कर्मचारियों की छंटनी की प्लानिंग कर रही है।
क्या है कंपनी की प्लानिंग
कंपनी जिस नए प्लान पर विचार कर रही है, वह 2024 में यूनियनों के साथ हुए समझौते से कहीं ज्यादा सख्त है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फॉक्सवैगन के हैनोवर, एमडेन, ज्विकाऊ और ऑडी के नेकारसुल्म जैसे चार बड़े जर्मन प्लांट पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। छंटनी का यह आंकड़ा पहले तय की गई संख्या से करीब दोगुना हो सकता है। फॉक्सवैगन के जर्मन कार कारखानों की उत्पादन क्षमता 2026 तक लगभग 81 पर्सेंट रहने का अनुमान है। यह इस दशक के अंत तक गिरकर 73 पर्सेंट पर आ सकती है। उदाहरण के लिए, ज्विकाऊ प्लांट की क्षमता 2030 तक घटकर महज 42 पर्सेंट रह जाएगी।
फैसलों को लागू करना आसान नहीं
कंपनी के लिए इन कटौती वाले फैसलों को लागू करना इतना आसान नहीं होगा। फॉक्सवैगन का मालिकाना हक और मैनेजमेंट स्ट्रक्चर बहुत अलग तरह का है। कंपनी के 20 सीटों वाले सुपरवाइजरी बोर्ड में लेबर यूनियनों और लोअर सेक्सनी राज्य के पास कुल 12 सीटें हैं। ये मिलकर मैनेजमेंट के किसी भी कठोर प्लान को आसानी से रोक सकते हैं। अगर 4 सितंबर की मीटिंग में इस रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को खारिज कर दिया जाता है, तो मैनेजमेंट अक्टूबर में शेयरहोल्डर्स की एक खास बैठक बुला सकता है। वहां पॉर्श फैमिली और कतर जैसे मुख्य शेयरहोल्डर्स के दम पर मैनेजमेंट फैसले को आगे बढ़ाना चाहेगा।
क्या है मैनेजमेंट का तर्क?
यूनियन और कर्मचारी प्रतिनिधि भी मानते हैं कि फॉक्सवैगन इस वक्त ग्लोबल मार्केट में पिछड़ रही है। लेकिन वे किसी भी कीमत पर प्लांट बंद करने और बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के सख्त खिलाफ हैं। यूनियनों का कहना है कि समस्या को सुलझाने के लिए कोई दूसरा रास्ता निकाला जाना चाहिए। दूसरी ओर, मैनेजमेंट का तर्क है कि कंपनी के पास भविष्य में बनने वाली गाड़ियों की तुलना में बहुत ज्यादा उत्पादन क्षमता बची हुई है, जिसे कम करना बेहद जरूरी है।
क्या होगी आगे की राह?
अगर आप एक ग्राहक के तौर पर फॉक्सवैगन की गाड़ियां इस्तेमाल करते हैं, तो फिलहाल आपके लिए चिंता की कोई बात नहीं है। कारों की वारंटी, सर्विस या डिलीवरी पर इसका तुरंत कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। यह पूरी लड़ाई इस बात की है कि फॉक्सवैगन आने वाले दिनों में अपनी गाड़ियों का निर्माण कैसे करेगी और अपनी लागत को कैसे कंट्रोल करेगी। न्यूज वेबसाइट cartoq में छपी खबर के अनुसार, 4 सितंबर का वोट यह तय करेगा कि क्या फॉक्सवैगन इस बड़े संकट का हल बातचीत से निकाल पाती है या फिर कंपनी में एक नया विवाद खड़ा होता है।
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