तेलंगाना के उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने शुक्रवार को बताया कि पिछले साल दिसंबर में आयोजित ‘तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट’ में निवेशकों के साथ किए गए 75 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) में से 17 परियोजनाओं ने परिचालन शुरू कर दिया है। मंत्री ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि बाकी परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और डेटा सेंटर समेत विभिन्न क्षेत्रों के निवेशकों के साथ 108 एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
श्रीधर बाबू ने कहा कि राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ‘तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट’, बायोएशिया और इन क्षेत्र से जुड़े विशेष सम्मेलनों जैसी पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को सुगम और परेशानी मुक्त अनुभव उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने समर्पित ‘इन्वेस्टर फैसिलिटेशन सिस्टम’ स्थापित किया है, जिसमें नामित नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं। राज्य के उद्योग मंत्री ने स्वीकार किया कि निवेशकों के साथ किए गए सभी एमओयू का जमीन पर उतरना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार इन समझौतों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भारत राष्ट समिति (बीआरएस) सरकार ने हैदराबाद के बाहरी इलाके में प्रस्तावित फार्मा सिटी में अधिक प्रदूषण क्षमता वाली ‘रेड कैटेगरी’ की औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार वहां ‘ग्रीन फार्मा’ उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
श्रीधर बाबू ने कहा कि सरकार तेलंगाना में सूक्ष्म, लघु एवं मझाले उद्यमों (एमएसएमई) के विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इस क्षेत्र को समर्थन देने के लिए कई प्रोत्साहन उपलब्ध करा रही है।
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