55% बढ़ा दाम (War Impact on Petrol-Diesel)
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद डीजल का रेट अमेरिका 55 प्रतिशत बढ़ा है। इस बढ़ोतरी के पीछे की वजह मिडिल ईस्ट में रिफाइनरियों को अपने पूरी क्षमता से काम नहीं करना है। चीन ने भी अपनी जरूरत को देखते हुए एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी है। जिसकी वजह से भी कीमतों में तेजी देखने को मिली है।
अब आगे क्या होगा?
डीजल की कीमतों का सीधा असर अमेरिकी नागरिकों पर कम पड़ता है। लेकिन आने वाले समय में बढ़ी हुई कीमतों की वजह से देश में महंगाई भी बढ़ने की उम्मीदों को बल मिला है। अमेरिकी फेड रिजर्व की 15 और 16 सितंबर को मीटिंग होने जा रही है। इस मीटिंग में ब्याज दरों पर फैसला होगा। मार्केट का सेंटीमेंट है कि इस बार फेड रिजर्व ब्याज में इजाफा जरूर करेगा। अगर ऐसा हुआ तो शेयर बाजार को झटका लगेगा। निवेशक डॉलर की तरफ कदम बढ़ाएंगे।
क्या भारत में भी बढ़ेगा पेट्रोल और डीजल का दाम
मई के बाद से घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं। हालांकि, भविष्य में होने वाली बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता है। हाल ही में इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि पेट्रोल पर इस समय तेल कंपनियों को 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर तक नुकसान हो रहा है। बता दें, मई के महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक के एक चार बार इजाफा किया गया था। जिसकी वजह से घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल का रेट 7.5 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया था।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.