जुलाई 2026, भारत के रक्षा सचिव ने साफ कहा था कि सुखोई-57 खरीदने की कोई योजना नहीं है। बमुश्किल दो महीने बाद, रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे पर सुखोई-57 पर डील की चर्चा जोरों पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान को दिसंबर 2026 तक पांचवीं पीढ़ी का
भारत घूम-फिरकर पांचवीं पीढ़ी के इसी Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने पर वापस क्यों आ गया, पूरी कहानी आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: कभी हां-कभी न… सुखोई-57 को लेकर भारत का रुख कैसे बदलता रहा है?
जवाबः भारत ने 1990 के दशक से रूस के करीब 400 सुखोई-30 और सुखोई-30MKI विमान खरीदे हैं। इनमें से करीब आधे विमान रूस के साथ मिलकर भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, HAL के प्लांट में बने हैं…
- 2007 में दोनों देशों के बीच ‘फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट’, यानी FGFA समझौता हुआ। इसके तहत रूसी कंपनी सुखोई और HAL को मिलकर 5th जनरेशन का फाइटर जेट बनाना था।
- 2010 में भारत शुरुआती डिजाइन के लिए करीब 1,897 करोड़ रुपए देने को राजी हुआ। फिर भारत ने जेट में अपनी जरूरतों के मुताबिक, स्टील्थ टेक्नोलॉजी, यानी दुश्मन के रडार की नजर से बचने की क्षमता और रडार वगैरह से जुड़े 40 से ज्यादा बदलावों की मांग की। लंबी बातचीत के बावजूद प्रोजेक्ट अटका रहा।
- फरवरी 2018 में भारत ने प्रोजेक्ट छोड़ने का फैसला किया। भारतीय एयरफोर्स को इसकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी पर भरोसा नहीं था। भारत जिस तरह का टू-सीटर, एडवांस्ड रडार और सेंसर वाला सुखोई-57 चाहता था, वो रूस के मूल फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट PAK-FA से कहीं अलग और महंगा था। लागत में हिस्सेदारी और टेक्नोलॉजी शेयरिंग वगैरह को लेकर भी मतभेद थे।
- हालांकि रूस ने सुखोई-57 का प्रोडक्शन जारी रखा और 2020 में इसे अपनी सेना में भी शामिल किया।
- फरवरी 2025 में बेंगलुरु में एयर शो के दौरान रूस ने सुखोई-57E की उड़ान दिखाई और भारत को एक ‘गोल्डन ऑफर’ दिया कि भारत को तैयार विमानों की सप्लाई मिलेगी, भारत में भी सुखोई बनेंगे और रूस भारत के ‘एडवांस्ड मीडिया कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम’, यानी AMCA के तहत स्वदेशी 5th जनरेशन एयरक्राफ्ट बनाने में भी मदद करेगा।
- सितंबर 2025 में चर्चा हुई कि दो स्क्वाड्रन, यानी करीब 40 सुखोई-57 रूस से ‘फ्लाई-एवे’ कंडीशन में आएंगे और 3 से 5 स्क्वाड्रन HAL और सुखोई मिलकर नासिक प्लांट में बनाएंगे।
- भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपॉव के मुताबिक, ‘मई 2025 में रूस ने ये भी ऑफर दे दिया कि रूस 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करेगा और सुखोई का दो सीटों वाले वर्जन- ‘सुखोई-57E’ का भारत में ही प्रोडक्शन होगा। इसका रूसी वर्जन ‘सुखोई-57D’ मई 2026 में अपनी पहली टेस्ट फ्लाइट कर चुका है।
- 4-5 दिसंबर 2025 को पुतिन के भारत आने से पहले उनके प्रेस सेक्रेटरी दमित्री पेस्कोव ने कहा कि सुखोई-57 और S-400/500 एयर डिफेंस सिस्टम का सौदा पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात का मुख्य एजेंडा है। हालांकि सुखोई-57 पर बिना किसी फैसले के ही पुतिन वापस चले गए।
- मार्च 2026 में भारत के डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि फाइटर जेट्स को लेकर रूस, अमेरिका और फ्रांस के ऑफर्स पर विचार किया जा रहा है। हालांकि जुलाई 2026 में राजेश ने कहा, ‘भारत की सुखोई-57 खरीदने की कोई योजना नहीं है। हमारा फोकस सुखोई-MKI को अपग्रेड करने पर है।’
अब दोबारा पुतिन की यात्रा के दौरान चर्चा है कि भारत 75 सुखोई-57E जेट्स खरीद सकता है।
11 सितंबर को पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मिले। पुतिन BRICS समिट के लिए भारत आए हैं।
सवाल-2: भारत की तलाश वापस सुखोई-57 पर क्यों टिक गई है?
जवाबः 4 वजहों से भारत को सुखोई-57E जैसे एडवांस्ड फाइटर जेट्स की जरूरत है…
1. फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत के मुकाबले आधे रह गए
- भारतीय वायु सेना के पास लड़ाकू जेट्स के 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए। एक स्क्वाड्रन में करीब 20 लड़ाकू विमान होते हैं।
- सरकार स्क्वाड्रन क्षमता को 50 से 60 तक बढ़ाना चाहती है, जबकि अभी एयरफोर्स के पास सिर्फ 29 स्क्वाड्रन हैं।
- इनमें से 6 स्क्वाड्रन में पुराने ‘SEPECAT जगुआर’ फाइटर जेट्स हैं, जो रिटायर होने वाले हैं। मिग-21 और मिग-27 जैसे जेट्स रिटायर हो चुके हैं।
- वहीं 260 Su-30MKI जेट्स को नए रडार, सेंसर लगाकर अपग्रेड किया जाना है। हालांकि इस बेड़े में कोई नया विमान शामिल नहीं होगा। ऐसे में भारत को एडवांस्ड फाइटर जेट्स की जरूरत है।
2. पाकिस्तान-चीन के पास 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट
- चीन के पास 2017 से ही 5th जनरेशन का J-20 स्टील्थ फाइटर जेट है। सितंबर 2025 में चीन ने अपना दूसरा स्टील्थ फाइटर जेट J-35 भी सेना में शामिल किया है। इसके पहले सिर्फ अमेरिका के पास दो तरह के 5th जनरेशन जेट- F-22 और F-35 हैं।
- चीन, पाकिस्तान को भी J-35 जेट्स देने जा रहा है। जबकि भारतीय एयरफोर्स के पास अभी तक सबसे एडवांस्ड जेट्स फ्रांस से मिले 4.5 जनरेशन के राफेल हैं।
3. भारत का स्वदेशी 5th जनरेशन प्रोग्राम AMCA लेट-लतीफ
- AMCA प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय ने 2025 में औपचारिक मंजूरी दी थी। इसके तहत बनाए जा रहे 5th जनरेशन जेट्स की पहली टेस्ट फ्लाइट 2028 में हो सकती है। इसके 5 प्रोटोटाइप 2031 तक तैयार हो पाएंगे।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, 7 स्क्वाड्रन, यानी करीब 140-150 विमान बनने में 2035 तक का समय लग जाएगा।
- तेजस MK1A जैसे विमानों की डिलीवरी में भी देर हो रही है, क्योंकि इनमें लगने वाले अमेरिकी कंपनी जनरल मोटर्स, GE के F404 इंजन की सप्लाई में दिक्कत है।
4. भारत के पास दूसरा बेहतर ऑप्शन नहीं
- अमेरिका F-35 को भारत में बनाने के बजाय तैयार जेट्स देने को ही राजी है। वो इसकी टेक्नोलॉजी भी ट्रांसफर नहीं करना चाहता। बिना टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सोर्स कोड के इनमें अपने हथियार नहीं लगाए जा सकते। ये कोड एक तरह से विमान का डिजिटल ब्लूप्रिंट या दिमाग होता है।
- F-35 के एक्सपोर्ट वर्जन पर भरोसा भी नहीं किया जा सकता। जबकि F-35, सुखोई से करीब ढाई गुने महंगे हैं।
- फ्रांस से कुछ और राफेल खरीदने की बात चल रही है, लेकिन उसने भी भारत को राफेल के सोर्स कोड देने से इनकार कर दिया है।
- वहीं चीन पहले ही J-10 जैसे विमान पाकिस्तान को दे चुका है और J-35 देने की तैयारी है। इसलिए चीन के J-35 या J-20 भारत के लिए ऑप्शन ही नहीं हैं, क्योंकि चीन-पाकिस्तान दोनों ही भारत के सामरिक प्रतिद्वंद्वी हैं।

सवाल-3: इस डील से रूस को क्या फायदा होगा?
जवाबः अगर भारत रूस से सुखोई-57 खरीदता है, तो रूस को कई फायदे हैं…
- यूक्रेन जंग, अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के बैन के चलते रूस के हथियारों का एक्सपोर्ट 2020-24 के दौरान 64% तक घटा है। भारत शुरुआती दौर में करीब 1 लाख करोड़ रुपए में 75 सुखोई-57 खरीदेगा। इस डील से रूस की इकॉनमी को राहत मिलेगी।
- सुखोई-57 को सेना में शामिल करने के बावजूद 5 साल में रूस सिर्फ एक खरीदार अल्जीरिया से 14 जेट्स की डील कर पाया है। भारत से डील हुई, तो सुखोई-57 की ‘कॉम्बैट रेडीनेस’, यानी जंग लड़ने की क्षमता पर शक भी दूर हो जाएगा और रूस को साउथ ईस्ट एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट से कई खरीदार मिल सकते हैं।
- 2000 के दशक में भारत के सुखोई-30MKI ने अच्छी परफॉरमेंस दी, तो मलेशिया ने भी इसी मॉडल पर रूस से अपने लिए सुखोई-30MKM बनवाए। यही फायदा सुखोई-57 के मामले में भी हो सकता है।
- भारत में सुखोई-57 बने, तो तीसरे देशों को इसके एक्सपोर्ट का रास्ता खुल जाएगा। ठीक उसी तरह जैसे- भारत-रूस की साझा ब्रह्मोस मिसाइल फिलीपींस ने खरीदी हैं।
- जॉइंट प्रोडक्शन से रूस कम लागत में अपनी जरूरत के सुखोई-57 भी बना सकेगा और डिलीवरी भी जल्दी हो पाएगी।
सवाल-4: क्या इस डील से ट्रम्प नाराज हो सकते हैं, कैसे निपटेगा भारत?
जवाबः अगस्त 2025 में ट्रम्प ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया था। इसमें 25% टैरिफ के पीछे वजह थी- भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद। अमेरिका ये भी चाहता है कि भारत रूस के बजाय उससे तेल और हथियार खरीदे।
फरवरी 2025 में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रम्प ने भारत को ‘F-35 लाइटनिंग-II’ फाइटर जेट बेचने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि भारत ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।
अमेरिका अपने CAATSA नाम के कानून के तहत रूस से हथियार खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाता है। अब अगर रूस से सुखोई-57 की डील हुई, तो अमेरिका बैन लगाने की धमकी दे सकता है।
भारत और अमेरिका के बीच MQ-9B ड्रोन और अपाचे हेलिकॉप्टर की डील और भारत के तेजस फाइटर जेट के लिए जनरल मोटर्स के इंजन की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है।
अमेरिकी संसद में रूस से हथियार लेने वाले देशों पर टैरिफ लगाने का कानून भी पारित हुआ है। भारत पर फिलहाल 18% टैरिफ लागू है और दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत जारी है। इस पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि जब भारत ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा, तो अमेरिका ने भारत पर सख्त बैन लगाने की धमकी दी थी, भारत ने इसके बावजूद ये सिस्टम खरीदा। 1990 के दशक में न्यूक्लियर टेस्ट के बाद भी अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाया। तब भी भारत ने रूस से हथियारों की खरीद जारी रखी थी।
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में ट्रेड रिलेशंस के एक्सपर्ट कैसर शमीम कहते हैं कि भारत अपनी सुरक्षा के मामले में किसी दूसरे देश पर निर्भर होकर फैसले नहीं लेता। भारत हमेशा से अपनी ‘सामरिक स्वायत्तता’, यानी स्ट्रैटेजिक ऑटोनोमी को अपनी विदेश नीति की सेंट्रल पॉलिसी मानता है।
सवाल-5: जंग में घिरा रूस क्या समय पर सुखोई-57 की डिलीवरी कर पाएगा?
जवाबः सुखोई-57 डिफेंस सिक्योरिटी एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, रूस भारत को 36 से 60 पूरी तरह तैयार सुखोई-57 जेट की तत्काल डिलीवरी करने को तैयार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत भी शुरुआत में कुछ ‘रेडी-टू-फ्लाई’ विमान लेना चाहता है।
हालांकि रूस ये कर पाएगा, ये कहना थोड़ा मुश्किल है…
- यूक्रेन से जंग के चलते रूस का हथियारों का प्रोडक्शन धीमा हुआ है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस को इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजन पार्ट्स वगैरह नहीं मिल पा रहे। शिपिंग रूट्स और ट्रांसपोर्ट की दिक्कतें हैं।
- रूस को 2028 तक अपनी सेना के लिए 76 सुखोई-57 जेट्स बनाने हैं, इनमें से अब तक सिर्फ 32 जेट्स ही बन पाए हैं। भारत से डील हुई, तो रूस को सुखोई-57 बनाने वाले अपने प्लांट्स में प्रोडक्शन स्लॉट और टेक्नोलॉजी स्टाफ बांटना पड़ेगा। इससे उसकी सेना को सप्लाई कम हो जाएगी।
- 2018 में भारत ने रूस से 40 हजार करोड़ रुपए कीमत वाली पांच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील की, 2023 तक इनमें से सिर्फ 2 यूनिट्स भारत को मिल पाई हैं।
- रूस से अकुला क्लास पनडुब्बी की 25 हजार करोड़ की डील, 62 हजार करोड़ रुपए की लागत से 85 सुखोई-30 MKI विमान का अपग्रेडेशन और करीब 30 हजार करोड़ रुपए के 464 भीष्म टैंकों का प्रोडक्शन होना है। भारत से ये सभी डील और इनके तहत हथियारों की डिलीवरी अभी पूरी नहीं हो पाई है।
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