कौन पहले कहता है ‘आई लव यू’?
अक्सर फिल्मों और उपन्यासों में दिखाया जाता है कि लड़कियां ज्यादा भावुक होती हैं और वे ही प्यार का इजहार पहले करती हैं. लेकिन ‘जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी’ (Journal of Personality and Social Psychology) में प्रकाशित एक प्रसिद्ध स्टडी कुछ और ही कहती है. शोध के अनुसार, पुरुषों को महिलाओं की तुलना में बहुत जल्दी प्यार का अहसास होता है और वही अक्सर ‘आई लव यू’ पहले बोलते हैं.
प्यार में कोई कम या ज्यादा सीरियस नहीं होता, बस उसे व्यक्त करने का तरीका अलग हो सकता है.
मनोवैज्ञानिक इसे ‘इवोल्यूशनरी अडेप्टिवनेस’ (Evolutionary Adaptiveness) से जोड़कर देखते हैं. पुरुष अक्सर अपनी भावनाओं को लेकर ज्यादा आक्रामक या ‘फॉरवर्ड’ होते हैं, जबकि महिलाएं किसी भी रिश्ते में सुरक्षा और स्थिरता को पहले परखती हैं.
लड़के और लड़कियों के लिए हैं इसके अलग-अलग मायने?
1. लड़कों के लिए कमिटमेंट और सुरक्षा का वादा-
2. लड़कियों के लिए इमोशनल बॉन्डिंग और भरोसा-
अगर ऊपर दिए गए संकेत आपको अपने रिश्ते में दिखते हैं, तो आप वाकई बहुत खुशनसीब हैं. रिश्तों में संवाद (Communication) जरूरी है, लेकिन इन ‘खामोश’ संकेतों को पढ़ना आपको एक-दूसरे के और करीब ले आता है.
महिलाओं के लिए ‘आई लव यू’ शब्द एक बहुत बड़े ‘फिल्टर’ की तरह काम करते हैं. लड़कियां इन शब्दों का इस्तेमाल तब करती हैं जब उन्हें सामने वाले पर पूरी तरह भरोसा हो जाता है. उनके लिए इसका मतलब होता है, “मैं तुम्हारे साथ मानसिक और भावनात्मक रूप से जुड़ चुकी हूँ.” लड़कियां प्यार में ‘इमोशनल इंटेलिजेंस’ का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं, इसलिए वे शब्दों से ज्यादा सामने वाले के व्यवहार और भविष्य की प्लानिंग पर ध्यान देती हैं.
कौन है ज्यादा सीरियस?
यह बहस सदियों पुरानी है, लेकिन साइकोलॉजिकल स्टडीज के अनुसार, सीरियसनेस का पैमाना दोनों के लिए अलग है. पुरुष अक्सर अपने प्यार को एक्शन के जरिए दिखाते हैं. अगर वह आपके भविष्य के लिए मेहनत कर रहा है या संकट में आपके साथ खड़ा है, तो वह सीरियस है. जबकि महिलाएं प्यार में अपना पूरा ‘सपोर्ट सिस्टम’ लगा देती हैं. वे अपने पार्टनर की छोटी-छोटी आदतों का ख्याल रखती हैं और रिश्ते को निभाने के लिए समझौते करने में पुरुषों से आगे रहती हैं.
फिजिकल अट्रैक्शन या इमोशनल कनेक्शन!
अक्सर शुरुआती दौर में ‘आई लव यू’ के पीछे ‘फिजिकल अट्रैक्शन’ या ‘हार्मोनल रश’ (डोपामाइन और ऑक्सीटोसिन का प्रभाव) हो सकता है. सच्चा प्यार वह है जो इस रश के खत्म होने के बाद भी बचा रहे.
इस तरह यह कहना सही होगा कि प्यार में कोई कम या ज्यादा सीरियस नहीं होता, बस उसे व्यक्त करने का तरीका अलग हो सकता है. जहां लड़के सुरक्षा देने या अपने बर्ताव के जरिए अपनी गंभीरता दिखाते हैं, वहीं लड़कियां भावनात्मक जुड़ाव और देखभाल के जरिए.
अगर आप भी किसी के ‘आई लव यू’ के पीछे की सच्चाई जानना चाहते हैं, तो शब्दों पर नहीं, समय के साथ उनके बदलते व्यवहार पर गौर करें.
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