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टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को 3 साल में अपना IPO लाना ही होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने टाटा संस की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने NBFC यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी का दर्जा छोड़ने की मांग की थी।
टाटा संस ने 2024 में ₹21,813 करोड़ का अपना सारा कर्ज चुका दिया था। कंपनी का कहना था कि अब उस पर कोई कर्ज नहीं है, इसलिए उसे NBFC की कैटेगरी से बाहर किया जाए, लेकिन RBI ने इस मांग को नहीं माना।
इसका सीधा मतलब यह है कि टाटा संस को अब RBI के नियम मानने होंगे और अपने शेयर शेयर बाजार में लिस्ट कराने ही होंगे।

पूरे मामले को सवाल-जवाब समझते हैं…
सवाल 1: टाटा संस ने NBFC का दर्जा छोड़ने की अर्जी क्यों दी थी?
जवाब: टाटा संस ने 2024 में अपना ₹21,813 करोड़ का सारा कर्ज चुका दिया था। कंपनी का तर्क था कि जब उस पर कोई कर्ज ही नहीं बचा, तो उसे वित्तीय कंपनी के नियमों और शेयर बाजार में लिस्ट होने की मजबूरी से छूट मिलनी चाहिए।
सवाल 2: RBI ने अर्जी क्यों खारिज की?
जवाब: रिजर्व बैंक के नियम के मुताबिक, ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा संपत्ति वाली हर वित्तीय कंपनी अपर-लेयर कैटेगरी में आती है। टाटा संस की कुल संपत्ति इस ₹1 लाख करोड़ की सीमा से बहुत ज्यादा है, इसलिए RBI ने उसे नियमों से छूट देने से इनकार कर दिया।
सवाल 3: टाटा संस को कब तक बाजार में लिस्ट होना था?
जवाब: RBI ने सितंबर 2022 में टाटा संस को इस कैटेगरी में डाला था। नियम के मुताबिक कंपनी को 3 साल के भीतर यानी सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना था। अर्जी पेंडिंग होने के कारण यह मामला टलता रहा, लेकिन अब अर्जी खारिज होने के बाद लिस्टिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सवाल 4: टाटा संस की लिस्टिंग से रिटेल निवेशकों को क्या फायदा होगा?
जवाब: टाटा संस के लिस्ट होने से आम लोगों को एअर इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा डिजिटल और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स जैसी कंपनियों में पैसा लगाने का मौका मिलेगा। ये वो बड़ी कंपनियां हैं जो फिलहाल शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं हैं।
सवाल 5: शेयरहोल्डर्स और कंपनी के वैल्यूएशन पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: टाटा संस की लिस्टिंग से समूह की अनलिस्टेड कंपनियों की मार्केट वैल्यू तय हो सकेगी। इससे टाटा संस की कुल वैल्यूएशन काफी बढ़ सकती है, जिसका सीधा फायदा उसके शेयरधारकों को मिलेगा।
सवाल 6: शापूरजी पलोनजी ग्रुप पर इसका क्या असर पड़ेगा?
जवाब: शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप की टाटा संस में 18.4% हिस्सेदारी है। टाटा संस के लिस्ट होने से उनकी हिस्सेदारी की सही वैल्यू सामने आएगी। भविष्य में अगर SP ग्रुप अपने शेयर बेचकर या गिरवी रखकर पैसा जुटाना चाहेगा, तो लिस्टेड कंपनी होने की वजह से यह काम काफी आसान हो जाएगा।

सवाल 7: क्या टाटा संस के पास अब लिस्टिंग से बचने का कोई ऑप्शन है?
जवाब: नहीं, नियम के मुताबिक ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा संपत्ति वाली कंपनी को छूट नहीं मिल सकती। इसलिए कानूनी राहत के बिना टाटा संस के लिए लिस्टिंग टालना नामुमकिन है। हालांकि, कंपनी RBI से तैयारी के लिए थोड़ा और समय मांग सकती है।
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