नई और पुराने टैक्स रिजीम में भी उपलब्ध
₹65,500 तक कैसे होगी बचत?
नई टैक्स व्यवस्था में प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए नियोक्ता द्वारा बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (Basic + DA) का अधिकतम 14% तक का योगदान टैक्स छूट के दायरे में आता है, यानी जितना अधिक कंपनी NPS में योगदान करेगी, उतनी ही आपकी टैक्स योग्य आय (Taxable Income) कम होगी और टैक्स की बचत बढ़ेगी। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी की सालाना सैलरी ऐसी है कि कंपनी अधिकतम सीमा तक NPS में योगदान करती है, तो उसकी टैक्स बचत करीब ₹65,500 प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है।
क्या कहते हैं टैक्स एक्सपर्ट?
टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि कॉर्पोरेट NPS नई टैक्स व्यवस्था अपनाने वाले कर्मचारियों के लिए सबसे प्रभावी टैक्स सेविंग विकल्पों में से एक बन गया है। इससे डबल फायदा मिलता है। पहला, आपकी टैक्स देनदारी कम होती है और दूसरा हर महीने रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा निवेश अपने आप तैयार होता रहता है। लंबे समय तक नियमित निवेश और कंपाउंडिंग का लाभ मिलने से रिटायरमेंट के समय अच्छा-खासा फंड तैयार हो सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि अगर नियोक्ता द्वारा NPS, EPF और सुपरएन्युएशन फंड में कुल योगदान ₹7.5 लाख से अधिक हो जाता है, तो अतिरिक्त राशि टैक्स के दायरे में आ सकती है। इसलिए कर्मचारियों को अपने वेतन ढांचे और कंपनी की NPS नीति को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
अगर आपकी कंपनी कॉर्पोरेट NPS सुविधा देती है और आपने अभी तक इसका विकल्प नहीं चुना है, तो यह आपके लिए टैक्स बचाने का शानदार मौका हो सकता है। आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय यह सुनिश्चित करें कि नियोक्ता का NPS योगदान फॉर्म-16 में सही तरीके से दर्ज हो। इसके बाद आप सेक्शन 80CCD(2) के तहत इस कटौती का दावा कर सकते हैं। इससे न केवल टैक्स कम होगा, बल्कि भविष्य के लिए मजबूत रिटायरमेंट फंड भी तैयार होगा।
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