नाभि में तेल डालना एक ट्रेडिशनल परंपरा है जिसे आयुर्वेद में खास जगह दी गई है। लेकिन हर समस्या के लिए अलग तेल का असर अलग होता है। एक्सपर्ट से जानें कौन सा तेल कौन सी समस्या में डालना चाहिए?
कब्ज के लिए
न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है कि अगर किसी को कब्ज रहती है या फिर ड्राई गट का इशू हो रहा है तो उसे अपनी नाभि में कैस्टर ऑयल डालना चाहिए। कैस्टर ऑयल काफी थिक होता है। जिसे स्किन से बॉडी में अब्जॉर्ब होने में टाइम लगता है। नाभि में डालने पर ये अब्जॉर्ब होता है और कब्ज और ड्राई गट की समस्या को कम करता है।
साइनस या कोल्ड होने पर
अगर किसी को साइनस की समस्या है, सर्दी-जुकाम हुआ है तो उसकी नाभि में नारियल के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर लगाना चाहिए। इससे जुकाम की समस्या में आराम मिलता है।
हार्मोनल इंबैलेंस
अगर किसी महिला को हार्मोनल इंबैलेंस की समस्या हो तो उसे गर्म देसी घी को नाभि में डालना चाहिए। गर्म देसी घी एंजायटी और कम नींद आने वाले लोगों को भी असर दिखाती है। तो गर्म देसी घी नाभि में डालना फायदेमद हो सकता है।
स्किन से जुड़ी समस्या
जिन लोगों को चेहरे पर पिंपल, एक्ने की समस्या होती रहती है और ये पिंपल फेस पर धब्बे छोड़ जाते हैं। ऐसे टीनएज ग्रुप वाले बच्चों को नाभि में नीम का तेल डालना चाहिए। अगर नीम का तेल ना हो तो थोड़ा सा नारियल का तेल ही रोजाना डालें। ये स्किन के एक्ने और पिंपल को खत्म करने में मदद करेंगे।
तेल नाभि के जरिए शरीर को संतुलन देता है। ये एक ट्रेडिशनल पुराना तरीका है, जिससे शरीर को हील किया जाता था।
तिल का तेल
सर्दियों में शरीर को लचीला, मजबूत बनाने, पाचन को तेज करने के लिए काफी सारे लोग तिल के तेल को नाभि में डालते हैं। ये तेल शरीर को ठंड में गर्म रखता है नर्व सिस्टम को शांत करता है।
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