UPSC Success Story: महाराष्ट्र के कोल्हापुर में चरवाहे परिवार में जन्मे बीरदेव डोणे ने विपरीत परिस्थितियों को हराकर UPSC में 551वीं रैंक हासिल की। जब परिणाम आया, वे खेतों में भेड़ चरा रहे थे। आज वो एक IPS अधिकारी हैं।
जब आया UPSC रिजल्ट, तब खेतों में चरा रहे थे भेड़ें
बीरदेव के संघर्ष का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब 22 अप्रैल को UPSC का फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ, उस वक्त वे अपने गांव में किसी जश्न या लग्जरी कमरे में नहीं थे। वे अपने परिवार के साथ बेलगाम कर्नाटक के सीमावर्ती क्षेत्र में खुले मैदानों में भेड़-बकरियां चरा रहे थे।
अचानक एक दोस्त का फोन आया और उसने खबर दी कि बीरदेव ने UPSC परीक्षा क्रैक कर ली है। वहीं खेतों के बीच उनके दोस्तों और रिश्तेदारों ने बीरदेव को पारंपरिक ‘धनगरी फेटा’ (पगड़ी) पहनाकर सम्मानित किया और जीत का जश्न मनाया।
पढ़ाई में हमेशा से रहे होनहार
बीरदेव का बचपन खुले मैदानों और पहाड़ों के बीच बीता। घर में पढ़ाई के लिए अलग से कमरा या टेबल तक नहीं था, इसलिए वे गांव के प्राइमरी स्कूल के बरामदे में बैठकर पढ़ाई करते थे। इसके बावजूद उनकी प्रतिभा कभी दबी नहीं रही।
10वीं कक्षा में मुरगुड केंद्र में 96% अंकों के साथ टॉप किया। 12वीं (साइंस) में 89% अंक हासिल कर दोबारा केंद्र में पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने पुणे के प्रतिष्ठित COEP से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया।
इंडिया पोस्ट की नौकरी छोड़ी, सेना में तैनात भाई ने की मदद
इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने कुछ समय ‘इंडिया पोस्ट’ में नौकरी भी की। लेकिन उनका असली सपना देश सेवा में उच्च पद पर जाना था, इसलिए उन्होंने 2021 में नौकरी से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली में UPSC की तैयारी शुरू कर दी। इस दौरान भारतीय सेना में कार्यरत उनके बड़े भाई वासुदेव डोणे ने बीरदेव की वित्तीय मदद की और उनका हौसला बढ़ाया।
दो असफलताओं के बाद तीसरे प्रयास में मिली ऐतिहासिक जीत
UPSC का सफर बीरदेव के लिए आसान नहीं रहा। 2022 में अपने पहले प्रयास में वे महज 30 अंकों से कट-ऑफ से चूक गए। फिर 2023 में अपने दूसरे प्रयास में सिर्फ 3 अंकों से अंतिम चयन से रह गए। 2024 में तीसरे प्रयास में उन्होंने 775 अंक लिखित में और 160 अंक इंटरव्यू में प्राप्त कर AIR 551 हासिल की और IPS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।
बीरदेव डोणे का कहना है, “चुनौतियां आएंगी, लेकिन उनसे डरने के बजाय ईमानदारी से निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। अगर आपकी मेहनत में सच्चाई है, तो सफलता अवश्य मिलेगी।” उनकी यह सफलता देश के उन लाखों ग्रामीण छात्रों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखते हैं।
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