‘हमारे खिलाड़ी शारीरिक रूप से बहुत मजबूत हैं, लेकिन वे तकनीकी रूप से पिछड़ जाते हैं। अमन जैसे बेहतरीन पहलवान भी जब मैच हारते हैं, तो वह विरोधी के बेहतर होने से नहीं, बल्कि अपनी तकनीकी गलतियों की कमी के कारण हारते हैं। मैं 4 कनेक्टिंग फ्लाइट बदलकर यहां आया। थक गया हूं। ऐसे ही खिलाड़ी भी थक जाते हैं।’ यह कहना है भारतीय पुरुष की फ्रीस्टाइल कुश्ती टीम के मुख्य कोच एमजारियोस बेंटिनिडिस (शाको) का। मुख्य कोच बनने के बाद शाको भारत लौटते तो 31 मई, रविवार को लखनऊ में चल रहे एशियन गेम्स के ट्रायल में पहुंचे। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने उनसे बातचीत की। उन्होंने अनुशासन, पहलवानों की कमियों और भारतीय कोचिंग सिस्टम पर बेबाकी से अपनी राय रखी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… ‘यहां की यात्रा व्यवस्था पर कुश्ती संघ से बात करूंगा’ शाको ने लखनऊ में कैंप होने और यहां की यात्रा व्यवस्था पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा- मैं इस बारे में भारतीय कुश्ती संघ (WFI) से बात करूंगा। मैं खुद जॉर्जिया से 17 घंटे की फ्लाइट और 4 कनेक्टिंग फ्लाइट्स बदलकर आया हूं। थक चुका हूं। एक पहलवान की भी ऊर्जा ऐसे यात्रा में खपेगी तो वह कैसे जीतेगा? इतनी लंबी और थकाऊ यात्रा करके प्रतियोगिता में जाएगा, तो वह जीतने की ऊर्जा कहां से लाएगा? दिल्ली से फ्लाइट्स कनेक्ट करना ज्यादा आसान है। ‘देश के लिए जान लगाने वाले 40 एथलीट चाहिए’ शाको ने कहा- मेरे लिए अनुशासन से बढ़कर कुछ नहीं है। मुझे कैंप में 300 ऐसे एथलीट नहीं चाहिए जो गंभीर न हों। मुझे सिर्फ 40 ऐसे मेहनती पहलवान चाहिए जो देश के लिए कुछ करना चाहते हों। कुछ खिलाड़ी दूसरों को भी भटकाते हैं, वह सब अब मेरे रहते नहीं चलेगा। पहलवान खुद की गलतियों से हारते हैं, प्रतिभा की कमी नहीं है। ‘ट्रेनिंग प्रोग्राम में बदलाव जरूरी’ हर वजन श्रेणी (जैसे 50 किलो या 55 किलो) के खिलाड़ी के लिए एक ही ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं हो सकता। हर खिलाड़ी की मानसिक और शारीरिक जरूरत के हिसाब से अलग ट्रेनिंग होगी। 74 किलो, 97 किलो और 125 किलो जैसी भारी वजन श्रेणियों में भारत के खराब प्रदर्शन पर कहा कि भूल जाइए कि हम भारी वजन में कमजोर हैं। जब आप रोज-रोज कहेंगे कि हमें समस्या है, तो खिलाड़ी के दिमाग में डर बैठ जाता है। हम समस्या पर नहीं, सिर्फ जीतने और समाधान पर बात करेंगे। ‘सुजीत के खेल में शानदार संतुलन’ शाको ने ओलंपिक पर कहा कि सुशील- बजरंग के बाद अब सुजीत कलकल की बारी है, लेकिन ओलंपिक अलग दुनिया है। 65 किलोग्राम वर्ग में देश के उभरते सितारे सुजीत की तारीफ करते हुए कहा कि सुजीत अद्भुत खिलाड़ी हैं। सुजीत में ताकत, तकनीक और डिफेंस का शानदार मिश्रण है। सुशील कुमार अपने समय के सर्वश्रेष्ठ पहलवान थे, वे दिल से बाघ थे। उनके बाद बजरंग आए और अब सुजीत हैं। सुजीत अंडर-23 विश्व चैंपियन हैं, लेकिन ओलंपिक एक मनोवैज्ञानिक लड़ाई है। दुनिया में 6-6 बार के विश्व चैंपियन भी ओलंपिक में एक छोटी सी गलती वजन न घटाने के कारण पदक से चूक जाते हैं। इसलिए सुजीत को कदम-कदम पर मेरी गाइडेंस की जरूरत होगी। बजरंग के पदक को भगवान का आशीर्वाद बताया बजरंग पुनिया के साथ उनके सफर के अंत पर कोच शाको भावुक दिखे। उन्होंने कहा दुनिया का कोई ऐसा कोच या पहलवान यहां तक कि अब्दुलराशिद सादुलेव भी नहीं थे, जो 4 साल में कभी न हारा हो। कजाकिस्तान में बजरंग के साथ रेफरी ने बेइमानी की। ओलंपिक से ठीक पहले उन्हें बहुत गंभीर चोट लगी थी। बावजूद इसके हमें जो कांस्य पदक मिला, वह भगवान का भेजा हुआ आशीर्वाद था। इतिहास सिर्फ ओलंपिक पदक से बनता है और बजरंग ने वह बनाया। ———————— यह खबर भी पढ़िए- अमन, दीपक और सुजीत ने एशियन गेम्स किया क्वालीफाई : जापान में खेला जाएगा, कुश्ती में फ्री स्टाइल और ग्रीकोरोमन टीम घोषित लखनऊ स्थित साई सेंटर में रविवार को एशियन गेम्स-2026 के लिए कुश्ती का ट्रायल हुआ। फ्री स्टाइल और ग्रीकोरोमन वर्ग की भारतीय टीम घोषित कर दी गई। करीब 10 घंटे तक चले मैराथन ट्रायल में देशभर के चुनिंदा पहलवानों ने अपनी ताकत और तकनीक का प्रदर्शन किया। ट्रायल में जीते पहलवान एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। (पूरी खबर पढ़िए)
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