सुनील गावस्कर ने भारतीय सिलेक्टर्स को एक सख्त सुझाव दिया है। भारत के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर गावस्कर का मानना है कि औसत फील्डर की टीम इंडिया में कोई जरूरत नहीं है।
‘ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे…’
गावस्कर ने स्पोर्टस्टार के लिए अपने कॉलम में लिखा, ”यह जरूरी है कि अगर कोई खिलाड़ी औसत फील्डर है तो उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए। ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे कप्तान यह उम्मीद करते हुए तीन या चार खिलाड़ियों को छिपा सके कि गेंद उनके पास नहीं जाएगी।” गावस्कर ने इसके अलावा भारतीय बल्लेबाजों में गेम अवेयरनेस की कमी को लेकर आलोचना की। भारत ने हाल ही में इंग्लैंड में तीन मैचों की वनडे सीरीज 1-2 से गंवाई जबकि टी20 सीरीज में 4-0 से सूपड़ा हुआ। भारत का उससे पहले आयरलैंड में दो टी20 मैचों की सीरीज में क्लीन स्पीप हुआ था। आयरलैंड में भारतीय टीम 183 और 155 रनों का टारगेट चेज नहीं कर सकी थी।
‘बॉल को उसकी मेरिट के हिसाब…’
पूर्व दिग्गज बल्लेबाज ने कहा, ”शॉट सिलेक्शन बहुत अहम है और ऐसे बल्लेबाज को अपने ईगो पर काबू रखना होता है और अपनी इमेज के हिसाब से खेलने की कोशिश नहीं करनी होती, बल्कि बॉल को उसकी मेरिट के हिसाब से खेलना होता है। हां, अल्ट्रा-शॉर्ट फॉर्मेट, टी20 में ऐसा करना आसान नहीं है क्योंकि लगभग हर दूसरी गेंद पर बड़े शॉट की जरूरत होती है। लेकिन वनडे फॉर्मेट में मामला अलग है, जहां पावर शॉट लगाने से पहले थोड़े सेटल होने का समय मिलता है।”
‘उस बॉलर को ढूंढें, जिसके खिलाफ…’
गावस्कर ने आगे लिखा, ”स्मार्ट क्रिकेट खेलना जरूरी है। इसलिए, उस बॉलर को ढूंढें, जिसके खिलाफ काउंटर अटैक करने की जरूरत नहीं है। फिर उन बॉलर्स को टारगेट करें जिनके खिलाफ आप बेहतर बॉलर के किफायती ओवर की भरपाई कर सकते हैं। दुनिया की किसी भी टीम के पास पांच टॉप बॉलर नहीं होते हैं, और टी20 गेम में हमेशा आठ से 12 ओवर ऐसे होते हैं जहां रन लूटे जा सकते हैं। वहीं, 50 ओवर के फॉर्मेट में थोड़ा सब्र रखने से कोई नुकसान नहीं होने वाला, भले ही टीम 380 प्लस जैसे बड़े स्कोर का पीछा कर रही हो।” भारत को इंग्लैंड में तीसरे वनडे में 388 का टारगेट का पीछा करते हुए 27 रनों से हार का मुंह देखना पड़ा था।
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