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अगर आप थकान मिटाने या तुरंत रिफ्रेश होने के लिए एनर्जी ड्रिंक के नाम पर रेडबुल, स्टिंग और मोंस्टर जैसे ड्रिंक्स पीते हैं, तो ये कंपनियों का भ्रामक दावा है। भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने इन कंपनियों को अपने प्रॉडक्ट्स से यह नाम और इससे जुड़े दावों को हटाने का आदेश दिया है।
FSSAI ने कहा है कि ये ड्रिंक्स पीने से “शरीर और दिमाग तरोताजा हो जाता है” या “तुरंत ताकत मिलती है”, जैसे दावे लोगों को गुमराह करने वाले हैं। भारत में ऐसी ड्रिंक्स के लिए कोई मानक तय ही नहीं हैं।
इंडस्ट्री के विरोध और कारोबार पर असर होने की दलीलों को खारिज करते हुए FSSAI ने कंपनियों को लेबल में बदलाव करने के लिए 90 दिन का समय दिया है। नियामक ने हाल ही में कंपनियों को नोटिस दिया था।

एनर्जी ड्रिंक शब्द का इस्तेमाल करने पर बैन
नियामक ने स्टिंग के लिए पेप्सी, रेड बुल, मोंस्टर बेवरेज, कैम्पा एनर्जी के लिए रिलायंस और हेल एनर्जी जैसी बड़ी कंपनियों को ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने का निर्देश दिया है।
FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रजीत पुन्हानी ने शुक्रवार को हुई मीटिंग में कंपनियों के नुकसान के तर्कों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कंपनियां चाहें तो फैसले को अदालत में चुनौती दे सकती हैं।
कंपनियों को ब्रांड इमेज और सेल्स पर असर पड़ने का डर
पेप्सी का ‘स्टिंग’ विज्ञापन में शरीर में बिजली जैसी ऊर्जा दौड़ने का दावा करता है, वहीं रेड बुल का “गिव्स यू विंग्स” स्लोगन दुनियाभर में प्रसिद्ध है। कंपनियां डर रही हैं कि ‘एनर्जी’ कैटेगरी का लेबल हटने से उनकी वर्षों पुरानी ब्रांड इमेज और बिक्री पर बुरा असर पड़ेगा।
इंडियन बेवरेज एसोसिएशन ने FSSAI को पत्र लिखकर कहा है कि इस तरह के नोटिस सार्वजनिक करने से ब्रांड्स की इमेज को नुकसान होता है और लोगों में भ्रम फैलता है। एसोसिएशन ने पहले से चर्चा करके और चरणबद्ध तरीके से नियम लागू करने की मांग की है।
कार्रवाई: राजस्थान में जब्ती और ई-कॉमर्स पर सख्ती
1. भारत में ‘एनर्जी ड्रिंक्स’ का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और 2028 तक इसके लगभग ₹13,300 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। 2018 से 2023 के बीच इसकी बिक्री में सालाना 100% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
2. राजस्थान सरकार ने स्टिंग, कैम्पा एनर्जी और रेड बुल की हजारों बोतलें जब्त की हैं। इसके अलावा अमेजन, फ्लिपकार्ट, ब्लिंकिट और स्विगी इन्स्टामार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को इन ड्रिंक्स को ‘एनर्जी ड्रिंक’ के रूप में प्रमोट न करने को कहा है।
खतरा: कैफीन और टॉरिन की मात्रा अधिक होने से नुकसानदायक
इन ड्रिंक्स में कैफीन, शुगर और एमिनो एसिड ‘टॉरिन’ की मात्रा काफी अधिक होती है, जिसे लेकर दुनियाभर में रेगुलेटर्स चिंतित हैं।
इंग्लैंड में अगले साल अप्रैल से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए हाई-कैफीन ड्रिंक्स पर बैन लगने जा रहा है, जबकि पाकिस्तान के कुछ इलाकों में इन्हें ‘स्टिमुलेंट ड्रिंक्स’ (उत्तेजक पेय) लिखना अनिवार्य किया गया है।

आगे क्या: 90 दिन में पैकेजिंग बदलना अनिवार्य
FSSAI और कंपनियों के बीच हुई चर्चा के बाद इंडस्ट्री बदलावों को लागू करने पर सहमत हो गई है। अब कंपनियों के पास अपनी पैकेजिंग, डिब्बों और बोतलों से ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द और उससे जुड़े दावों को हटाने के लिए 90 दिनों की समय-सीमा है। निर्धारित समय के बाद नए लेबल के साथ ही प्रॉडक्ट्स बाजार में बेचे जा सकेंगे।
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