| बैंक | ब्याज दर |
|---|---|
| AU Small Finance Bank | 7.25 |
| Equitas Small Finance Bank | 7.50 |
| ESAF Small Finance Bank | 6.25 |
| Jana Small Finance Bank | 8.00 |
| Shivalik Small Finance Bank | 6.50 |
| slice Small Finance Bank | 7.25 |
| Suryoday Small Finance Bank | 8.50 |
| Ujjivan Small Finance Bank | 7.70 |
| Utkarsh Small Finance Bank | 7.50 |
FD में निवेश के साथ ध्यान रखें TDS के नियम
FD में निवेश करते समय सिर्फ ब्याज दर देखना ही पर्याप्त नहीं है। वरिष्ठ नागरिकों को ब्याज से जुड़े TDS (Tax Deducted at Source) के नियमों को भी समझना चाहिए। अगर किसी बैंक में FD से मिलने वाला ब्याज निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है, तो बैंक TDS काट सकता है। यहां यह समझना जरूरी है कि TDS अलग से लगाया गया अतिरिक्त टैक्स नहीं होता। ITR दाखिल करते समय इसे आपकी कुल टैक्स देनदारी में एडजेस्ट किया जा सकता है या पात्र होने पर रिफंड भी मिल सकता है।
अगर किसी वरिष्ठ नागरिक की कुल टैक्स देनदारी शून्य है, तो वह TDS से बचने के लिए संबंधित डिक्लेरेशन फॉर्म जमा कर सकता है। इसके लिए फॉर्म 15H का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे पात्र वरिष्ठ नागरिक बैंक को दे सकते हैं। इसका उद्देश्य बैंक को यह बताना होता है कि संबंधित वित्त वर्ष में व्यक्ति की अनुमानित टैक्स देनदारी शून्य है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बैंक ग्राहक की पूरी व्यक्तिगत टैक्स स्थिति नहीं जानता। इसलिए ब्याज निर्धारित सीमा से ऊपर पहुंचने पर बैंक नियमों के अनुसार TDS काट सकता है, भले ही व्यक्ति की अंतिम टैक्स देनदारी शून्य हो। ऐसी स्थिति में पात्र निवेशक पहले से फॉर्म 15H जमा करके अनावश्यक TDS कटौती से बचने का प्रयास कर सकते हैं।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए 5 साल की FD पर 8% से 8.5% तक ब्याज देने वाले विकल्प आकर्षक दिखाई देते हैं। लेकिन निवेश से पहले ब्याज दर की पुष्टि, समय से पहले FD तोड़ने के नियम, टैक्स प्रभाव और बैंक की सुरक्षा व शर्तों को जरूर समझना चाहिए। सिर्फ ज्यादा ब्याज देखकर निवेश करने के बजाय पूरी जानकारी के आधार पर फैसला लेना बेहतर रहेगा।
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