ये परेशानियां बिना दवा के हो सकती हैं ठीक
सर्दी और फ्लू : अधिकतर लोग मौसम बदलने पर सर्दी और फ्लू का शिकार हो जाते हैं. इससे नाक बहना, हल्का बुखार, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण नजर आते हैं. इस परेशानी में दवा के बजाय पर्याप्त आराम करें और गर्म फ्लूड लें. जरूर होने पर बुखार या दर्द की दवा लें. एंटीबायोटिक का प्रयोग न करें, क्योंकि यह वायरल संक्रमण में लाभकारी नहीं होती है.
दस्त और उल्टी : इस समस्या को भी बिना दवा के ठीक किया जा सकता है. दस्त और उल्टी में सबसे बड़ा खतरा शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन है. पानी, ओआरएस या इलेक्ट्रोलाइट घोलकर पीने से राहत मिल सकती है. कुछ समय के लिए सॉलिड मील से परहेज करें. छोटे बच्चों में लक्षण बने रहने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
जलन और सनबर्न : हल्की जलन होने पर तुरंत ठंडा पानी डालें और साफ पट्टी बाँधें. गंभीर जलन में तुरंत अस्पताल जाएं. धूप से बचाव के लिए हाई SPF वाला सनस्क्रीन प्रयोग करें. मोच और चोट में आराम, ठंडी सिकाई, बैंडेज यूज करें. ये उपाय सूजन कम करते हैं. पर्याप्त आराम न करने पर चोट बढ़ सकती है.
कान दर्द और गले की खराश : ये परेशानियां अक्सर वायरल कारणों से होती है. इनमें पेनकिलर और फ्लूड लेना पर्याप्त होता है. अगर 24 से 48 घंटे में सुधार न हो तो डॉक्टर से मिलें. इसके अलावा अगर बच्चों को बुखार आ जाए, तो तरल पदार्थ दें और निर्धारित मात्रा में बुखार की दवा दें. अगर बच्चा अत्यधिक सुस्त लगे या 48 घंटे में सुधार न हो तो चिकित्सकीय सलाह लें. बच्चे को खांसी होने पर कोई दवा न दें. अगर ज्यादा समस्या हो, तो डॉक्टर से मिलें.
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर बहुत अधिक या लंबे समय तक बुखार रहे, लक्षण लगातार बढ़ते जाएं, बच्चा अत्यधिक सुस्त या चिड़चिड़ा हो जाए, शरीर में पानी की कमी के संकेत दिखें, तो ऐसी कंडीशन में डॉक्टर से मिलकर ट्रीटमेंट कराना जरूरी होता है. सामान्य बीमारियां अपने आप ठीक हो जाती हैं, वहीं कुछ रोग ऐसे होते हैं, जिनका पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है. कुछ नेत्र रोग या तंत्रिका संबंधी रोगों में रोग की प्रगति को रोकना कठिन होता है. चिकित्सा केवल रोग के इलाज तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि रोगी के जीवन की गुणवत्ता सुधारने पर भी केंद्रित होनी चाहिए.
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