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हंता वायरल चूहों से फैलता है। WHO के मुताबिक, अगर कोई इंसान चूहों के मल-मूत्र या उसके लार के संपर्क में आने के बाद अपने चेहरे को छूता है तो हंता से संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है।
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यह इंसान के फेफड़ों या किडनी पर सीधा अटैक करता है। फेफड़ों में संक्रमण होने पर सांस लेने में तकलीफ होती है, जिससे मरीज की जान तक जा सकती है।
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आमतौर पर हंता वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता है। इसके संक्रमण का पता लगने में एक से आठ हफ्तों का समय लग सकता है।
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हंता वायरस से अगर कोई संक्रमित होता है तो उसे सर्दी, बदन दर्द, बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और उल्टी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
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इसके अलावा इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों में पानी भरना, किडनी फेल होना, लो बल्ड प्रेशर जैसी समस्या हो सकती है।
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हंता वायरस से बचाव के लिए साफ-सफाई का खास ख्याल रखना जरूरी है। चूहों या गंदगी वाली जगहों से दूरी बनाकर रखें और घरों को साफ रखें।
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किसी संक्रमित जगह की सफाई करते समय मास्क या ग्लव्स का उपयोग करना फायदेमंद साबित हो सकता है।
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