खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रा बाज़ार पर दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 45 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.67 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया। होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गोलीबारी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंताएँ बढ़ा दी हैं। अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के पास गोलीबारी की खबरों के बीच ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 101.00 डॉलर प्रति बैरल होने से घरेलू मुद्रा दबाव में है।
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विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि ईरान के अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाने और अमेरिका के जवाबी हमले करने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य और नागरिक क्षेत्रों में हुए जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम अब भी लागू है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.58 प्रति डॉलर पर खुला। बाद में टूटकर 94.67 प्रति डॉलर पर आ गया जो पिछले बंद भाव से 45 पैसे की गिरावट दर्शाता है।
रुपया बृहस्पतिवार को शुरुआती नुकसान की भरपाई करते हुए 27 पैसे की बढ़त के साथ 94.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.20 पर रहा।
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घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 353.50 अंक टूटकर 77,491.02 अंक पर जबकि निफ्टी 109.25 अंक फिसलकर 24,225.20 अंक पर रहा।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.08 प्रतिशत बढ़त के साथ 101.14 डॉलर प्रति बैरल रहा।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बृहस्पतिवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने 340.89 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
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