डीयू के 4 साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) के 12,111 छात्रों ने 1-वर्षीय पीजी के लिए आवेदन किया है। साथ ही, 7.5 CGPA हासिल करने वाले छात्र अब बिना मास्टर डिग्री के सीधे पीएचडी कर सकेंगे।
1 साल के पीजी के लिए 5,857 सीटों पर तगड़ा मुकाबला
डीयू के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में यूजीसीएफ-2022 (UGCF-2022) के तहत कुल 75,948 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। इनमें से 40,005 छात्रों ने तीन साल की पढ़ाई पूरी कर 2025 में ही डिग्री लेकर कॉलेज छोड़ दिया। लगभग 35,943 छात्रों ने चौथे वर्ष (FYUP) की पढ़ाई जारी रखी।
चौथे वर्ष में पढ़ रहे इन छात्रों में से 34.27% (12,111 विद्यार्थियों) ने 1-वर्षीय पीजी में एडमिशन के लिए अप्लाई किया है। डीयू ने 46 विषयों में कुल 5,857 सीटें रखी हैं, जिनमें 2,807 सीटें रेगुलर मोड की हैं और 3,035 सीटें ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) मोड की हैं। औसतन हर कोर्स में करीब 127 सीटें उपलब्ध हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की तुलना में अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सीटें काफी सीमित हैं। जहां जेएनयू (JNU) ने 4 कोर्सेज में 71 सीटें और अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली (AUD) ने 7 कोर्सेज में 210 सीटें दी हैं, वहीं डीयू का यह कदम हजारों छात्रों को सीधे लाभ पहुंचाएगा।
7.5 CGPA लाएं और सीधे करें PhD में एंट्री
छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि डीयू ने 2 वर्षीय पीजी कोर्सेज में सीटों की संख्या को घटाया नहीं है। तीन साल में ग्रेजुएशन पूरी करने वाले छात्र पहले की तरह ही 2 साल के मास्टर्स प्रोग्राम में दाखिला ले सकेंगे।
इसके साथ ही डीयू ने एक और बड़ा तोहफा दिया है। जिन छात्रों ने 4 साल का ग्रेजुएशन (FYUP) कम से कम 7.5 CGPA (आरक्षित वर्ग के लिए 7 CGPA) के साथ पूरा किया है, वे बिना मास्टर्स किए सीधे पीएचडी (PhD) में दाखिले के लिए भी पात्र होंगे।
रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट पर जोर
डीयू का उद्देश्य चार-वर्षीय अंडर ग्रेजुएट कोर्स के जरिए छात्रों को रिसर्च, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और एंटरप्रेन्योरशिप में अनुभव प्रदान करना है। इस नए बदलाव से उच्च शिक्षा में समय की बचत होगी और छात्र कम उम्र में ही रिसर्च जैसे क्षेत्रों में अपना करियर बना सकेंगे।
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