मौजूद जानकारी के अनुसार जापान को अपना पहला मुकाबला नीदरलैंड के खिलाफ खेलना है, लेकिन उससे तीन दिन पहले ही एंडो के बाहर होने की पुष्टि कर दी गई। उनकी जगह जर्मनी के क्लब बोरूसिया मोंशेनग्लाडबाख से खेलने वाले शुतो माचिनो को टीम में शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि 33 वर्षीय एंडो पिछले कुछ महीनों से पैर की चोट से जूझ रहे थे। फरवरी में लिवरपूल के लिए खेलते हुए सुंदरलैंड के खिलाफ मुकाबले में उन्हें गंभीर चोट लगी थी। इस चोट के कारण उनका क्लब सत्र भी समय से पहले समाप्त हो गया था। हालांकि विश्व कप खेलने की उम्मीद में उन्होंने लगातार मेहनत की और मई के अंत में आइसलैंड के खिलाफ जापान के अभ्यास मुकाबले में वापसी भी की थी।
बता दें कि टोक्यो में खेले गए उस मुकाबले में जापान ने 1-0 से जीत दर्ज की थी, लेकिन एंडो पूरे मैच में नहीं खेल सके। वह मध्यांतर के बाद मैदान से बाहर चले गए थे। इसके बाद भी उनके पैर में तकलीफ बनी रही और मेक्सिको में आयोजित जापान के विश्व कप तैयारी शिविर के दौरान वह पूरी क्षमता से अभ्यास नहीं कर पाए।
मौजूद जानकारी के अनुसार जापानी टीम जब अपने विश्व कप शिविर के लिए नैशविल पहुंची, तब भी एंडो ने अभ्यास में हिस्सा लिया था। हालांकि उनकी फिटनेस अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी। चिकित्सकीय जांच और टीम प्रबंधन की सलाह के बाद आखिरकार उन्हें विश्व कप टीम से बाहर करने का फैसला लिया गया।
एंडो ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि विश्व कप नहीं खेल पाने का उन्हें दुख जरूर है, लेकिन उन्हें इस बात पर गर्व है कि उन्होंने कतर विश्व कप के बाद जापान की कप्तानी की और टीम को एक नई सोच दी। उन्होंने कहा कि उनका सपना हमेशा जापान को विश्व कप जीतते देखना रहा है और उन्हें विश्वास है कि भविष्य में जापान यह उपलब्धि जरूर हासिल करेगा।
गौरतलब है कि एंडो ने अपने संदेश में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब वह एक सामान्य प्रशंसक की तरह जापान का समर्थन करेंगे। उनके इस फैसले ने जापानी फुटबॉल में एक युग के अंत का संकेत दिया है।
बता दें कि वातारु एंडो ने वर्ष 2015 में जापान के लिए पदार्पण किया था। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने 73 मुकाबले खेले और चार गोल किए। वह वर्ष 2018 और 2022 के विश्व कप में भी जापानी टीम का हिस्सा रहे थे।
विशेष रूप से कतर विश्व कप में जर्मनी और स्पेन जैसी मजबूत टीमों पर जापान की ऐतिहासिक जीत में एंडो की भूमिका बेहद अहम रही थी। उनकी नेतृत्व क्षमता और मैदान पर अनुशासित खेल ने उन्हें जापानी फुटबॉल का प्रमुख चेहरा बना दिया था।
अब विश्व कप 2026 में जापान को नीदरलैंड, ट्यूनीशिया और स्वीडन जैसी टीमों का सामना करना है। ऐसे में कप्तान के बाहर होने से टीम को चुनौती जरूर मिलेगी, लेकिन जापानी प्रशंसकों को उम्मीद है कि एंडो की प्रेरणा और अनुभव टीम के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का हौसला देते रहेंगे।
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