श्रीलंका टेस्ट सिरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किए गए आकिब नबी की कहानी बेहद दिलचस्प है। काफी हद तक ‘इकबाल’ फिल्म की तरह। आइए जानते हैं कैसे एक बार को तो पिता बन गए थे विलेन…
आइडल से मुलाकात का सपना
यह बात करीब 13 साल पुरानी है। बीसीसीआई ने चेन्नई में तेज गेंदबाजी का कैंप लगाया था। इसमें बतौर मेंटॉर आ रहे थे, ऑस्ट्रेलिया के मशहूर तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा। उस वक्त जम्मू कश्मीर में क्लब क्रिकेट खेल रहे आकिब नबी को भी इस कैंप में शामिल होने का मौका मिला था। नबी का उत्साह सातवें आसमान पर था। ग्लेन मैक्ग्रा जैसे पेस बॉलिंग आइकॉन से मिलने की खुशी में उनकी रातों की नींद गायब हो चुकी थी। लेकिन सपनों की राह इतनी आसान कहां होती है?
किसने लगाया सपनों पर ब्रेक
आकिब नबी के सपनों पर भी ब्रेक लग चुका था। यह ब्रेक लगाने वाला कोई और नहीं, खुद उनके पिता थे। असल में नबी के पिता, गुलाम नबी डार, एक स्कूल टीचर हैं। जिस वक्त बीसीसीआई का यह कैंप लग रहा था, उन्हीं दिनों नबी के 12वीं के बोर्ड एग्जाम होने वाले थे। ऐसे में गुलाम साहब को लगा कि लड़का ‘खेलेगा कूदेगा तो होगा खराब।’ उन्होंने मान रखा था कि ‘पढ़ेगा-लिखेगा तभी बनेगा नवाब’। सो, आकिब नबी को फरमान सुना दिया गया। साहबजादे, कैंप-वैंप छोड़िए। बोर्ड के इम्तिहान सिर पर हैं, उनकी तैयारी कीजिए।
फिर होती है दोस्त की एंट्री
हिंदी फिल्मों में दिखाया जाता है कि जब पिता विलेन बनते हैं तो हीरो को उसका दोस्त ही बचाता है। आकिब नबी के केस में भी ऐसा ही हुआ। पिता गुलाम डार साहब तो अड़े हुए थे। अजी छोड़िए, कहां क्रिकेट। पढ़ाई खराब हो जाएगी। लेकिन आकिब नबी के जिगरी दोस्त, उनके पहले क्लब कैप्टन जुबैर ने ठान लिया था कि दोस्त को मंजिल तक पहुंचाना है। इसके बाद जुबैर जुट गए आकिब के पिता को मनाने में। उन्होंने गुलाम साहब को समझाया कि उनके बेटे के लिए यह कैंप कितना मायने रखता है। बहरहाल, आकिब के पिता मान तो गए, लेकिन कहानी में ट्विस्ट अभी बाकी था।
लेकिन पिता ने रख दी शर्त
जुबैर के मुताबिक गुलाम डार मान तो गए कि अपने बेटे को क्रिकेट कैंप में जाने देंगे। आकिब को आइकॉन पेसर ग्लेन मैक्ग्रा के सामने परफॉर्मेंस करने का सपना पूरा करने देंगे। लेकिन उन्होंने एक बड़ी शर्त रख दी। यह शर्त थी, आकिब ट्रेन से यात्रा नहीं करेंगे। वह श्रीनगर से चेन्नई जाएंगे, लेकिन हवाई जहाज पर सवार होकर। इस शर्त में सबसे बड़ी बाधा थी, रुपयों का इंतजाम। लेकिन आकिब के पिता ने उन्हें कैंप में शामिल होने की इजाजत ही नहीं दी। बल्कि उन्होंने अपना बड़प्पन दिखाते हुए उधार वगैरह लेकर 10 हजार रुपयों का बंदोबस्त भी किया, ताकि बेटा चेन्नई सही-सलामत पहुंच जाए।
दोस्त जुबैर से कैसे हुई मुलाकात
जम्मू-कश्मीर का छोटा सा जिला है बारामूला। यहां पर एक छोटा सा गांव है, शीरी। इसी गांव से आते हैं आकिब नबी। जुबैर, आकिब के साथ अपनी पहली मुलाकात का एक किस्सा बताते हैं। उस वक्त नबी करीब 14 साल के थे। आकिब और जुबैर की टीम के बीच मैच खेला गया था। इसमें आकिब ने जबर्दस्त गेंदबाजी की और अपनी टीम को जिता दिया था। मैच के बाद जुबैर ने आकिब से पूछा कि क्या वह उनके क्लब की तरफ से खेलना पसंद करेंगे? इसके जवाब में आकिब ने जो कहा, उससे जुबैर हंस पड़े। असल में आकिब ने जुबैर से उलटे पूछ लिया कि क्या मुझे इसके लिए पैसे देने होंगे? यहीं से दोनों के बीच दोस्ती हो गई।
तब स्पाइक्स वाले जूते तक नहीं थे
आकिब के टर्फ पिच पर पहली बार गेंदबाजी का किस्सा भी कम रोचक नहीं है। जुबैर बताते हैं कि उस वक्त, कश्मीर में सिर्फ एक टर्फ विकेट हुआ करती थी। यह विकेट श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में थी। जुबैर के मुताबिक उस मैदान में हमारा एक जिला स्तरीय मैच होना था। जब सभी खिलाड़ी मैदान में पहुंचे तो आकिब ने जुबैर से बताया कि भाई मैं यह सोचकर पूरी रात सो नहीं पाया कि मुझे शेर-ए-कश्मीर मैदान में मैच खेलना है। लेकिन असली कहानी तो अभी बाकी थी। जैसे ही आकिब ने पहली गेंद डाली, वह बुरी तरह से फिसल गए। उस वक्त टीम के बाकी खिलाड़ियों का ध्यान आकिब के जूतों पर गया। असल में उन्होंने स्पाइक्स की जगह, स्नीकर्स पहन रखे थे। जुबैर बताते हैं कि इसके बाद टीम के एक अन्य सीनियर गेंदबाज अपना ओवर खत्म करने के बाद आकिब को अपने स्पाइक्स वाले जूते देते। आकिब उसे पहनकर अपना ओवर पूरा करते और ओवर के बाद उतारकर उसे सीनियर को दे देते।
आकिब को निखारने वाले बड़े नाम
आकिब नबी को निखारने में दो बड़े नाम हैं। एक तो जम्मू कश्मीर के पूर्व क्रिकेटर परवेज रसूल और दूसरे टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान। असल में यह इरफान ही थे, जिन्होंने पहली बार आकिब नबी के टैलेंट को पहचाना था। साल 2018 में श्रीनगर में हुए ट्रायल के दौरान इरफान उनसे काफी प्रभावित हुए थे। बाद में उन्होंने आकिब को मेंटॉर भी किया। इरफान कहते हैं कि आकिब नबी की सबसे बड़ी ताकत तेज रफ्तार नहीं। बल्कि उसकी ताकत है, टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज को डिफेंसिव खेलने पर मजबूर करते हुए उनसे गलती कराना।
रणजी से नेशनल तक
बता दें कि भारत ने श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए चोटिल जसप्रीत बुमराह की जगह जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को टीम में पहली बार शामिल किया गया है। 29 साल के नबी ने रणजी ट्रॉफी के दो शानदार सीजन के दम पर सीनियर टीम में जगह बनाई है। उन्होंने इस दौरान कुल 104 विकेट लिए, जिसमें 2025-26 सीजन के 60 विकेट भी शामिल हैं। इस सीजन में उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई थी।
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