Success Story: पिता के निधन और 20 की उम्र में शादी के बाद भी दिव्या द्विवेदी ने डॉक्टर बनने का सपना नहीं छोड़ा। सास और पति के सहयोग से उन्होंने तीन साल की बच्ची की मां बनते हुए NEET क्रैक किया और आज मेडिकल ऑफिसर हैं।
20 साल की उम्र में हुई शादी
दिव्या तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। दिव्या के लिए डॉक्टर बनना सिर्फ एक करियर का चुनाव नहीं था, बल्कि यह उनके बचपन का सबसे प्यारा सपना था। वह बचपन से ही लोगों का इलाज करना चाहती थीं। लेकिन जिंदगी में चुनौतियां तब शुरू हुईं जब उनके पिता का अचानक निधन हो गया।
पिता के जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दिव्या की पढ़ाई बीच में ही छूट गई और महज 20 साल की उम्र में उनकी शादी जैसीनगर के रहने वाले प्रांजल द्विवेदी से कर दी गई, जो खुद एक मेडिकल संचालक हैं।
शादी के बाद फिर जगा डॉक्टर बनने का जुनून
शादी हो जाने के बाद अक्सर लड़कियों का पढ़ाई का सफर थम जाता है, लेकिन दिव्या के दिल में डॉक्टर बनने की इच्छा हमेशा जिंदा रही। उन्होंने अपने इस सपने के बारे में पति प्रांजल और ससुराल वालों से बात की। परिवार ने दिव्या की भावना को बहुत अच्छी तरह समझा और उनकी पढ़ाई में पूरा सहयोग करने का फैसला लिया। पति प्रांजल ने दिव्या को प्रतियोगी परीक्षा NEET की तैयारी करने के लिए भोपाल भेजने का बड़ा फैसला लिया।
सास बनीं मां, टिफिन बनाकर भेजा कोचिंग
दिव्या के इस संघर्ष भरे सफर की सबसे खूबसूरत बात उनकी सास का साथ रहा। दिव्या अकेली भोपाल नहीं गईं, बल्कि उनकी सास भी उनके साथ भोपाल रहने के लिए गईं। उन्होंने अपनी बहू की पढ़ाई को पूरे परिवार का सपना मान लिया।
जब दिव्या कोचिंग में घंटों पढ़ाई करती थीं, तब उनकी सास घर के सारे काम संभालती थीं। वह दिव्या के लिए खुद प्यार से टिफिन बनाकर तैयार करती थीं ताकि पढ़ाई के दौरान दिव्या को सेहत और खाने की कोई चिंता न रहे।
मां बनने के बाद भी जारी रखी पढ़ाई
दिव्या की राह में चुनौतियां यहीं खत्म नहीं हुईं। NEET की तैयारी के दौरान ही दिव्या ने एक प्यारी सी बच्ची को जन्म दिया। आज उनकी बेटी तीन साल की है। एक तरफ नन्हीं बच्ची की देखभाल, परिवार की जिम्मेदारी और दूसरी तरफ डॉक्टर बनने के लिए कठिन पढ़ाई, इन दोनों के बीच तालमेल बनाना बहुत मुश्किल काम था। लेकिन दिव्या ने हार नहीं मानी। परिवार ने बच्ची को संभालने में दिव्या की पूरी मदद की, जिससे दिव्या पढ़ाई पर अपना ध्यान बनाए रख सकीं।
मेहनत रंग लाई, बनीं मेडिकल ऑफिसर
दिव्या की दिन-रात की कड़ी मेहनत और परिवार के सपोर्ट का नतीजा यह हुआ कि उन्होंने NEET की परीक्षा पास कर ली। आज दिव्या द्विवेदी अपने गांव जैसीनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में बतौर मेडिकल ऑफिसर अपनी सेवाएं दे रही हैं और मरीजों का इलाज कर रही हैं।
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