रक्षाबंधन का त्योहार है तो कुछ मीठा खाने का मन तो करेगा ही। लेकिन इस चक्कर में अपनी सेहत को नजरंदाज करना भी सही नहीं है। बस मिठाई खरीदते हुए इन 3 बातों का ध्यान रखें, फेस्टिवल भी एंजॉय हो जाएगा और हेल्थ भी दुरुस्त रहेगी।
पूरी तरह मिठाई से दूरी बनाना जरूरी नहीं
डॉ तरंग कृष्णा कहते हैं कि त्योहार वाले दिन अपने मन को मारने की जरूरत नहीं है। आप इस दिन मिठाई आराम से खा सकते है, अगर आपके डॉक्टर ने आपको पूरी तरह मना ना किया हो। वरना तो त्योहार का मजा मिठाई खा कर लिया जा सकता है। हालांकि आप कौन सी मिठाई खा रहे हैं, ये सबसे ज्यादा मायने रखता है। इसलिए स्वीट्स खरीदते हुए ये 3 प्रोटोकॉल जरूर फॉलो करें।
नंबर 1- ज्यादा चमकीले रंगों वाली मिठाइयां ना खरीदें
डॉक्टर कहते हैं कि आपको ज्यादा चमकीले रंगों वाली मिठाइयां लेने से बचना चाहिए। कोई भी मिठाई अगर अननेचुरली ब्राइट रंग में नजर आ रही है या उसका रंग नियॉन ब्राइट है, तो ऐसी मिठाई ना खरीदें। उदाहरण के लिए गाढ़े हरे रंग में मिलने वाली पिस्ता बर्फी की जगह लाइट ग्रीन या ब्राउन रंग की बर्फी चूज करें। ऐसे ही बहुत ब्राइट ओरेंज रंग की जलेबी ना खरीद कर हल्के पीले रंग की चुनें, जिन्हें प्राकृतिक रूप से बनाया गया हो।
नंबर 2- चांदी के वर्क वाली मिठाई ना लें
डॉ तरंग कृष्णा कहते हैं कि अगर आप बर्फी, काजू कतली या कोई भी ऐसी मिठाई ले रहे हैं, जिसमें चांदी का वर्क लगा हो, तो उसे अवॉइड ही करें। आप हलवाई से बिना चांदी के वर्क वाली मिठाई मांग सकते हैं। सिल्वर कोटिंग से बर्फी या मिठाई के टेस्ट पर बिल्कुल भी असर नहीं पड़ता है, उल्टा इसमें मौजूद ढेरों केमिकल्स आपकी हेल्थ को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं।
नंबर 3- पारंपरिक मिठाइयों की तरफ बढ़ें
डॉक्टर कहते हैं कि इस बार कमर्शियल सिंथेटिक मिठाइयों की जगह पारंपरिक मिठाइयों पर वापस जाएं। जैसे- बेसन के लड्डू, आटे का हलवा, खीर या रसमलाई। इन मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए किसी भी तरह के केमिकल्स की जरूरत नहीं पड़ती है। डॉक्टर कहते हैं कि कोशिश करें कि इस बार घर पर ही मिठाई तैयार करें। जिनके यहां ले कर जाएंगे वो रिलेटिव भी खुश हो जाएंगे कि आपने उनके इतने एफर्ट डाले हैं।
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