केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने रिश्वत मामले में पहले से जांच का सामना कर रहे ‘वाप्कोस’ के पूर्व उप मुख्य अभियंता के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने एक कारोबारी से जुड़ी कंपनियों से होटल में ठहरने और हवाई टिकट जैसी सुविधाएं हासिल कीं। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि उक्त कारोबारी की कंपनी ने सरकारी परामर्श संस्था के माध्यम से जल जीवन मिशन (जेजेएम) की 10 परियोजनाएं हासिल की थीं।
सीबीआई ने जल एवं विद्युत परामर्श सेवा लिमिटेड (वाप्कोस) के पूर्व उप मुख्य अभियंता और परियोजना प्रबंधक पंकज दुबे के खिलाफ एक नयी प्राथमिकी दर्ज की है। वाप्कोस केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली सार्वजनिक क्षेत्र की अभियांत्रिकी परामर्श संस्था है। सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी में कारोबारी जिगर देसाई, शील रायदोट और दो कंपनियों—रायदोट इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड तथा उत्कर्ष सॉफ्टवेयर सर्विसेज—को भी आरोपी बनाया है।
अधिकारियों ने बताया कि इन पर कथित तौर पर लोक सेवक को रिश्वत देने की आपराधिक साजिश में शामिल होने का आरोप है। आरोपियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी। दुबे पहले से ही रिश्वत के एक अलग मामले में जांच के दायरे में थे।
इस मामले में उन्हें 21 फरवरी को लखनऊ स्थित एकाना एंटरप्राइजेज के मालिक से कथित तौर पर 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। नयी प्राथमिकी के अनुसार, सीबीआई ने इस मामले में 20 अप्रैल को आरोपपत्र दाखिल किया था। नयी प्राथमिकी में दुबे के देसाई से जुड़ी संस्थाओं के साथ हुए कथित लेन-देन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
सीबीआई के अनुसार, आरोपी के 18 मई 2020 से 23 जुलाई 2025 तक सोलन में तैनात रहने के दौरान देसाई की कंपनी ने वाप्कोस के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में जल जीवन मिशन (जेजेएम) की 10 परियोजनाएं हासिल की थीं।
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