महाराष्ट्र के पुणे जिले में प्रशासन ने गणेशोत्सव के पावन त्योहार के मौके पर पूरे 12 दिनों के लिए शराब की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था. हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बहुत ही दिलचस्प टिप्पणी की. चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी की पीठ ने साफ कहा कि अगर त्योहार के दौरान कोई शराब पीकर उत्साह दिखाता है, तो आप यह नहीं कह सकते कि वह सड़कों पर उपद्रव या कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करेगा.
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक शराब पूरी तरह बंद करने से नियमित पीने वालों की तबीयत बिगड़ सकती है और अस्पताल भर जाएंगे. कोर्ट की फटकार के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा और यह प्रतिबंध सिर्फ दो मुख्य दिनों तक सीमित कर दिया गया. हाई कोर्ट की इस टिप्पणी ने एक पुरानी बहस को दोबारा जिंदा कर दिया है. आखिर ऐसा क्यों होता है कि कुछ लोग शराब पीने के बाद बिल्कुल शांत रहते हैं, जबकि कुछ लोग भारी हंगामा और उपद्रव करने लगते हैं? इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण और हमारे शरीर में निकलने वाले हार्मोन बहुत मायने रखते हैं.
दिमाग का कंट्रोल रूम कमजोर पड़ जाता है
हमारे दिमाग का एक हिस्सा होता है, जिसे प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स कहा जाता है. यही हिस्सा हमें सही-गलत का फैसला लेने, गुस्से को काबू करने और सोच-समझकर बोलने में मदद करता है. शराब सीधे इसी हिस्से पर असर डालती है और इसे सुस्त कर देती है. नतीजा यह होता है कि इंसान का आत्म-नियंत्रण कमजोर पड़ जाता है. जो बात नशे में न होने पर वह मन में ही दबा लेता, शराब पीने के बाद वही बात वह खुलकर बोलने या करने लगता है. यही वजह है कि शराब पीने के बाद लोग बिना सोचे-समझे झगड़ा, बहस या मारपीट तक कर बैठते हैं.
कौन से हार्मोन बढ़ा देते हैं गुस्सा?
शराब पीने के बाद शरीर में टेस्टोस्टेरोन नाम के हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो आक्रामकता और गुस्से से जुड़ा माना जाता है. इसके साथ ही तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन कॉर्टिसोल भी सक्रिय हो जाता है, जिससे इंसान चिड़चिड़ा और बेचैन महसूस करने लगता है. वहीं दिमाग को शांत रखने वाला हार्मोन सेरोटोनिन शराब के असर से कम हो जाता है.
सेरोटोनिन की कमी की वजह से मूड बिगड़ने लगता है और छोटी-छोटी बातों पर भी गुस्सा आने लगता है. यानी एक तरफ शरीर में आक्रामकता बढ़ाने वाले हार्मोन ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं, तो दूसरी तरफ शांत रखने वाला हार्मोन कमजोर पड़ जाता है, और यही मेल इंसान को उपद्रवी बना देता है.
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हर किसी पर असर एक जैसा क्यों नहीं होता?
यह जरूरी नहीं कि शराब पीने वाला हर इंसान हिंसक या उपद्रवी हो जाए. इसका असर व्यक्ति के स्वभाव, शराब की मात्रा, माहौल और पहले से मन में मौजूद तनाव पर भी निर्भर करता है. जो इंसान वैसे भी गुस्सैल स्वभाव का होता है या पहले से किसी बात को लेकर परेशान होता है, उसमें शराब का असर ज्यादा आक्रामक रूप में सामने आता है.
वहीं भीड़ और शोर-शराबे वाले माहौल में भी लोग एक-दूसरे को देखकर जल्दी उत्तेजित हो जाते हैं, जिससे छोटी बहस भी बड़ी झड़प में बदल सकती है. यही वजह है कि त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान प्रशासन भीड़भाड़ वाले इलाकों में शराब बिक्री पर खास नजर रखता है, ताकि जश्न किसी हंगामे में न बदल जाए.
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