कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक और दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अभी भारत में पूरी तरह दिखाई नहीं दिया है, लेकिन आने वाले समय में हालात मुश्किल हो सकते हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, उद्योग संगठन सीआईआई के वार्षिक बिजनेस सम्मेलन 2026 में बोलते हुए उदय कोटक ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों का दबाव तेजी से बढ़ सकता है। उनका कहना था कि पिछले दो महीनों में लोगों ने ईंधन की बढ़ी कीमतों का पूरा असर महसूस नहीं किया है, क्योंकि पुराने भंडार और सप्लाई व्यवस्था फिलहाल राहत दे रही हैं। हालांकि आने वाले समय में इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं और कारोबार दोनों पर पड़ सकता है।
उदय कोटक ने कहा कि सीमित आय वाले परिवारों के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने समझाया कि ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन लागत बढ़ने से खाने-पीने और रोजमर्रा की कई चीजों के दाम भी बढ़ जाते हैं। गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को आराम की स्थिति में नहीं रहना चाहिए और हर स्तर पर कठिन परिस्थितियों के लिए तैयारी करनी चाहिए। उदय कोटक के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचती है, तो इससे महंगाई, रुपये की स्थिति और देश की आर्थिक स्थिरता पर दबाव बढ़ सकता है।
बता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से ईंधन की बचत करने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने और गैर जरूरी सोने की खरीद टालने की अपील की थी। उदय कोटक ने भी इसी दिशा में सलाह देते हुए कहा कि अस्थिर वैश्विक माहौल में देशों और लोगों को अपनी आर्थिक स्थिति संभालकर चलनी चाहिए और जरूरत से ज्यादा खर्च करने से बचना चाहिए।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके साथ ही भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर भी दबाव बढ़ा है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत समेत कई आयातक देशों के लिए महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
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