इन मामलों में खाद्य कारोबार संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग ने संबंधित मामलों को आगे कानूनी कार्रवाई के लिए न्यायनिर्णयन अधिकारी (Adjudicating Officers) के सामने रखने की सिफारिश भी की है। गोट्टीगेरे (Gottigere) स्थित इंदिरा कैंटीन के एक वेयरहाउस को अधिकारियों ने सील भी कर दिया, क्योंकि वहां खाद्य पदार्थों की हैंडलिंग और स्टोरेज की स्थिति अस्वच्छ पाई गई थी। अधिकारियों ने अलग-अलग प्रतिष्ठानों से दाल, हल्दी पाउडर, खाना पकाने का तेल, गुड़, नमक, चीनी और तैयार खाद्य पदार्थों समेत कई चीजों के सैंपल भी लिए हैं। इन सैंपल को निर्धारित खाद्य प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा गया है। जांच के बाद यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ गुणवत्ता और निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों पर कितने खरे उतरते हैं।
इसी अभियान के दौरान होसकोटे स्थित जेप्टो (Zepto) के वेयरहाउस का भी निरीक्षण किया गया, जहां अधिकारियों ने बेहद अस्वच्छ परिस्थितियां होने की बात कही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वेयरहाउस से लिए गए किसी खास खाद्य उत्पाद का लैब टेस्ट क्या रहा या कंपनी के खिलाफ अंतिम कानूनी कार्रवाई क्या होगी। इसलिए, फिलहाल इसे निरीक्षण के दौरान सामने आई खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी चिंता के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी खाद्य उत्पाद के असुरक्षित साबित होने के अंतिम निष्कर्ष के तौर पर।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज बड़ी संख्या में लोग क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए किराने का सामान, पैकेज्ड फूड, दूध, फल-सब्जियां और अन्य खाद्य उत्पाद कुछ ही मिनटों में घर मंगाते हैं। ऐसे में वेयरहाउस और डार्क स्टोर में सामान की सही तरीके से स्टोरेज, तापमान कंट्रोल, साफ-सफाई, पैकेजिंग और एक्सपायरी डेट की निगरानी बेहद जरूरी हो जाती है। ग्राहक को सामान घर तक पहुंचने में कुछ ही मिनट लगते हैं, लेकिन उसके पीछे स्टोरेज और हैंडलिंग की पूरी प्रक्रिया होती है। अगर इस प्रक्रिया में स्वच्छता से समझौता होता है, तो खाद्य सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
कर्नाटक का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग फिलहाल ऐसे मामलों में सख्ती बढ़ा रहा है। विभाग ने साफ कहा है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का उद्देश्य केवल कंपनियों या खाद्य कारोबारियों की जांच करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आम लोगों को सुरक्षित, साफ-सुथरा, गुणवत्तापूर्ण और खाने योग्य भोजन मिले। आने वाले दिनों में ऐसे निरीक्षण और बढ़ सकते हैं, खासकर उन स्थानों पर जहां बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ तैयार, स्टोर या वितरित किए जाते हैं।
इस पूरे मामले से ग्राहकों के लिए भी एक अहम संदेश निकलता है। ऑनलाइन ऑर्डर किए गए किसी खाद्य उत्पाद की पैकेजिंग खराब हो, पैकेट फटा हुआ हो, एक्सपायरी डेट निकल चुकी हो या सामान की गुणवत्ता संदिग्ध लगे, तो उसे इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और संबंधित प्लेटफॉर्म या खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत की जा सकती है। वहीं, जेप्टो (Zepto) वेयरहाउस के मामले में आगे की कार्रवाई निरीक्षण और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा वेयरहाउस में बताई गई ‘बेहद अस्वच्छ’ परिस्थितियां क्विक-कॉमर्स कंपनियों के लिए खाद्य सुरक्षा और स्टोरेज मानकों को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी जरूर हैं।
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