देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इन्फोसिस ने अपने नेतृत्व में बड़े बदलाव का ऐलान कर दिया हैं। कंपनी ने गुरुवार को घोषणा की कि लगभग तीन दशक से इन्फोसिस से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी आशीष कुमार दास को अगला मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया हैं। बता दें कि वह 1 अप्रैल 2027 से यह जिम्मेदारी संभालेंगे और उनका कार्यकाल पांच वर्ष का रहेगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार वर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी सलील पारेख मार्च 2027 में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद पद छोड़ देंगे। कंपनी ने बताया कि नेतृत्व परिवर्तन को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए आशीष कुमार दाश आने वाले महीनों में लॉस एंजिलिस से भारत लौटेंगे। इसके बाद अक्टूबर से सलील पारेख उनके साथ मिलकर जिम्मेदारियों का चरणबद्ध हस्तांतरण शुरू करेंगे।
गौरतलब है कि आशीष कुमार दास वर्तमान में इन्फोसिस के ऊर्जा और उपयोगिता कारोबार का नेतृत्व कर रहे हैं। कंपनी के सह-संस्थापक और गैर-कार्यकारी अध्यक्ष नंदन नीलेकणी ने कहा कि दाश ने अपने लंबे कार्यकाल में परियोजना संचालन, बिक्री और ग्राहक प्रबंधन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है। यही अनुभव उन्हें कंपनी का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त बनाता हैं।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि मौजूदा समय में इन्फोसिस को ऐसे नेतृत्व की जरूरत थी जो कंपनी की कार्यप्रणाली और ग्राहकों की जरूरतों को अच्छी तरह समझता हो। टेक्निकल अनुसंधान संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फिल फर्श्ट के अनुसार आशीष कुमार दास का चयन कंपनी के लिए स्थिरता और बदलाव के बीच संतुलन बनाने वाला फैसला माना जा रहा हैं।
हालांकि इस घोषणा के साथ इन्फोसिस ने निवेशकों को एक और महत्वपूर्ण जानकारी दी हैं। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए आय वृद्धि का अनुमान घटाकर 1.5 प्रतिशत से 3 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले यह अनुमान 1.5 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत के बीच रखा गया था। कंपनी का कहना है कि एआई के बढ़ते प्रभाव और ग्राहकों द्वारा खर्च को लेकर बरती जा रही सावधानी का असर कारोबार पर दिखाई दे रहा हैं।
तिमाही नतीजों की बात करें तो इन्फोसिस की आय सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर 48,211 करोड़ रुपये रही, जबकि शुद्ध लाभ 12.2 प्रतिशत बढ़कर 7,769 करोड़ रुपये तक पहुंच गया हैं। कंपनी ने यह भी बताया कि उसके कुल कारोबार में एआई आधारित सेवाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 8.2 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 5.5 प्रतिशत थी। वहीं इस तिमाही में बड़े कारोबारी समझौतों का कुल मूल्य 3.6 अरब डॉलर रहा हैं।
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