NSE में LIC (Life Insurance Corporation) की भी बड़ी हिस्सेदारी है। LIC के पास NSE की करीब 10.7% हिस्सेदारी है। वहीं, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन (StockHolding Corporation), SBI कैपिटल और SBI के पास क्रमशः करीब 4.4%, 4.3% और 3.2% हिस्सेदारी बताई गई है। GIC के पास लगभग 1.64% और ओरिएंटल बैंक और न्यू इंडिया एश्योरेंस (New India Assurance) के पास करीब 1.42% हिस्सेदारी है। इस IPO की एक और खास बात यह है कि NSE के पास करीब 1.7 लाख शेयरधारक हैं, जो किसी अनलिस्टेड कंपनी के लिए बेहद बड़ी संख्या है।
NSE की लिस्टिंग का इंतजार निवेशकों को लंबे समय से है। SEBI की मंजूरी मिलने के बाद अब इसकी IPO प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। संभावित ₹30,000 करोड़ का इश्यू इसे भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े IPO में शामिल कर सकता है। NSE की लिस्टिंग से न केवल मौजूदा निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का मौका मिलेगा, बल्कि आम निवेशकों को भी देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज में सीधे निवेश करने का अवसर मिल सकता है।
NSE IPO की चर्चा का असर कुछ संभावित सेलिंग शेयरहोल्डर्स से जुड़े शेयरों पर भी दिखाई दिया है। सितंबर में न्यू इंडिया एश्योरेंस (New India Assurance) के शेयरों में करीब 19% की तेजी दर्ज हुई है, जबकि स्टॉकहोल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (StockHolding Corporation of India) की प्रमोटर कंपनी IFCI के शेयरों में भी इस महीने करीब 16% की बढ़त देखी गई है। हालांकि, किसी शेयर में तेजी को केवल NSE IPO से जोड़कर निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा। निवेशकों को NSE के IPO का प्राइस बैंड, वैल्यूएशन, कंपनी की वित्तीय स्थिति और इश्यू से जुड़े जोखिमों को ध्यान से समझने के बाद ही निवेश पर विचार करना चाहिए।
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