अमेरिकी राजनीति में इन दिनों एक नाम छाया हुआ है- जेडी वेंस. अमेरिका के मौजूदा उपराष्ट्रपति वेंस को 2028 के राष्ट्रपति चुनाव का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है. लेकिन उनका पूरा राजनीतिक भविष्य इस वक्त ईरान शांति समझौते से जुड़ा हुआ है. अगर यह डील कामयाब रही तो वेंस 2028 में राष्ट्रपति बन सकते हैं और अगर यह फेल हुई तो उनका करियर तबाह हो सकता है. आइए, इस पूरे खेल को डिटेल्स से समझते हैं…
ईरान डील का चेहरा क्यों बने वेंस?
अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार रात (17 जून 2026) शांति समझौता हुआ. इसके तहत ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना होगा और बदले में उसे आर्थिक राहत मिलेगी. वेंस ने इस डील को ‘क्षेत्रीय शांति समझौता’ बताया है, जो ईरान के अलावा खाड़ी देशों, इजरायल और लेबनान तक फैलेगा.
वेंस ने इस डील के बड़े पॉइंट्स बताए हैं:
- ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना
- होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना
व्हाइट हाउस के मुताबिक, वेंस राष्ट्रपति ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सबसे भरोसेमंद सदस्य हैं. उन्होंने स्पेशल एन्वॉय स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ मिलकर बैक-चैनल वार्ता में अहम भूमिका निभाई. वेंस ने व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग से लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स के इंटरव्यू तक, हर जगह इस डील का बचाव किया.
ट्रंप ने वेंस को ‘बलि का बकरा’ क्यों बनाया?
सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि क्या ट्रंप ने वेंस को इस डील का ‘फॉल गाय’ (बलि का बकरा) बना दिया है?
एक दिन पहले ट्रंप ने मजाक में कहा था, ‘अगर यह काम नहीं करता है, तो मैं जेडी को दोष दूंगा.’ जब एक पत्रकार ने वेंस से पूछा कि क्या ट्रंप ने उन्हें बलि का बकरा बनाया है, तो वेंस ने कहा, ‘मुझे लगता है कि राष्ट्रपति मजाक कर रहे थे.’
लेकिन कई रिपब्लिकन रणनीतिकारों को यह मजाक नहीं लगा. एक लंबे समय से रिपब्लिकन ऑपरेटिव ने कहा, ‘ट्रंप का जेडी को बस के नीचे फेंकना क्लासिक ट्रंप है.’ एक अन्य रिपब्लिकन स्ट्रैटेजिस्ट मैट मैकोवियाक ने कहा, ‘राष्ट्रपति लाइमलाइट में रहना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने यहां ऐसा किया है. यह एक जानबूझकर किया गया फैसला लगता है.’
यानी ट्रंप ने जानबूझकर वेंस को इस डील का चेहरा बनाया है, ताकि अगर डील फेल होती है तो सारा दोष वेंस पर आए और अगर कामयाब होती है तो ट्रंप खुद क्रेडिट ले लें.
2028 की रेस में वेंस की पोजिशन क्या है?
वेंस 2028 के रिपब्लिकन प्राइमरी में सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. सेंटर स्क्वायर वोटर्स वॉइस पोल के मुताबिक, 36% रिपब्लिकन और दक्षिणपंथी इंडिपेंडेंट वोटर्स वेंस को पसंद करते हैं. कंजरवेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस (CPAC) के स्ट्रॉ पोल में वेंस को 61% वोट मिले. रियल क्लियर पॉलिटिक्स के औसत में वेंस 45% के साथ आगे चल रहे हैं.
विदेश मंत्री मार्को रुबियो उनके सबसे बड़े कॉम्पिटिटर के रूप में उभरे हैं. एमर्सन कॉलेज के मई 2026 के पोल में दोनों 35-35% पर टाई हैं. फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप खुद वेंस और रुबियो के बीच टकराव को बढ़ावा दे रहे हैं. वे अरबपतियों से पूछ रहे हैं कि वे किसे पसंद करते हैं.
दोनों के समर्थन का आधार भी अलग है. रुबियो को वॉल स्ट्रीट और इस्टेब्लिशमेंट डोनर्स का समर्थन मिलने की संभावना है, जबकि वेंस का सिलिकॉन वैली से गहरा नाता है. एलन मस्क ने पहले ही संकेत दिए हैं कि वे वेंस का समर्थन कर सकते हैं.
वेंस ने हाल ही में ‘कम्यूनियन: फाइंडिंग माय वे बेक टू फेथ’ किताब भी लॉन्च की है, जो नास्तिकता से कैथोलिक धर्म अपनाने की कहानी है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह किताब धार्मिक और रूढ़िवादी वोटर्स को अपने साथ लाने के लिए है.
डील कामयाब रही तो क्या होगा?
अगर ईरान डील कामयाब होती है और ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित कर देता है, तो वेंस सबसे बड़े नायक बनकर उभरेंगे. वे खुद को एक विदेश नीति के नेता के रूप में पेश कर सकेंगे, जिन्होंने मिडिल ईस्ट में एक बड़े युद्ध को टाला होगा.
वेंस का डील से जुड़ा होना उन्हें ट्रंप का ‘सच्चा वारिस’ साबित करेगा. 2028 के चुनाव में यह उनके लिए सबसे बड़ा प्रचार हथियार बन सकता है.
अगर डील फेल हो गई तो क्या होगा?
अगर यह डील फेल होती है, तो वेंस का करियर बुरी तरह तबाह हो सकता है. क्योंकि:
- डील फेल होने पर सारा दोष सीधा उन पर आएगा.
- रिपब्लिकन पार्टी में पहले से ही गहरी फूट है. कुछ लोग युद्ध के खिलाफ हैं, तो कुछ ईरान के साथ किसी भी समझौते के खिलाफ. वेंस को इन दोनों गुटों को मनाना मुश्किल होगा.
- वेंस के कॉम्पिटिटर मार्को रुबियो इस पूरे मामले से दूर रहे हैं. अगर डील फेल होती है, तो रुबियो को सीधा फायदा होगा.
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘अगर डील बुरी तरह फेल होती है, तो वेंस की राजनीतिक उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा.’
आखिर में क्या वेंस 2028 में चुनाव लड़ेंगे?
वेंस ने अभी तक साफतौर पर 2028 में चुनाव लड़ने का ऐलान नहीं किया है. उन्होंने कहा है कि वे 2026 के मिडटर्म चुनाव के बाद अपनी पत्नी उषा वेंस के साथ इस पर चर्चा करेंगे. उन्होंने CBS संडे मॉर्निंग को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मैं तब तक फैसले नहीं लेता जब तक मुझे बिल्कुल जरूरी न हो.’ उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे चुनाव लड़ते हैं तो बेशक ट्रंप उनका समर्थन करेंगे.
ट्रंप ने अभी तक किसी को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है. वे वेंस और रुबियो दोनों को ही संभावित उम्मीदवार के रूप में पेश कर रहे हैं.
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