आखिरी दिन की सामान्य शुरुआत
मंगलवार रात को चंद्रशेखरन ने भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व चेयरमैन ओपी भट्ट और हाने बिरगिट सोरेंसन के विदाई समारोह में हिस्सा लिया। ये दोनों टाटा मोटर्स की बोर्ड मीटिंग से रिटायर हो रहे थे, जहां चंद्रशेखरन नॉन-एग्जीक्यटिव चेयरमैन हैं। द इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार को इस फैसले की जानकारी दी और फिर ग्रुप के भीतर अन्य लोगों को बताया।
उन्होंने अपना काम का दिन हमेशा की तरह शुरू किया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS मैनेजमेंट के साथ नियमित कारोबारी मामलों पर बैठक की। इसमें CEO के. कृतिवासन और COO आरती सुब्रमण्यम भी शामिल थीं। इसके बाद वे बॉम्बे हाउस में अपने चौथी मंजिल वाले कार्यालय गए और वहां से उन्होंने टाटा संस बोर्ड को अपना इस्तीफा भेजा।
बताया जाता है कि चंद्रशेखरन ने एयर इंडिया के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी गेब्रेमरियम से भी बात की और उन्हें आश्वस्त किया कि वे अगले छह महीने तक उनके साथ मिलकर काम करेंगे। गेब्रेमरियम को भी इस बात की जानकारी नहीं थी और वे इस फैसले से हैरान थे।
सहयोगियों को भी नहीं थी खबर
दिलचस्प बात यह रही कि कृतिवासन और सुब्रमण्यम को भी इस फैसले के बारे में पहले से कुछ नहीं बताया गया था। बाद में जब सहकर्मियों ने उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि वे भी उतने ही हैरान हैं जितने बाकी सब। कोई नाटक या समारोह नहीं था। चंद्रशेखरन उसी दिन टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहन व्यवसाय की बोर्ड बैठक में भी गए और बाद में मैनेजमेंट के साथ लंच भी किया।
एक सीनियर अफसर ने बताया कि सुबह बोर्ड बैठक से पहले जब वे चंद्रशेखरन से मिले तो वह हंसी-मजाक कर रहे थे और किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है। पूरे समूह में जैसे ही यह खबर फैली, सीईओ और वरिष्ठ अधिकारी इस बात पर विचार करने लगे कि इसका उनके अपने करियर पर क्या असर पड़ेगा।
कर्मचारियों को संबोधित करने आए स्टारबक्स
दिन की महत्वपूर्ण घटना दोपहर करीब साढ़े तीन बजे हुई जब चंद्रशेखरन अचानक बॉम्बे हाउस के अंदर स्थित स्टारबक्स आउटलेट पर पहुंचे और लगभग 200 कर्मचारियों के साथ एक छोटी सी बैठक की। टाटा संस, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और अन्य कंपनियों के कर्मचारी उनके आसपास जमा हो गए।
महज पांच मिनट की बातचीत में चंद्रशेखरन ने कर्मचारियों को आश्वस्त करने की कोशिश की और कहा कि समूह में हो रहे अटकलों और गपशप से विचलित न हों। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर जो लिखा है उस पर विश्वास न करें।”
उन्होंने यह भी कहा कि संगठन किसी भी व्यक्ति से बड़ा होता है और सभी को अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों को याद दिलाया कि टाटा समूह अपने लोगों द्वारा बना है और कर्मचारी ही संगठन को मजबूत बनाते हैं। इस छोटी सी बातचीत के बाद जोरदार तालियां बजीं और कई कर्मचारी भावुक हो गए, कुछ की आंखों में आंसू भी आ गए।
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