फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने शुक्रवार को अमेरिका के 4 राज्यों में फर्जी सशस्त्र डकैतियों में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में 10 भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया. FBI ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी डकैतियों में भाग लिया, जिससे पीड़ितों को U Visa Category के तहत आव्रजन लाभ प्राप्त करने का मौका मिला.
अमेरिका का U Non-Immigrant Visa (गैर-अप्रवासी वीज़ा) उन पीड़ितों के लिए है, जिन्होंने मानसिक या शारीरिक शोषण झेला है और जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए सहायक हैं. एफबीआई ने बताया कि फर्जी सशस्त्र डकैतियों के सिलसिले में 11 भारतीयों पर आरोप लगाए गए हैं. इनमें से 10 को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि ग्यारहवें आरोपी को भारत भेज दिया गया.
क्या है पूरा मामला
साल 2023 में घटनाओं का ये सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें मैसाचुसेट्स में 6 स्टोर (शराब की दुकानों और फास्ट फूड रेस्तरां) में फर्जी सशस्त्र डकैती की घटनाएं हुईं. एफबीआई के मुताबिक, ऐसी कथित लूटपाट की घटनाओं में तरीका एक जैसा ही रहता था. लुटेरा कैश लेकर भागने से पहले दुकान के मालिकों को बंदूक दिखाकर धमकाता था और ये घटना हमेशा दुकान के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो जाती थी. इसके बाद पीड़ित दुकानदार पुलिस को सूचना देने के लिए 5 मिनट या उससे अधिक समय तक इंतजार करते थे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि तब तक लुटेरे भाग गए हों.
अधिकारियों ने क्या बताया
FBI को छानबीन में पता चला कि ये लूटपाट की घटनाएं फर्जी थीं और इन्हें रामभाई पटेल और उसके साथियों ने अंजाम दिया. इसके अलावा पीड़ित कथित तौर पर पटेल को इस योजना में शामिल होने के लिए पैसे देते थे. पटेल दुकान मालिकों को भी उनकी दुकानों का इस्तेमाल नकली लूटपाट के लिए करने के बदले पैसे देता था. अधिकारियों ने खुलासा किया कि ये लूटपाट पीड़ितों को लाभ पहुंचाने के लिए की गई थी, जो क्लर्क या मालिक थे ताकि वो U non-immigration status (यू गैर-आप्रवासन स्थिति) के लिए आवेदक बन सकें.
कौन-कौन गिरफ्तार
अधिकारियों ने बताया कि जितेंद्र कुमार पटेल, महेश कुमार पटेल, संजय कुमार पटेल, अमिताबेन पटेल, संगीताबेन पटेल और मितुल पटेल को मैसाचुसेट्स में गिरफ्तार किया गया और बोस्टन की अदालत में प्रारंभिक पेशी के बाद रिहा कर दिया गया. रमेशभाई पटेल, रोनाकुमार पटेल, सोनल पटेल और मिनकेश पटेल को केंटकी, मिसौरी और ओहियो में गिरफ्तार किया गया.
अधिकारियों ने बताया कि लुटेरे रामभाई पटेल और भागने में मदद करने वाले ड्राइवर पर पहले भी आरोप लगाए गए थे और उन्हें दोषी ठहराया गया था. आरोपियों पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है, जिसमें 5 साल की जेल की सजा और 2,50,000 डॉलर का जुर्माना शामिल है.
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