संसद की मंजूरी का पेंच
अमेरिका के ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ कानून के अनुसार, राष्ट्रपति किसी भी सैन्य कार्रवाई को 60 दिनों से ज्यादा समय तक कांग्रेस (संसद) की अनुमति के बिना जारी नहीं रख सकते। यह 60 दिनों की मोहलत शुक्रवार को खत्म हो गई है। विपक्ष का कहना था कि ट्रंप को अब आगे की कार्रवाई के लिए संसद से मंजूरी लेनी होगी, लेकिन व्हाइट हाउस ने दलील दी है कि युद्ध पहले ही रुक चुका है, इसलिए किसी नई मंजूरी की जरूरत नहीं है।
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सीजफायर और जमीनी हकीकत
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि 7 अप्रैल से लागू हुए दो हफ्ते के युद्धविराम के बाद से अमेरिकी सेना और ईरान के बीच कोई सीधी गोलीबारी नहीं हुई है। हालांकि, स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। ईरान ने अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना कब्जा जमाया हुआ है। अमेरिका ने ईरान के तेल टैंकरों को रोकने के लिए अपनी सैन्य घेराबंदी कम नहीं की है।
अधिकारियों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष अब आधिकारिक रूप से खत्म हो गया है, क्योंकि युद्धविराम की अवधि को बढ़ा दिया गया है।
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मुश्किल में सरकार
ट्रंप प्रशासन इस दावे के जरिए घरेलू राजनीति और कानूनी बाधाओं से बचने की कोशिश कर रहा है। यदि अमेरिकी संसद इस दलील को नहीं मानती है, तो राष्ट्रपति के लिए सैन्य अभियानों को जारी रखना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल, व्हाइट हाउस का रुख साफ है कि ईरान के खिलाफ उनकी रणनीति अब युद्ध के बजाय नियंत्रण और दबाव पर टिकी है।
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