किसी के लिए 30 की उम्र करियर में नई ऊंचाइयों की शुरुआत होती है, तो किसी के लिए यह उम्र सपनों के टूटने का एहसास भी करा सकती है। कोलकाता की सुभाश्री मुखर्जी के लिए भी 30 साल की उम्र कुछ ऐसी ही थी।
30 की उम्र में लगा करियर खत्म हो गया
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सुभाश्री ने बताया कि उन्होंने 2016 में ग्रेजुएशन पूरा किया था। उन्हें उम्मीद थी कि अपने सहपाठियों की तरह वह भी नौकरी शुरू करेंगी। लेकिन पिता की ब्रेन सर्जरी ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। परिवार की जिम्मेदारियां उनकी प्राथमिकता बन गईं और नौकरी की शुरुआत का सपना पीछे छूटता चला गया।
खल गई दोस्त की ये बात
वह बताती हैं कि उस दौर में वह बहुत रोया करती थीं, क्योंकि उन्हें लगता था कि उनका करियर खत्म हो चुका है। एक बार उनकी स्कूल की दोस्त को पता चला कि सुभाश्री नौकरी नहीं कर रही हैं। उसने उनकी मां से कहा कि अगर कहीं काम की जरूरत हो तो सुभाश्री उसकी मदद कर सकती हैं। यह बात उन्हें अंदर तक चुभ गई। उन्हें डर लगा कि क्या वह कभी ऐसी पेशेवर पहचान बना पाएंगी, जहां लोग उनके काम की इज्जत करें।
इसी बीच कॉलेज के एक सीनियर से हुई बातचीत में उन्हें डिजिटल मार्केटिंग के बारे में पता चला। यह विचार उनके मन में बना रहा और कई साल बाद उन्होंने इसी क्षेत्र में करियर दोबारा शुरू करने का फैसला किया।
मां बनने के बाद शुरू की पढ़ाई
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान सुभाश्री की जिंदगी में कई बदलाव आए। उनकी ओवरी की सर्जरी हुई, शादी हुई और वह मां बनीं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपनी जरूरतों को हमेशा पीछे रखा। बच्चे को जन्म देने के महज 97 दिन बाद उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग सीखने के लिए Kraftshala के एक प्रोग्राम में दाखिला लिया। घर में नवजात बच्चा था और पढ़ाई के लिए उन्हें बच्चे की देखभाल के बीच समय निकालना पड़ता था। कई दिन उनकी पढ़ाई रात के 2 या 3 बजे तक चलती थी।
कई बार उन्होंने पढ़ाई छोड़ने के बारे में सोचा, लेकिन खुद से वादा किया कि जब तक सामने मौजूद कॉन्सेप्ट समझ नहीं आएगा, तब तक वह अपनी डेस्क नहीं छोड़ेंगी।
मेहनत रंग लाई, ग्लोबल मार्केटिंग ग्रुप में मिली नौकरी
महीनों की मेहनत का असर उनके इंटरव्यू में दिखाई देने लगा। कई कंपनियों में इंटरव्यू देने के बाद उन्हें दुनिया के प्रमुख मार्केटिंग और कम्युनिकेशन ग्रुप्स में से एक में प्रोग्रामेटिक एडवरटाइजिंग ट्रेनी की नौकरी मिल गई। फिलहाल प्रोबेशन के दौरान उन्हें 25 हजार रुपये प्रति माह मिल रहे हैं। नौकरी कन्फर्म होने के बाद उनका सालाना पैकेज 4.5 लाख रुपये हो जाएगा।
ऑफर लेटर देखकर रो पड़ा परिवार
नौकरी के लिए शॉर्टलिस्ट होने की खबर उन्हें उस समय मिली, जब वह अपने पति के साथ मोमोज खा रही थीं। उन्होंने शांत तरीके से पति से कहा, “मेरा सेलेक्शन हो गया है।” पति खुशी से जश्न मनाने लगे, जबकि सुभाश्री कुछ पल तक इस सफलता को महसूस करती रहीं और फिर भावुक होकर रो पड़ीं। उनके पति ने अपने सहकर्मियों के बीच मिठाइयां बांटीं। खास बात यह थी कि कुछ लोग इस बात पर सवाल उठाते थे कि मां बनने के बाद सुभाश्री दोबारा पढ़ाई क्यों करना चाहती हैं।
आज सुभाश्री की कहानी उन लोगों के लिए मिसाल है, जिन्हें लगता है कि करियर में लंबा ब्रेक आने के बाद वापसी संभव नहीं है। वह एक बात हमेशा याद रखती हैं- “जब आपको लगे कि अब हार मान लेनी चाहिए, तब याद रखिए कि आप अपने लक्ष्य के सबसे करीब हैं।”
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