Holi Travel Guide: भारत में होली का त्योहार सिर्फ़ एक सेलिब्रेशन नहीं, बल्कि एक भावना है. अगर आप इस होली घर से बाहर निकलकर रंगों के असली दंगल में डूबना चाहते हैं, तो भारत की ये आठ जगहें आपके लिए सबसे अच्छी हैं. यहां की होली इतनी मशहूर है कि दुनिया भर से लोग इसे देखने आते हैं…
मथुरा और वृंदावन: होली का सेंटर, जहां कई दिनों तक सेलिब्रेशन चलता है. बांके बिहारी मंदिर में “फूलों वाली होली” का अनुभव करें, जहां पुजारी भक्तों पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाते हैं, जिससे आध्यात्मिक और वाइब्रेंट माहौल बनता है. भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में होली का उत्साह हफ्तों पहले शुरू हो जाता है. यहां के द्वारकाधीश मंदिर की होली और विश्राम घाट पर होने वाले आयोजन आपको भक्ति और रंगों के अनूठे संगम में सराबोर कर देंगे.

बरसाना: मशहूर “लट्ठमार होली” के लिए जाना जाता है, जिसमें औरतें पूजा करते समय आदमियों पर लाठियां फेंकती हैं. यह पुरानी परंपरा राधा और कृष्ण की कहानी को ज़िंदा करती है और एक एडवेंचरस, ड्रामाटिक और दिलकश नज़ारा पेश करती है.

जयपुर: पिंक सिटी होली में रॉयल्टी लाती है। महल के आंगनों में लोक संगीत, पारंपरिक डांस और कुदरती रंगों के साथ होली मनाएं, जहां राजस्थान की शाही विरासत को अच्छी तरह से प्लान किए गए, सुरक्षित और वाइब्रेंट सेलिब्रेशन के ज़रिए खूबसूरती से दिखाया जाता है.
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उदयपुर: सिटी पैलेस में होली की फॉर्मल शुरुआत के साथ एक शानदार होली सेलिब्रेशन का अनुभव करें. शाही जुलूस, लोक परफॉर्मेंस और झील के खूबसूरत नज़ारे इसे सेलिब्रेट करने का एक शानदार और वाइब्रेंट तरीका बनाते हैं.

पुष्कर: युवाओं के लिए एक स्वर्ग, पुष्कर होली के दौरान एक शानदार, खुली हवा में सेलिब्रेशन से भर जाता है. पवित्र झील के आस-पास म्यूज़िक, डांस और सुकून भरे माहौल के साथ, यह उन लोगों के लिए एकदम सही जगह है जो एक एनर्जेटिक सेलिब्रेशन चाहते हैं.

वाराणसी: गंगा नदी के किनारे पुराने घाटों पर होली मनाएं। यहां का जोश बेमिसाल है, सड़कें रंगों और म्यूज़िक से भरी होती हैं, और पास में ही अनोखी, अचानक होने वाली और दिल को छू लेने वाली “मसान की होली” की रस्म होती है.

आनंदपुर साहिब: रंगों के बजाय, ज़बरदस्त “होला घुला” का अनुभव करें. यह सिख परंपरा मार्शल आर्ट, घुड़सवारी और तलवारबाज़ी दिखाती है, जो भारत में पारंपरिक, रंगीन त्योहारों के जश्न का एक ज़ोरदार और अनुशासित विकल्प देती है.

शांतिनिकेतन: रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शुरू किया गया ‘बसंत उत्सव’ शांतिनिकेतन में बेहद शालीनता और सांस्कृतिक तरीके से मनाया जाता है. यहां छात्र पीले वस्त्र पहनकर नृत्य और संगीत के माध्यम से बसंत का स्वागत करते हैं और गुलाल से होली खेलते हैं.
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