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ममता बनर्जी INDIA ब्लॉक की मीटिंग के लिए दिल्ली आईं थीं। अभी फिलहाल वे दिल्ली में ही हैं।
तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन ममता बनर्जी ने कल्याण बनर्जी को लोकसभा में पार्टी का चीफ व्हिप बनाया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लेटर लिखकर मांग की है इस जानकारी तत्काल प्रभाव रिकॉर्ड में लेकर जरूरी कार्रवाई की जाए।
एक दिन पहले TMC के लोकसभा में 28 सांसदों में से 20 ने बगावत के बाद ममता का साथ छोड़ दिया था। उन्होंने NDA सरकार को समर्थन देने का फैसला किया।
इन लोगों ने काकोली घोष दस्तीदार को अपना चीफ व्हिप चुना था। खुद काकोली ने बागी सांसदों के साइन वाला लेटर लोकसभा स्पीकर भेजा था। इसमें TMC से अलग हुए अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की थी।
TMC सांसद शताब्दी रॉय के घर बागी सांसदों की बैठक हुई। इसमें जून मालिया, बापी हलदर, अबू ताहिर खान और असित कुमार मल समेत कई सांसद मौजूद रहे। बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी भी उनके घर सांसदों से मिलने पहुंचे थे।
इससे पहले इनमें से 11 सांसदों ने 9 जून को दोपहर केंद्रीय मंत्री और BJP के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पर मीटिंग की। इस दौरान बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी भी इनसे मिलने पहुंचे थे।
लोकसभा में TMC के अभी 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। इससे पहले 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। इस गुट ने ऋतब्रत को अपना नेता बनाया है।

बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी दिल्ली में TMC सांसद शताब्दी रॉय के घर से निकले।
TMC सांसदों की एक बैठक देर रात भी हुई, फोटो खींचने पर बहस
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, टीएमसी के 20 सांसदों की रविवार देर रात दिल्ली के एक अज्ञात स्थान पर अनौपचारिक बैठक भी हुई। इसमें सांसदों ने मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था को लेकर असंतोष जताया।
सोमवार को इस बैठक की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई। कई TMC सांसद एक मेज के आसपास बैठे दिखाई दे रहे हैं। उस समय एक सांसद के फोटो खींचने पर विवाद भी हुआ। इसमें सुखेंदु शेखर रे भी बैठे दिखाई दे रहे हैं।
3 सवाल-जवाब से जानिए आगे क्या होगा?
सवाल: TMC सांसदों पर दल-बदल कानून लगेगा? जवाब: TMC के पास कुल 28 लोकसभा सांसद हैं। अगर 20 सांसदों का बागी गुट खुद को अलग दल या लोकसभा में असली टीएमसी पार्टी बताता है, तो इन पर दल-बदल कानून नहीं लगेगा, क्योंकि बागी गुट के पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन है।
सवाल: TMC के 20 सांसदों के समर्थन के बाद क्या NDA की ताकत बढ़ेगी? जवाब: हां बढ़ेगी। लोकसभा में कुल 543 सांसदों में से एनडीए के अभी 293 सांसद हैं। 20 सांसदों के समर्थन के बाद यह संख्या बढ़कर 313 हो जाएगी।
सवाल: NDA को क्या फायदा मिलेगा? जवाब: कोई भी बिल पास कराने में आसानी होगी। सरकार परिसीमन और उससे जुड़े महिला आरक्षण बिल को पास करा सकती है। 18 अप्रैल को जब परिसीमन बिल पर वोटिंग हुई थी, तो बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े थे। बिल पास कराने के लिए 352 वोट चाहिए थे। यानी बिल 52 वोट से गिर गया था। अगर टीएमसी के 20 सांसद एनडीए में शामिल हो जाएंगे,तो दो-तिहाई बहुमत के लिए 32 और सांसदों की जरूरत पड़ेगी।

सुखेंदु का दावा- TMC के लोग ममता से नाराज
TMC के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर ने आज सुबह ही राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे दिया और पार्टी भी छोड़ दी। त्यागपत्र में उन्होंने ममता के 15 साल के अराजक शासन को पार्टी की हार का नतीजा बताया और भाजपा की तारीफ की थी। राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने सुखेंदु शेखर का इस्तीफा मंजूर कर लिया है।
सुखेंदु ने इस्तीफे के बाद मीडिया से कहा था कि पार्टी के कई लोग ममता मनमाने ढंग से पार्टी चला रही थीं, इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल 2029 तक था। अब सीट खाली हो चुकी है, अब इस पर उपचुनाव कराया जा सकता है।

बागी विधायक ऋतब्रत बोले- सुखेंदु की बात काफी हद तक सही
सुखेंदु शेखर के इस्तीफे पर बंगाल में TMC के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह सिर्फ सुखेंदु की निजी बात नहीं है। मैंने सुखेंदु से सीधे बात नहीं की है, लेकिन टीवी पर उनके बयान देखे और सुने हैं। मैं उनकी बातों से सहमत हूं। राज्यसभा के कामकाज को लेकर सुखेंदु की बात काफी हद तक सही है। संसद कोई क्विज खेलने की जगह नहीं है।
उधर, टीएमसी ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) बनाए जाने के विधानसभा स्पीकर के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने तारीख तय नहीं की है।
काकोली घोष ने कहा- मैं ही चीफ व्हिप रहूंगी
काकोली घोष ने कहा- मैं 1986 से ममता बनर्जी के साथ हूं। 2005 में मुझे पार्षद तक का चुनाव लड़वाया गया। मैं तो लड़ते-लड़ते यहां आई हूं। मेरे मामा 5 बार के सांसद, जेठ मंत्री रह चुके हैं। मेरे दादा स्वतंत्रता सेनानी थे। पिता भी लड़ते-लड़ते मारे गए। मेरा सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैंने बहुत सह लिया।

काकोली ने दावा किया कि वह अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला साथी सांसदों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि सांसदों ने NDA के साथ जाने का फैसला किया है। उनका मानना है कि यही जनता के जनादेश के अनुरूप है।
काकोली ने 27 मई को टीएमसी छोड़ दी है, लेकिन सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया था। प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजे लेटर में काकोली ने लिखा था कि मानसिक संघर्ष और लंबे चिंतन के बाद यह फैसला लिया है।
अधीर रंजन बोले- बागी सीधे BJP में शामिल हो जाते
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अगर ये सांसद भाजपा का समर्थन करना चाहते हैं तो उन्हें सीधे NDA या BJP में शामिल हो जाना चाहिए था। इतने सालों तक भाजपा के खिलाफ राजनीति करने के बाद अब अलग गुट बनाकर समर्थन देना सिर्फ दल-बदल विरोधी कानून से बचने की कोशिश लगता है। देश के विकास के नाम पर समर्थन देने की बात करने वाले सांसदों के लिए अलग रहने के बजाय BJP में विलय करना ज्यादा उचित होता।
महुआ मोइत्रा बोलीं- यूसुफ पठान थोड़ी शर्म दिखाइए
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा- 2024 में पार्टी से जीतने वालों को एनडीए के लिए जनादेश नहीं मिला था। जो भाजपा में जाना चाहते हैं, वे इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ें, तभी उनकी ताकत पता चलेगी। पीली पतलून वाले जितने भी लालची और स्वार्थी गद्दार हैं, वे अब बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।
इसके बाद उन्होंने सांसद यूसुफ पठान पर लिखा की आप दिल्ली इसलिए भाग रहे हैं क्योंकि अमित शाह ने आपको बुलाया है? थोड़ी हिम्मत दिखाइए, आप भारत के लिए खेले हैं और हमारे जिले ने आपको भारी बहुमत से जिताया है, इसलिए थोड़ी शर्म दिखाइए।
इससे पहले 4 जून को बंगाल के अखबार आनंदबाजार पत्रिका ने दावा किया था कि ममता बनर्जी सौरव गांगुली के जरिए यूसुफ पठान को सांसदी छोड़ने के लिए कह रही थीं। बाद में 6 जून को सौरव और खुद पठान ने स्पष्ट किया कि यह दावा गलत है। पूरी खबर पढ़ें…
कीर्ति आजाद- भाजपा झूठ फैला रही, नेतओं को ब्लैकमेल किया जा रहा
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सोमवार को कहा- टीएमसी की अंदरूनी कलह को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है। ये मनगढ़ंत कहानी है। सीबीआई और ईडी जैसी जांच एजेंसियों का डर दिखाकर नेताओं को ब्लैकमेल और मजबूर किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि बागी गुट के पास 20 सांसद नहीं हैं और यह पूरा मामला गृह मंत्री अमित शाह के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।
वहीं, टीएमसी ने विधायकों में हुई टूट के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। मामले पर 11 जून को सुनवाई होगी।
28 साल पुरानी TMC में बगावत, 3 जून को अलग हुए 58 विधायक

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में 28 साल के इतिहास में पहली बार औपचारिक तौर पर टूट सामने आई है। बुधवार को 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी। पूरी खबर
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