कई लोगों को चाय पीने के बाद जलन, गैस, खट्टी डकार या बेचैनी महसूस होती है, और वे समझ नहीं पाते कि वजह वही रोज की चाय है. अच्छी खबर ये है कि चाय छोड़े बिना भी इसे हल्का और कम नुकसान वाला बनाया जा सकता है. बस बनाने का तरीका थोड़ा बदलना होगा.
ज्यादा उबली चाय क्यों करती है नुकसान
अक्सर लोग सोचते हैं कि चाय जितनी देर उबलेगी, उतनी अच्छी बनेगी. लेकिन सच उल्टा है. लंबे समय तक उबालने से चाय पत्ती के तत्व पानी में ज्यादा घुल जाते हैं.
-टैनिन बढ़ने से चाय कसैली और कड़वी बनती है
-कैफीन ज्यादा होने से दिल की धड़कन तेज या बेचैनी हो सकती है
-ज्यादा एसिडिक होने से पेट में जलन और गैस बढ़ती है
-दूध के साथ ज्यादा उबालने से चाय भारी और अपच वाली बनती है
यानी स्वाद भले स्ट्रॉन्ग लगे, शरीर के लिए ये चाय सही नहीं रहती.
हल्की और कम नुकसान वाली चाय बनाने का सही तरीका
अगर आप रोज चाय पीते हैं और पेट पर हल्का असर चाहते हैं, तो ये तरीका अपनाएं:
1. पानी से शुरुआत करें
एक कप चाय के लिए लगभग 1 कप पानी लें. पहले पानी को गर्म करें.
2. मसाले पहले डालें
अदरक, इलायची या जो भी हल्का मसाला डालना हो, पानी में डालें.
1–2 उबाल आने दें ताकि स्वाद पानी में आ जाए.
3. चाय पत्ती कम रखें
अब बहुत थोड़ी चाय पत्ती डालें. बस एक उबाल आने दें.
लंबे समय तक पत्ती न पकाएं.
4. दूध बाद में डालें
अब लगभग आधा कप दूध डालें.
अगर उबाल देना हो तो सिर्फ एक हल्का उबाल दें.
5. गैस तुरंत बंद करें
ज्यादा खौलाने से चाय फिर भारी हो जाएगी.
6. अंत में चीनी मिलाएं
स्वाद के अनुसार चीनी डालें और चाय छान लें.
इस तरीके में पत्ती और दूध दोनों ज्यादा देर तक नहीं पकते, इसलिए टैनिन और कैफीन कम रहते हैं.
हल्की चाय के फायदे
ऐसी चाय पीने से शरीर पर असर काफी हल्का रहता है. पेट में जलन और गैस कम होती है. चाय पीने के बाद भारीपन नहीं लगता. दिन में 2–3 बार पीने पर भी परेशानी कम. स्वाद भी बना रहता है. नींद और दिल की धड़कन पर असर कम. जो लोग रोज कई कप चाय पीते हैं, उनके लिए ये तरीका खास फायदेमंद है.
गाढ़ी चाय की आदत क्यों बदलनी चाहिए
ज्यादातर घरों में चाय का रंग जितना गहरा, उसे उतना अच्छा माना जाता है, लेकिन यही गाढ़ापन ज्यादा उबाल और ज्यादा पत्ती से आता है. धीरे-धीरे यही आदत पेट की समस्या, एसिडिटी और अपच की वजह बनती है. खासकर खाली पेट गाढ़ी चाय पीना पेट की अंदरूनी परत को चुभता है, जिससे जलन बढ़ती है.
और हल्की चाय पीना चाहते हैं तो
अगर सच में चाय से नुकसान कम करना चाहते हैं, तो ये छोटे बदलाव मदद करेंगे. चाय को बार-बार गरम न करें. पहले से बनी चाय दोबारा न उबालें. पत्ती कम रखें, दूध ज्यादा देर न पकाएं. चाहें तो कभी-कभी बिना दूध की चाय लें. खाली पेट गाढ़ी चाय से बचें. धीरे-धीरे स्वाद भी हल्की चाय का अच्छा लगने लगता है.
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