बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के बयान पर कड़ा पलटवार किया है। कंगना ने फिल्म इंडस्ट्री के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बात देश के गंभीर मुद्दों और देशहित की आती है, तब बॉलीवुड के लोग अक्सर मौन साध लेते हैं या फिर सिर्फ एकतरफा सोच का समर्थन करते हैं।
कंगना रनौत ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री की यह आदत नई नहीं है, बल्कि उनका रवैया हमेशा से ही पक्षपाती रहा है। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान संसद भवन की ओर बढ़ते उग्र प्रदर्शनकारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “जब जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर हमला हो रहा था, तब मेरे कई सांसद मित्र वहां मौजूद थे। लोगों ने उनकी गाड़ियों पर चढ़कर हमला किया और उनकी गाड़ियों की खिड़कियां तक तोड़ दीं।’ कंगना ने सवाल उठाया कि उस समय इस तरह की हिंसा पर फिल्म इंडस्ट्री का कोई भी बड़ा चेहरा सामने क्यों नहीं आया?
‘जेन जेड’ की परिभाषा पर खड़े किए गंभीर सवाल
युवाओं और ‘जेन जेड’को लेकर चल रही बहस पर कंगना ने सीधा सवाल दागा। उन्होंने पूछा कि जो लोग देश को गाली देते हैं, प्रधानमंत्री को अपशब्द कहते हैं और देश को बांटने या तोड़ने की बात करते हैं, क्या सिर्फ वही लोग ‘जेन जेड’ कहलाएंगे? उन्होंने कहा कि जब झारखंड में मासूम बच्चों पर अत्याचार और हिंसा हो रही है, तो क्या वे बच्चे इस देश के युवा या ‘जेन जेड’ नहीं हैं? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे मामलों पर बॉलीवुड की संवेदनाएं मर जाती हैं?
‘हम खुद युवा हैं, युवा विरोधी कैसे हो सकते हैं?’
कंगना ने उन आरोपों का भी खंडन किया जिनमें सरकार या उनकी विचारधारा को युवा विरोधी बताया जाता है। उन्होंने कहा, ‘हम युवाओं के खिलाफ क्यों होंगे? हम खुद युवा हैं और देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं।’
झारखंड के मुद्दों पर बॉलीवुड की चुप्पी पर तंज
कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह और फिल्म इंडस्ट्री के अन्य अभिनेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग जंतर-मंतर पर आकर घड़ियाली आंसू बहाते हैं, उन्हें झारखंड में पीड़ित बच्चों के लिए भी आंसू बहाने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर संवेदनशीलता दिखानी ही है, तो वह निष्पक्ष होनी चाहिए। सिर्फ किसी खास राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं।
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