Who is IPS Archita Mittal: ओडिशा कैडर की IPS अर्चिता मित्तल ने ड्यूटी के दौरान थके-हारे कांवड़ियों के पैर दबाकर इंसानियत की मिसाल पेश की। IIM की छात्रा रहीं अर्चिता का यह सेवा भाव वायरल हो गया है।
वर्दी में जमीन पर बैठकर दबाए कांवड़ियों के पैर
सावन के सोमवार को प्रसिद्ध गुप्तेश्वर मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए हजारों ‘बोल बम’ श्रद्धालु नंगे पैर लंबी यात्रा तय करके पहुंच रहे थे। धूप और कई किलोमीटर की लगातार पैदल यात्रा के कारण श्रद्धालु बुरी तरह थक चुके थे और कई लोगों के पैरों में बहुत दर्द हो रहा था।
सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए तैनात 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी अर्चिता मित्तल से श्रद्धालुओं की यह तकलीफ देखी नहीं गई। उन्होंने अपनी पुलिस वर्दी में ही जमीन पर बैठकर थके हुए श्रद्धालुओं के पैरों की मालिश करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, जब एक महिला श्रद्धालु बेहोश हो गई, तो उन्होंने तुरंत फर्स्ट-एड देकर उसे होश में लाया। खाकी वर्दी में एक बड़े अधिकारी का यह सेवा भाव देखकर हर कोई भावुक हो गया।
कौन हैं IPS अर्चिता मित्तल?
आईपीएस अर्चिता मित्तल मूल रूप से हरियाणा के हिसार की रहने वाली हैं। वे शुरुआत से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी होनहार रही हैं। उन्होंने दिल्ली के मशहूर श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से बी.कॉम (ऑनर्स) किया और फिर आईआईएम लखनऊ से मैनेजमेंट में डिप्लोमा (MBA) पूरा किया। IIM से पढ़ाई के बाद उन्होंने डेलॉयट (Deloitte) जैसी प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी में इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर कंसलटेंट के रूप में काम किया। अर्चिता बचपन से ही बैडमिंटन की अच्छी खिलाड़ी रही हैं और उन्होंने स्टेट लेवल तक बैडमिंटन खेला है।
प्राइवेट नौकरी छोड़ पूरा किया UPSC का सपना
एक साल तक अच्छी सैलरी वाली नौकरी करने के बाद अर्चिता ने देश सेवा के लिए सिविल सर्विसेज में जाने का फैसला किया। उन्होंने नौकरी छोड़कर फरीदाबाद में यूपीएससी की तैयारी शुरू की। वर्ष 2020 में अपने पहले प्रयास में असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2021 के दूसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 389 हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुनी गईं। उन्हें ओडिशा कैडर मिला।
छात्रों के लिए सीख
आईपीएस अर्चिता मित्तल का जीवन यह सिखाता है कि सफलता केवल उच्च पद हासिल करने का नाम नहीं है, बल्कि उस पद पर रहते हुए समाज के प्रति संवेदनशील और विनम्र बने रहना सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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