Phone Battery Myths: स्मार्टफोन को लेकर कई मिथ्स सालों से चलते आ रहे हैं. पिछले कुछ समय से टेक्नोलॉजी एडवांस हुई है और अब स्मार्टफोन भी बदल गए हैं, लेकिन लोगों के बीच ये मिथ्स वैसे ही घर किए हुए हैं. सबसे बड़े मिथ्स बैटरी को लेकर हैं. पहले बैटरी की कैपेसिटी कम होती थी, जिसके चलते कुछ बातें सच थीं, लेकिन अब टेक्नोलॉजी बदलने से बहुत कुछ बदल गया है. आइए आज जानते हैं कि बैटरी को लेकर कौन-सी ऐसी बातें हैं, जो अब सच नहीं है.
ये काम करने से ज्यादा नहीं चलती फोन की बैटरी
चार्ज करने से पहले बैटरी को एकदम डिस्चार्ज करना- लोगों के बीच यह भ्रम है कि फोन की बैटरी एकदम डिस्चार्ज होने के बाद ही चार्ज करनी चाहिए. यह बात पूरी तरह से गलत है और इससे फोन को नुकसान भी पहुंच सकता है. एकदम डिस्चार्ज होने के बाद बैटरी को चार्ज करने के लिए फोन को ज्यादा काम करना पड़ेगा. इसलिए हमेशा बैटरी को 30 प्रतिशत तक आने के बाद चार्ज कर लेना चाहिए.
ऐप्स को फोर्स क्लोज करने से- अगर आपके फोन में एक साथ कई ऐप्स ओपन हैं तो यह फोन की स्पीड को स्लो कर सकती है, लेकिन इसका बैटरी पर कोई असर नहीं होता. मॉडर्न स्मार्टफोन एफिशिएंट तरीके से बैकग्राउंड ऐप्स को मैनेज कर लेते हैं. इसलिए अगर आप ऐप्स को बार-बार यूज करते हैं तो इन्हें फोर्स क्लोज न करें. ऐसा करने से फोन की बैटरी की बचत तो नहीं, लेकिन खपत जरूर ज्यादा होगी.
फास्ट चार्जिंग से खराब नहीं होती बैटरी- बैटरी को लेकर एक मिथ फास्ट चार्जिंग से भी जुड़ा हुआ है. दरअसल, कई लोगों को लगता है कि फास्ट चार्जिंग से बैटरी हेल्थ खराब होती है. अगर ऐसा होता तो कंपनियां फास्ट चार्जिंग का फीचर जोड़ती ही नहीं. अगर आपका फोन फास्ट चार्जिंग के समय ओवरहीट होता है तो केवल उस समय फास्ट चार्जिंग खराब होती है. इसके अलावा फास्ट चार्जिंग से फोन की बैटरी पर कोई खराब असर नहीं पड़ता.
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